एक और देश को ड्रैगन ने आधा निगला, कर्ज देकर नेवल बेस को हड़पा, श्रीलंका-PAK से भी नहीं मिली सीख?
रीम नेवल बेस साल 2010 तक अमेरिका और कंबोडिया का संयुक्त नेवल बेस हुआ करता था, लेकिन उसके बाद कंबोडिया सरकार ने चीन से भारी-भरकम कर्ज लेकर इस नेबल बेस को चीन के हवाले कर दिया।
नामपेन्ह, अगस्त 30: पूरी दुनिया में अपना प्रभाव फैलाने के लिए चीन काफी तेजी के साथ आगे बढ़ रहा है और अब उसने पूर्वी एशियाई देश कंबोडिया को भी निगलना शुरू कर दिया है और सबसे हैरानी की बात ये है, कि कंबोडिया के प्रधानमंत्री हुन सेन ने श्रीलंका और पाकिस्तान जैसे देशों की बर्बाद हालात से भी कोई सीख नहीं लिया और अब चीन ने कंबोडिया के मिलिट्री बेस को हड़प लिया है। थाईलैंड की खाड़ी के किनारे बसे कंबोडिया के रीम नेवल बेस पर चीन ने भारी संख्या में सैन्य उपस्थिति बढ़ानी शुरू कर दी है, जिससे कई देशों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा हो गया है। कई सैटेलाइट्स तस्वीरें सामने आई हैं, जिनसे पता चला है कि, कंबोडिया के रीम नेवल बेस पर चीन ने सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (SAM) HQ-9 की तैनाती करनी शुरू कर दी है। इस तरह की आशंका को सबसे पहले सेंटर फॉर ए न्यू अमेरिकन सिक्योरिटी में रक्षा कार्यक्रम के एडजंक्ट सीनियर फेलो टॉम शुगार्ट ने उठाया था, जो अब सच साबित हो रहा है।

कंबोडिया में चीन की सैन्य उपस्थिति
टॉम शुगार्ट ने कहा है कि, रीम नेवल बेस के पूर्वी किनारे के साथ एक सड़क में अब कई पक्के पैड और जंगलों को काटकर क्षेत्र का विस्तार किया गया है और जून 2022 की सैटेलाइट तस्वीरों में इसका पता चल रहा है। एकेडमी ने जिक्र किया है, कि इस क्षेत्र में 10 से 12 मीटर गहरे और लेबी के साथ सड़क का डिजाइन जैसा एक स्थापना दिख रहा है, जिसे चीन की सेना पीएलए ने 2016 में हैनान द्वीप पर यालोंग नेवल बेस की रक्षा के लिए बनाया था। उस क्षेत्र में अब मिसाइल लांचर, वाहन और रडार और HQ-9 की तैनाती की जा रही है। इसके साथ ही सबसे चिंता की बात ये है, कि कंबोडिया में सैन्य स्थापना करने के साथ ही साथ चीन ने पैरासेल्स में वुडी द्वीप पर अपने सैन्य प्रतिष्ठानों और दक्षिण चीन सागर में स्प्रैटली द्वीप समूह (फियरी क्रॉस रीफ, सुबी रीफ और मिसचीफ रीफ) में तीन अन्य रीफ के लिए HQ-9 एसएएम तैनात किए हैं।

रीम नेवल बेस को जानिए
आपको जानकर हैरानी होगी, कि रीम नेवल बेस साल 2010 तक अमेरिका और कंबोडिया का संयुक्त नेवल बेस हुआ करता था, लेकिन उसके बाद कंबोडिया सरकार ने चीन से भारी-भरकम कर्ज लेकर इस नेबल बेस को चीन के हवाले कर दिया। इतना ही नहीं,इस नेवल बेस पर दो अमेरिकी बिल्डिंगों को भी ध्वस्त कर दिया गया। वहीं, रीम नेवल बेस पर जिस तरके सड़कों का निर्माण किया गया है, उसका उद्येश्य अभी तक अज्ञात है। ऐसी रिपोर्ट है, कि ये सड़क क्षेत्र पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के लिए रिजर्व कर दिया गया है। इस सड़क का निर्माण उसी समय किया गया था, जब संदिग्ध "चीनी" क्षेत्र में अन्य इमारतों का निर्माण किया गया था। वहीं, पिछले साल जब अमेरिकी डिफेंस अताश कर्नल मार्कस एम फरेरा ने रीम नेवल बेस जाकर चीनी मौजूदगी और स्थिति का जायजा लेने की कोशिश की थी, तो उन्हें वहां जाने से रोक दिया गया था। इसके साथ ही, रीम नेवल बेस के आसपास के क्षेत्र में चीनी कंपनियों ने कई होटल और रिसॉर्ट भी बनाए हैं और इस तरह से ये क्षेत्र 'चीनी जोन' बन गया है।

अमेरिका के सभी सबूत हटाए
कंबोडिया सरकार ने रीम नेवल बेस और आसपास के क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी उपस्थिति के तमाम सबूत खत्म कर दिए हैं। जिन दो बिल्डियों को ध्वस्त कर दिया गया है, उसे अमेरिका ने 2017 में बनाए थे और ये दोनों बिल्डिंग कठोर-पतवार इन्फ्लेटेबल बोट रैंप और बोट मेंटेनेंस फैसिलिटी बिल्डिंग थे। जबकि, कंबोडिया ने लगातार वादे किए थे, कि वो रीम नेवल बेस को किसी भी विदेशी शक्ति के हाथ में नहीं जाने देगा। कई मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है, कि चीन काफी गुप्त तरीके से रीम नेवल बेस पर अपनी उपस्थिति को मजबूत कर रहा था और 8 जून 2022 को पहली बार खुलासा हुआ, कि कंबोडिया के रीम नेवल बेस पर चीन कब्जा कर चुका है। हालांकि, कंबोडिया के प्रधानमंत्री ने बार बार इन खबरों का खंडन किया है। उन्होंने कहा कि देश का संविधान अपने संप्रभु क्षेत्र पर विदेशी सैन्य ठिकानों को रोकता है। उन्होंने घोषणा की थी, कि "हमें अपने देश, क्षेत्र और संप्रभुता की रक्षा के लिए अपने आधार को उन्नत करने की आवश्यकता है।" उन्होंने ये कहा कि, करीब 300 मीटर स्क्वायर मीटर क्षेत्र का चीन काफी तेजी से नवीनीकरण कर रहा है और इस परियोजना को पूरा होने में 2 साल लगेंगे, जिसमें समुद्र में फिर से काम करने के लिए संसाधन बनाए जा रहे हैं।

चीन ने क्या कहा?
वहीं, कंबोडिया में चीनी राजदूत वांग वेंटियन ने सैटेलाइट तस्वीरें सामने आने के बाद कहा, कि जिन संसाधन को अपग्रेड किया जा रहा है, वो किसी तीसरे पक्ष को टारगेट कर नहीं किया जा रहा है और दोनों देशों की सेनाओं के बीच व्यावहारिक सहयोग के लिए भी अनुकूल होगा"। वांग ने कहा कि, ''लोहे से ढकी साझेदारी के एक मजबूत स्तंभ के रूप में, चीन-कंबोडिया सैन्य सहयोग हमारे दोनों देशों और दो लोगों के मौलिक हितों में है।" जो नवीनीकरण किया जा रहा है, उसमें एक कमांड सेंटर शामिल होगा, जिसमें बैठक, स्वागत, भंडारण, मनोरंजन, भोजन और खेल के स्थानों को शामिल करते हुए बहु-उपयोग सुविधा केन्द्र बनाया जा रहा है, जिसमें एक अस्पताल और चिकित्सा सुविधा, कार्यशाला, ड्राय डॉक, स्लिपवे, और हल्के/मध्यम जहाजों के लिए पियर्स का निर्माण किया जा रहा है। चीन बेस तक पहुंचने वाली शिपिंग लेन को गहरा करने के लिए ड्रेजिंग भी करेगा, और रॉयल कंबोडियन नेवी को जहाजों की मरम्मत और रखरखाव में मदद करेगा। चीन नौसेना कर्मियों के लिए 36,900 वर्दी भी मुहैया कराएगा। चीन ने कहा है कि, ये नेवल बेस इतना बड़ा नहीं है, कि ये किसी देश के लिए खतरा उत्पन्न करे।

कंबोडिया से चीन को क्या है फायदा?
कंबोडिया और चीन, दोनों ही देशों की तरफ से लगातार और जोरदार तरीके से नेवल बेस पर सैन्य निर्माण की बात से इनकार किया जाएगा, लेकिन चीन कितना बड़ा झूठा है, इससे कोई इनकार नहीं कर सकता है। वहीं, कंबोडिया में पीएलए की मौजूदगी चीनी सेना की पहुंच को दक्षिण चीन सागर में निर्मित इसके कई द्वीप रीफ प्रतिष्ठानों से दक्षिण में और भी आगे बढ़ा देगी। रीम नेवल बेस थाईलैंड की खाड़ी के शीर्ष छोर पर स्थित है, इसलिए वहां मौजूदगी से खाड़ी में निगरानी करने और खुफिया जानकारी एकत्र करने की चीन की क्षमता में काफी वृद्धि हो सकती है, और शायद हिंद महासागर के पूर्वी हिस्से में भी, लिहाजा ये भारत के लिए भी चिंता की बात है। आशंकता ये भी है कि चीन अपने BeiDou उपग्रह नेविगेशन प्रणाली के लिए वहां भी एक ग्राउंड स्टेशन स्थापित कर सकता है।

वियतनाम के लिए बहुत बड़ा खतरा
कंबोडिया के रीम नेवल बेस पर चीन की सेना की मौजूदगी वियतनाम के लिए बहुत बड़ी चिंता का विषय है, क्योंकि यह वियतनाम को घेरने के लिए एक साथ तीन मोर्चे खोल देगा। वियतनाम को अपनी उत्तरी सीमा पर चीन की ओर से दक्षिण चीन सागर और कंबोडिया से आने वाले खतरों से निपटना होगा। रॉयल कंबोडियन सशस्त्र बलों पर चीन का पहले से ही एक बड़ा प्रभाव है, और कंबोडिया को चीन काफी हथियार और दूसरे उपकरण बेचता है। वहींस पिछले हफ्ते ऑनलाइन तस्वीरों से पता चला है, कि चीन ने भारी संख्या में लड़ाकू वाहन, खासतौर पर BJ80 4x4 लाइट यूटिलिटी वाहन, Hongqi H9 लक्ज़री सेडान और एक अन्य प्रकार की चीनी-निर्मित सेडान की डिलीवरी कंबोडिया को की है, जबकि इस बात के कोई सबूत ही नहीं हैं, कि कंबोडिया ने इस तरह का कोई ऑर्डर चीन को दिया था। तो फिर सवाल ये उठते हैं, कि आखिर चीन ने इन लड़ाकू वाहनों को कंबोडिया क्यों भेजा है?

हथियारों की खेप भी पहुंचा रहे कंबोडिया
इतना ही नहीं, 25 मई को सिहानोकविले में एक मालवाहक जहाज से चीनी निर्मित सैन्य किट को उतारते हुए वीडियो और फोटो इमेजरी सामने आई, जो कंबोडिया का ही एक बंदरगाह है। इन उपकरण में SH1 155mm ट्रक-माउंटेड हॉवित्जर, और AR2 300mm और टाइप 90B 122mm मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर शामिल थे, जो रॉयल कंबोडियन आर्मी को सौंपा जाना है, तो फिर क्या चीन कंबोडिया को नेव बेस के बदले कोई उपहार दे रहा है? ये तीनों तरह के हथियार चीन के सरकारी स्वामित्व वाले नोरिन्को द्वारा निर्मित हैं। आर्टिलरी सिस्टम के साथ अन्य वाहन जैसे गोला बारूद परिवहन ट्रक और ज़ियाओलोंग JL3 (FJ2040) 4x4 सामरिक वाहन थे। नई हथियार प्रणालियों को कम्पोंग स्पू प्रांत में आर्टिलरी मुख्यालय में भेजा गया था।

चीन के कर्ज में फंसा है कंबोडिया
श्रीलंका और पाकिस्तान की तरह ही कंबोडिया भी चीन के विशालकाय कर्ज में फंसा हुआ है और चीन ने साल 2017 के बाद से कंबोडिया में काफी तेजी के साथ निवेश करना शुरू किया है। कई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि, कंबोडिया ने इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवपलमेंट के नाम पर चीन से करीब 10 अरब डॉलर का कर्ज ले रखा है और एक्सपर्ट्स का कहना है, कि पहले से ही आर्थिक संकट में फंसे होने और हमेशा से गरीब देश रहने की वजह से कंबोडिया के लिए चीन का ये कर्ज उतारना कभी संभव नहीं है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंबोडिया के ऊपर जितना विदेशी कर्ज है, उसका 42 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा सिर्फ चीन का है, लिहाजा अब कंबोडिया के जमीन पर चीन कुछ भी करे, कंबोडिया के लिए उसे रोकना अब संभव नहीं है।
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