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30 अगस्‍त को चुशुल में भारत की आक्रामकता से गुस्‍से में चीनी राष्‍ट्रपति जिनपिंग, PLA कमांडर्स को किया तलब

हांगकांग। 29 और 30 अगस्‍त को लद्दाख के चुशुल में भारत ने घुसपैठ पर चीन की पीपुल्‍स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) को जिस मजबूती से जवाब दिया है, उसके बाद राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग का पारा सांतवें आसमान पर है। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि जिनपिंग इस बात से खासे नाराज हैं कि जिस समय भारत की सेना स्‍पांग्‍गुर झील के करीब रात में ऊंची पहाड़‍ियों पर कब्‍जा कर रही थी, उस समय चीन की सेना गहरी नींद में थी। कहा जा रहा है कि इस समय पीएलए के कई सीनियर कमांडर्स को जिनपिंग का गुस्‍सा झेलना पड़ रहा है।

भारत की आक्रामकता से हैरान चीन

भारत की आक्रामकता से हैरान चीन

अभी तक पीएलए और चीन का नेतृत्‍व मान बैठा था कि भारत इतनी आक्रामकता से उन्‍हें जवाब नहीं देगा और धीरे-धीरे कुछ इलाकों में दाखिल होता गया। यह पहला मौका था जब पीएलए को सेना की आक्रामकता से रूबरू होना पड़ा और चीन की कम्‍युनिस्‍ट पार्टी (सीसीपी) इस बात से खासी नाराज है। सीसीपी उस पीएलए कमांडर से भी काफी नाराज है जिसने 30 अगस्‍त को हिंसा की आशंका के चलते अपने जवानों को पीछे हटने के लिए कहा था। 15 जून को गलवान घाटी में हुई हिंसा में चीन के करीब 43 सैनिक मारे गए थे। इसके बाद चुशुल में जो कुछ हुआ, वह उसे शर्मिंदा करने वाली नई घटना है। 15 जून को ही राष्‍ट्रपति जिनपिंग का बर्थडे होता है और इसलिए उनसे यह‍ बात छिपा ली गई थी कि गलवान घाटी में कुछ सैनिक मारे गए हैं।

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    विद्रोह को लेकर डरे हैं जिनपिंग

    विद्रोह को लेकर डरे हैं जिनपिंग

    जिनपिंग चीन के सेंट्रल मिलिट्री कमीशन (सीएमसी) के मुखिया भी हैं। ऐसी अफवाहें भी हैं कि जिनपिंग पीएलए के कई टॉप लीडर्स के निशाने पर हैं। चीन के सत्‍तावादी नेता जिनपिंग हमेशा ही पूरी मिलिट्री पावर अपने हाथों में लेना चाहते हैं। यह एक ऐसा सपना है जो उनके पूर्व राष्‍ट्रपति कभी पूरा नहीं कर सके। उन्‍हें इस बात की भी चिंता सता रही है कि चीन के अंदर उनकी राजनीतिक वफादारी खतरे में पड़ सकती है और सामाजिक स्‍तर पर विद्रोह छिड़ सकता है। जिनपिंग ने पुलिस को पार्टी के लिए वफादार रहने का आदेश दिया है। साथ ही कहा है कि जो लोग कानूनी एजेंसियों के साथ हैं वो निष्‍पक्ष और अनुशासन में रहें।

    चीन के लोग भी भारत से नाराज

    चीन के लोग भी भारत से नाराज

    इन सबसे अलग वह इस बात को लेकर बेहद निराश और चिंता में हैं कि भारत से सटी सीमा पर पीएलए उतनी आक्रामक नहीं थी जितना कि उसे होना चाहिए था। भारत के साथ जारी तनाव का असर चीन की सोशल मीडिया साइट्स पर भी नजर आ रहा है। चीन के लोग भारत के खिलाफ भड़काऊ बयान दे रहे हैं। एक यूजर झांग वेईवेई जो कि चीनी प्रोफेसर हैं उन्‍होंने लिखा है, 'भारत की विशेष सलाह मोदी के लिए है कि वह चीन को भड़काना बंद करें। नहीं तो भारत को इस बार सन् 1962 से पांच गुना ज्‍यादा शर्मिंदगी झेलनी पड़ेगी।'

    बेनतीजा रही चीनी मंत्री के साथ मीटिंग

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    इससे अलग चीन के सरकारी अखबार ग्‍लोबल टाइम्‍स के एडीटर-इन-चीफ हू शिजांग की एक पोस्‍ट को करीब 20,000 लाइक्‍स मिले हैं। उन्‍होंने लिखा है, 'भारत और चीन दोनों ही बड़ी शक्तियां हैं और किसी भी सीमा संघर्ष को सुलझाने के लिए अपनी राष्‍ट्रीय ताकत को झोंकने में समर्थ हैं। इसके बाद भी इस मौके पर दोनों देशों को शांत रहने की जरूरत है।' भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में टकराव को चार माह हो चुके हैं। कई दौर की वार्ता के बाद भी टकराव सुलझता नजर नहीं आ रहा है। शुक्रवार को रूस की राजधानी मॉस्‍को में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चीन के रक्षा मंत्री से मुलाकात भी की थी। लेकिन यह मीटिंग भी बेनतीजा रही।

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