फिर से शांतिदूत बनेगा चीन, ईरान-सऊदी विवाद खत्म कराया, अब इजरायल-फिलिस्तीन में दोस्ती कराएगा

अब तक शांतिदूत का तमगा अमेरिका के पास रहा है। लेकिन चीन ने हाल में ही उसकी शांतिदूत की छवि को कई बार झटका दिया है। ईरान और सऊदी अरब के बीच शांति बहाल करने के बाद अब चीन ईजरायल-फिलिस्तीन विवाद खत्म कराना चाहता है।

peace talks between Palestine, Israel

ईरान और सऊदी अरब के बीच दोस्ती कराने के बाद अब चीन दुनिया के सबसे बड़े विवादों में से एक इजरायल-फिलिस्तीन विवाद को खत्म कराने में जुट गया है। चीनी विदेश मंत्री ने अपने इजरायली और फिलिस्तीनी समकक्षों से कहा कि उनका देश शांति वार्ता में मदद करने के लिए तैयार है।

सिन्हुआ न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक चीनी विदेश मंत्री क्विन गांग ने इजरायल और फिलिस्ती के अपने समकक्ष एली कोहेन और रियाद अल मालिकी से सोमवार को फोन पर बात की। इस दौरान उन्होंने दोनों देशों के बीच शांति वार्ता को फिर से शुरू करने के लिए कदम उठाने की अपील की।

चीनी विदेश मंत्री ने इस बातचीत के दौरान कहा कि चीन दोनों देशों के बीच मध्यस्थता करने को तैयार है। इजरायल-फिलिस्तीनी शांति वार्ता 2014 से रुकी हुई है। उन्होंने कहा कि बीजिंग जल्द से जल्द वार्ता को फिर से शुरू करने का समर्थन करता है।

रिपोर्ट में बताया गया कि क्विन ने दोनों विदेश मंत्रियों के साथ वार्ता के दौरान द्विराष्ट्र समाधान को लागू करने के आधार पर शांति वार्ता के लिए दबाव डाला। किन ने कहा, सभी पक्षों को शांति और संयम बनाए रखना चाहिए और अत्यधिक और उत्तेजक शब्दों और कार्यों को रोकना चाहिए।

चीनी विदेश मंत्री किन ने कहा कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने वैश्विक सुरक्षा पहल को आगे बढ़ाया है। मानना है कि इजरायल-फिलिस्तीन मुद्दे को हल करने की कुंजी आम सुरक्षा की दृष्टि को बनाए रखने में निहित है।

चीनी मंत्री ने कहा कि इजरायल-फिलिस्तीन के मुद्दे पर चीन का कोई स्वार्थ नहीं है, और केवल यह उम्मीद करता है कि इजरायल और फिलिस्तीन शांतिपूर्वक सह-अस्तित्व में रह सकते हैं और क्षेत्रीय शांति और स्थिरता की रक्षा कर सकते हैं।

कोहेन ने इजरायल-फिलिस्तीनी संघर्ष के समाधान का समर्थन करने की इच्छा के लिए चीन को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि इजरायल स्थिति को सामान्य करने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन इस समस्या को अल्पावधि में हल नहीं किया जा सकता है। कोहेन ने कहा कि इजरायल चीन के प्रभाव को महत्व देता है।

इजरायली विदेश मंत्री ने कहा कि इजरायल की चिंता ईरानी परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी है। वह चीन से इस मसले पर सकारात्मक भूमिका निभाने की उम्मीद करता है। इस बातचीत के दौरान चीनी मंत्री ने खासतौर पर कहा कि बीजिंग के बदौलत ही ईरान-अरब करीब आए हैं।

आपको बता दें कि चीन के प्रयास के बाद सऊदी अरब और ईरान करीब सात साल बाद औपचारिक रिश्तों की नई शुरुआत करने जा रहे हैं। इसी क्रम में एक ईरानी दूत सऊदी अरब पहुंचा और अब सऊदी अरब का एक प्रतिनिधिमंडल ईरान की यात्रा पर है। पिछले महीने चीन द्वारा मध्यस्थता किए जाने के बाद ईरान और सऊदी अरब के राजनयिक रिश्ते बहाल हो रहे हैं।

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