J-20 Stealth फाइटर जेट निकला कबाड़, भारतीय राफेल के सामने नहीं मिला खरीददार, स्टील्थ के नाम पर हवाबाजी?
J-20 Stealth News: चीन का दावा है, कि उसके पास दो पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स हैं। एक जे-20 माइटी ड्रैगन, जिसका चीनी नाम चेंग्दू है, जबकि दूसरा फाइटर जेट है FC-31। चीन दावा करता है, कि उसके ये दोनों फाइटर जेट स्टील्थ टेक्नोलॉजी वाले फिफ्थ जेनरेशन फाइटर जेट हैं।
लेकिन, चीन के ये दावे बुरी तरह फेल नजर आ रहे हैं, क्योंकि चीनी फाइटर जेट्स खरीदने के लिए कोई भी देश तैयार नहीं हो रहा है। चीन ने FC-31 फाइटर जेट खरीदने के लिए फिर भी अपने गुलाम पाकिस्तान को मजबूर कर दिया, लेकिन जे-20 माइटी ड्रैगन, एयरक्राफ्ट बाजार में पस्त हो गया है।

J-20 Stealth फाइटर जेट ने पहली बार जनवरी 2011 में उड़ान भरी थी और 2017 में चीनी एयरफोर्स (PLAAF) में इसे शामिल कर लिया गया। ऐसी रिपोर्ट है, कि चीन में 230 यूनिट J-20 Stealth फाइटर विमानों का निर्माण किया गया है, जिनमें से 150 विमानों के PLAAF के चार रेजिमेंटों में शामिल किया गया, जबकि चीन की योजना बाकी विमानों को अपने मित्र देशों को बेचने की थी। लेकिन, ऐसा नहीं हो पाया।
क्यों फेल हो रहा है J-20 Stealth फाइटर जेट प्रोजेक्ट?
ऑपरेशनल स्टील्थ फाइटर जेट बनाने और उसकी अपने एयरफोर्स के बेड़े में तैनाती करने वाला, चीन दुनिया का दूसरा और एशिया का पहला देश था। लेकिन, चीन के इस फाइटर जेट की तमाम जानकारियां रहस्यमयी हैं। इस फाइटर जेट को लेकर चीन की सरकार, जिस देश को विमान बेचना चाहती है, उसे भी सही सही जानकारी नहीं देती है।
लिहाजा, कई सैन्य एक्सपर्ट्स ने J-20 Stealth फाइटर जेट की क्षमता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है, कि असल में J-20 एक पांचवीं पीढ़ी का विमान है ही नहीं, जैसा चीन दावा करता है। एक्सपर्ट्स का कहना है, कि ये चौथी या फिर 4.5 पीढ़ी का एक फाइटर जेट हो सकता है। इस जेट को अभी भी चीनी एयरफोर्स ही उड़ा रही है और अभी तक इस फाइटर जेट ने विदेशों में होने वाले एयरशो या फिर सैन्य अभ्यास में भाग नहीं लिया है, लिहाजा ये युद्ध लड़ने में कितना सक्षम हो सकता है, इसकी तो बात करना ही बेमानी है।
जबकि इसके विपरीत, भारत ने फ्रांस से जो राफेल फाइटर जेट खरीदा है, उसे आधिकारिक तौर पर फ्रंटल स्टील्थ वाला 4.5-पीढ़ी का विमान घोषित किया गया है। और दुनिया की 6 बड़े देशों में इसका इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके अलावा, फ्रांसीसी राफेल फाइटर जेट अभी तक पांच लाइव युद्धों में हिस्सा ले चुका है। यानि, युद्ध के मैदान में भी इसे आजमाया जा चुका है।
अगर भारत और चीन के बीच युद्ध शुरू होता है, तो चीन अपने J-20 फाइटर जेट को हिमालयी क्षेत्र में भारतीय राफेल के खिलाफ तैनात कर सकता है। लिहाजा, जे-20 की ताकत और उसकी कमजोरी को समझना जरूरी हो जाता है।
J-20 फाइटर जेट प्लेटफॉर्म कैसा है?
J-20 फाइटर जेट डबल इंजन वाला विमान है, जिसका प्रारंभिक विकास 1990 के दशक में शुरू किया गया था। J-20 फाइटर जेट के तीन वेरिएंट हैं। प्रारंभिक उत्पादन मॉडल J-20A, थ्रस्ट-वेक्टरिंग J-20B, और ट्विन-सीट टीमिंग सक्षम J-20S।
J-20S दुनिया का पहला दो सीटों वाला स्टील्थ लड़ाकू विमान है। विमान में डायवर्टरलेस सुपरसोनिक इनलेट (डीएसआई) इंटेक, स्टील्थ कोटिंग और अंडरविंग फेयरिंग हैं। इसके अलावा, इसमें एवियोनिक्स एडवांस सेंसर फ़्यूज़न लगाया गया है, जो युद्ध के वक्त पायलट को युद्ध के माहौल के बारे में अपडेट करता है। लेकिन, इस जेट के रडार को लेकर काफी कम जानकारी बाहर आ पाई है। विश्लेषकों का मानना है, कि यह 2000-2200 ट्रांसमिट/रिसीव मॉड्यूल के साथ "केएलजे-5" सक्रिय इलेक्ट्रॉनिक रूप से स्कैन किए गए ऐरे (एईएसए) रडार का एक एडवांस वेरिएंट है।
J-20 फाइटर जेट में क्या कमियां हैं?
चीन के इस फाइटर जेट में कई खामियां हैं और ऐसा विरोधियों को डराने के लिए और अपनी सेना को लेकर प्रोपेगेंडा फैलाने के लिए किया गया है। जैसा अमेरिकी सेना अकसर अमेरिकी संसद से ज्यादा फंड हासिल करने के लिए करती रहती है।
चीन वास्तव में लंबे समय से J-20 को अमेरिका के पांचवीं पीढ़ी के जेट, F-22 और F-35 के खिलाफ एक बेहतरीन फाइटर जेट बताकर प्रोपेगेंडा करता रहा है। जबकि, जमीनी हकीकत यह है, कि चीन ने सुरक्षा चुनौतियों के कारण संख्या बढ़ाने के लिए इस फाइटर जेट को बनाने में काफी जल्दबाजी की है।
J-20 स्टील्थ फाइटर जेट काफी लंबा विमान है, लिहाजा इस जेट की रडार क्षमता को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं और ये इसकी डिजाइन को काफी जटिल बना देता है। इसके अलावा, स्टील्थ फाइटर जेट के रखरखाव में भारी-भरकम खर्च आता है और अमेरिका भी इस समस्या से जूझता है, लेकिन चीन ने 200 से ज्यादा ऐसे जेट बना लिए हैं और एक भी जेट बिका नहीं है, तो फिर चीन इतना खर्च कैसे कर पा रहा है?
इसके अलावा, इस फाइटर जेट में W-15 इंजन का इस्तेमाल किया गया है, जिसमें 2015 में विस्फोट हो गया था, जिससे इस फाइटर जेट के सिंगल-क्रिस्टल टरबाइन ब्लेड की क्वालिटी को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गये।
इसके अलावा, सवाल ये भी हैं, कि क्या विमान के इंजन सुपर-क्रूज क्षमता हासिल करने के लिए पर्याप्त जोर पैदा करते हैं। चीनी विमान इंजनों को ज्यादातर रूसी इंजनों से रिवर्स-इंजीनियर किया गया है, जो रडार और आईआर हस्ताक्षर दोनों को छिपाने के लिए खराब तरीके से डिजाइन किए गए हैं। WS-15 निर्धारित समय में स्पीड हासिल करने में काफी पीछे है, लिहाजा इसकी विश्वसनीयता ही संदिग्ध हो जाती है।
J-20 AESA और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट का प्रदर्शन भी सवालों के घेरे में है। एवियोनिक्स में चीन साफ तौर पर पश्चिमी देशों से काफी पीछे है। ऐसे में J-20 की काबिलियत शक के घेरे में आ जाती है।

J-20 खरीदने के लिए कोई तैयार नहीं
आज तक, चीन के इस स्टील्थ फाइटर जेट J-20 की कोई बिक्री नहीं हुई है। चीनी विशेषज्ञों का दावा है, कि उसकी F-22 की तरह 'माइटी ड्रैगन्स' को बेचने की योजना नहीं है, जो सरासर गलत दावा है।
यहां तक कि पाकिस्तान, जो चीन का एक बहुत करीबी सहयोगी है, उसे भी अपने बेड़े में J-20 को शामिल करने में कोई दिलचस्पी नहीं है और उसका झुकाव छोटे J-31 या तुर्की में बन रहे "KAAN" फाइटर जेट की तरफ ज्यादा है। इसके अलावा, किसी भी और देश में इस फाइटर जेट को लेकर कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है। जबकि, इसकी कीमत काफी ज्यादा है।
इस विमान को चीन एक भी एयर शो के लिए विदेश नहीं ले गया है। जिसका साफ मतलब है, कि शायद वे अपनी कमज़ोरियां उजागर नहीं करना चाहते हैं। इसके अलावा, किसी भी और देश के पायलट ने अभी तक जे-20 जेट की सवारी नहीं की है और किसी भी दूसरे देश के पायलट को इसकी ट्रेनिंग भी नहीं दी गई है, लिहाजा पायलटों के इस जेट को लेकर कोई भी अनुभव सार्वजनिक नहीं हैं। जबकि, चीनी सरकारी मीडिया नकली युद्धाभ्यास में इसे अमेरिकी एफउ-35 और भारतीय राफेल के मुकाबले, ज्यादा शक्तिशाली और कामयाब मानता है।












Click it and Unblock the Notifications