China Quad देशों के रडार पर! इंडो-पैसिफिक में घुसपैठ पर सख्त चेतावनी, ड्रैगन की दादागिरी बर्दाश्त नहीं
क्वाड देशों ने बैठक में चीन को इशारों ही इशारों में इंडो-पैसिफिक (हिंद महासागर) क्षेत्र में घुसपैठ के लिए फटकार लगाई है। कहा कि हम अस्थिरता या एकतरफा कार्रवाइयों का पुरजोर विरोध करते हैं।

जापान के हिरोशिमा में शनिवार को क्वाड देशों ने बैठक की है। इस बैठक में इंडो-पैसिफिक (हिंद महासागर) क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने का संकल्प लिया गया। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि साल 2024 में क्वाड समिट की मेजबानी भारत में करने में हमें खुशी होगी। हिंद-प्रशांत की सुरक्षा और सफलता केवल इस क्षेत्र के लिए ही नहीं बल्कि विश्व के लिए महत्वपूर्ण है।
वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और क्वाड सदस्यों ने चीन का नाम लिया बिना इशारों ही इशारों में इंडो-पैसिफिक (हिंद महासागर) क्षेत्र में घुसपैठ पर चीन को फटकार लगाई। संयुक्त बयान में कहा कि इंडो-पैसिफिक में हम अस्थिरता या एकतरफा कार्रवाइयों का पुरजोर विरोध करते हैं, जिसमें यथास्थिति को बदलने की कोशिश की जाती है।
आगे कहा कि हम सैन्यीकरण, तट रक्षक और समुद्री मिलिशिया जहाजों के खतरनाक उपयोग पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हैं। साथ ही इस बात पर जोर देते हैं कि विवादों को बिना किसी धमकी या बल के प्रयोग के शांतिपूर्वक और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार हल किया जाना चाहिए।
क्यों नफरत करता है चीन क्वाड से?
आपको बता दें कि इंडो-पैसिफिक में चीन को काउंटर करने के लिए क्वाड का गठन हुआ था। इस समूह में भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान शामिल हैं। चीन हिंद महासागर में लगातार अपनी गतिविधियां बढ़ा रहा है। यही वजह है कि चीन अपनी गतिविधियां बढ़ा रहा है। जिसपर भारत की कड़ी नजर है। चीन अपनी नौसेना के जरिए दादागिरी करने से बाज नहीं आ रहा है।
क्या है क्वाड और कौन-कौन है शामिल?
क्वाड यानी क्वाड्रिलेटरल सिक्योरिटी डायलॉग (चतुर्भुज सुरक्षा संवाद) एक अनौपचारिक रणनीतिक मंच है। इसमें 4 राष्ट्र (संयुक्त राज्य अमेरिका, भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान) शामिल हैं। क्वाड के प्राथमिक उद्देश्यों में से एक मुक्त, खुले, समृद्ध और समावेशी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के लिए काम करना है।












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