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चीन ने बनाया चांद पर एस्ट्रोनॉट्स ले जाने वाला स्पेसक्राफ्ट, 2030 तक पूरा करेगा मून मिशन, भारत की क्या तैयारी?

चीन 2030 तक चांद पर पहुंचने की तैयारी कर रहा है। चीन ने स्पेस रेस में अमेरिका और रूस को चुनौती देने के लिए अपने प्रोग्राम पर कई बिलियन खर्च कर दिए हैं। अब चीन ने अपने मून मिशन प्रोग्राम के लिए लैंडर और क्रू मॉड्यूल का खुलासा कर दिया है।

जिस अंतरिक्षयान में बैठककर चीनी एस्ट्रोनॉट्स चंद्रमा तक जाएंगे, उसका नाम है मेंगझोऊ रखा गया है। जो लैंडर उसे लेकर जाएगा उसका नाम है लानुई रखा गया है। चीनी भाषा में मेंगझोऊ का अर्थ सपनों का जहाज है वहीं, लानुई का मतलब चंद्रमा को गले लगाना है।

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चीन की मानव अंतरिक्ष उड़ान एजेंसी, सीएमएसए ने एक प्रेस बयान में कहा कि लानुई नाम माओत्से तुंग की कविता में दिखाई देता है। वहीं, मेंगझोऊ का जिक्र चीन के प्रसिद्ध कवि ली बाई की कविताओं में आता है।

चीन इससे पहले शेनझोऊ और तियानझोऊ नाम के स्पेसक्राफ्ट लॉन्च कर चुका है। वर्तमान में ये स्पेसक्राफ्ट ही अंतरिक्ष यात्रियों और कार्गो को निचली कक्षा में तियांगोंग अंतरिक्ष स्टेशन तक ले जाते हैं।

चीनी स्पेस एजेंसी CNSA ने 2023 में अंतरिक्ष यान का नाम रखने में मदद के लिए एक प्रतियोगिता रखी थी, ताकि लोग इन दोनों यानों का नाम सुझा सकें। इसमें 2000 से ज्यादा लोगों की एंट्री आईं। हालांकि अंतिम नामों का चयन एक विशेषज्ञ पैनल द्वारा किया गया।

7 एस्ट्रोनॉट्स ले जा सकता है मेंगझोऊ

मेंगझोऊ सात एस्ट्रोनॉट्स को अंतरिक्ष ले जा सकता है। हालांकि ये धरती की निचली कक्षा के स्पेस स्टेशन तक ही 7 लोगों को ले जा सकता है। चंद्रमा तक जाने की बात हो ये तो 3 लोगों को वहां ले जा सकता है। स्पेस डॉट कॉम की रिपोर्ट के मुताबिक मेंगझोऊ 2027 के आसपास पहली उड़ान भर सकता है।

चाइना एयरोस्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी कॉर्पोरेशन(CASC) इस यान और लैंडर को बना रहा है। ASC नए अंतरिक्ष यान को लॉन्च करने के लिए एक नया रॉकेट, लॉन्ग मार्च 10 भी बना रहा है।

चीन की चंद्रमा लैंडिंग योजना में दो लॉन्ग मार्च 10 रॉकेटों का प्रक्षेपण शामिल है , जो वर्तमान लॉन्ग मार्च 5 पर आधारित होंगे। एक लॉन्ग मार्च 10 मेंगझू को ले जाएगा, जबकि दूसरा लान्यू को लॉन्च करेगा। इसके बाद दोनों अंतरिक्ष यान मिलेंगे और चंद्रमा की कक्षा में पहुंचेंगे।

इसके बाद अंतरिक्ष यात्रियों का एक जोड़ा लैंडर की ओर बढ़ेगा और फिर चंद्रमा की सतह पर जाएगा, जबकि तीसरा अंतरिक्ष यात्री मेंगझू पर ही रहेगा। लानुई लैंडिंग के लिए सेपरेट प्रोपल्शन स्टेज का इस्तेमाल करेगा।

यह 440 पाउंड (200 किलोग्राम) का क्रू रोवर भी ले जाएगा। चंद्र सतह पर थोड़ी देर रहने के बाद लैन्यू अंतरिक्ष यात्रियों को वापस चंद्र कक्षा में लॉन्च करेगा। इसके बाद दोनों अंतरिक्ष यान अंतरिक्ष यात्रियों की पृथ्वी पर वापसी की तैयारी के लिए एक बार फिर मिलेंगे और जुड़कर वापस लौटेंगे।

चीन फिलहाल इन लॉन्ग मार्च 10 रॉकेट, मेंगझोऊ और लानुई के अलग-अलग स्टेजेस पर काम कर रहा है। इसके अलावा स्पेससूट पर भी काम चल रहा है। लॉन्चिंग और लैंडिंग साइट का तकनीकी प्रस्ताव भी मान लिया गया है।

भारत की क्या है तैयारी

आपको बता दें कि भारत 2040 तक चांद पर इंसानों को भेजने की तैयारी कर रहा है। चंद्रयान-3 की सफलता के बाद केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा था कि भारत चांद पर इंसान को भेजने की तैयारी कर रहा है।

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