वफादारों से भरी है शी जिनपिंग की कैबिनेट, ये सात नेता बने चीन के भाग्य विधाता, सारे कनफ्यूजन दूर करिए
चीन में शी जिनपिंग ने अपने सभी विरोधियों का खात्मा कर दिया है और संविधान संशोधन कर वो तीसरी बार राष्ट्रपति बने हैं। माना जा रहा है, कि जब तक वो जिंदा रहेंगे, तब तक वो देश के राष्ट्रपति रहेंगे।

China News: चीनी नेता शी जिनपिंग ने चीन के अंदर नया रिकॉर्ड बनाते हुए आधिकारिक तौर पर तीसरी बार राष्ट्रपति का कार्यभार संभाल लिया है और इसके साथ ही सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी की सर्व-शक्तिशाली पोलित ब्यूरो स्टैंडिंग कमेटी में उनके साथ काम करने वाले अन्य छह लोगों ने भी अपने नए विभागों को संभालना शुरू कर दिया है। यानि, कुल सात लोग हैं, जो चीन के भाग्य विधाता हैं और यही सात लोग हैं, जिनके ऊपर अगले कई सालों तक चीन का पूरा कंट्रोल रहने वाला है। कैबिनेट में शामिल ये नेता पिछले कई दशकों से चीन के सबसे शक्तिशाली व्यक्ति शी जिनपिंग के करीबी बने रहे हैं और उन्होंने शी जिनपिंग का विश्वास हासिल किया है, इसीलिए आज उन्हें चीन का भाग्य विधाता बनाया गया है। आईये जानते हैं, इन नेताओं को, जिनके हाथ में चीन की कमान आ गई है।

ली कियांग होंगे प्रधानमंत्री
चीन के मौजूदा प्रधानमंत्री ली केकियांग का कार्यकाल आज से ठीक 3 दिन बाद खत्म हो रहा है और 13 मार्च को वो रिटायर्ट हो जाएंगे। जिसके बाद पार्टी के दूसरे-इन-कमांड ली किआंग को देश का नया प्रधानमंत्री बनाया जाएगा। हालांकि, अभी तक आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन ये नाम करीब करीब तय माना जा रहा है। ली किआंग को चीन में पिछले 2 सालों से चल रहे क्रूर शून्य कोविड पॉलिसी का जनक माना जाता है और उन्होंने ज़ीरो कोविड पॉलिसी और लॉकडाउन के बेरहमी से लागू करवाया था। शी जिनपिंग को नेशनल पीपुल्स कांग्रेस से सर्वसम्मत से लगातार तीसरी बार राष्ट्रपति बनाए जाने के बाद कम्युनिस्ट पार्टी के तीसरे दर्जे के अधिकारी झाओ लेजी को लगभग 3,000 सदस्यीय औपचारिक विधायिका का प्रभारी बनाया गया। वहीं, इस साल अक्टूबर तक पोलित ब्यूरो स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य रहने वाले हान झेंग को उप-राष्ट्रपति बनाया गया है।

सबसे शक्तिशाली कमेटी में महिलाएं नहीं
वहीं, चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की सबसे शक्तिशाली कमेटी पोलिच ब्यूरो के स्टैंडिंग कमेटी के 24 सदस्य हैं, जिनमें एक भी महिला नहीं हैं। 1990 के दशक में उप-प्रधानमंत्री सन चुनलान के हटने के बाद से अभी तक एक भी महिला को कमेटी में शामिल नहीं किया गया है। वहीं, कम्युनिस्ट पार्टी के अन्य निकाय, जिनमें 200 सदस्यों वाली केन्द्रीय समिति है, उनमें 95 प्रतिशत पुरूष सदस्य हैं। ऐसा कहा जाता है, कि चीन में धारणा है, कि महिलाओं को राजनीति की समझ नहीं होती है और वो देश चलाने में 'बेकार' साबित होती हैं, लिहाजा चीन के 50 सालों के इतिहास में चंद महिलाएं ही स्टैंडिंग कमेटी तक पहुंच पाई हैं।

झाओ लेजिया बने स्टैंडिंग कमेटी के प्रमुख
पिछली पोलितब्यूरो स्टैंडिंग कमेटी में भी झाओ लेजिया को शामिल किया गया था और शी जिनपिंग के निर्देश पर देश में भ्रष्टाचार विरोधी अभियान चलाने में इन्हें माहिर माना जाता है। ये पार्टी के अंदर अनुशासन के लिए भी जिम्मेदार होते हैं और इन्होंने पिछले कई सालों से शी जिनपिंग का विश्वास जीता हुआ है, लिहाजा इस बार उन्हें स्टैडिंग कमेटी का प्रमुख बनाया गया है। झाओ लेजिया ने भ्रष्टाचार विरोधी अभियान चलाकर शी जिनपिंग के तमाम विरोधियों को या तो जेल भेज दिया, या फांसी की सजा दिलवा दी या फिर देश से बाहर कर दिया। झाओ लेजिया का काम शी जिनपिंग के रास्ते से तमाम काटों को हटाने का रहा है। लिहाजा, 66 साल के झाओ को नेशनल पीपुल्स कांग्रेस और इसकी स्थायी समिति का प्रमुख बनाया गया है। इसके साथ ही शी जिनपिंग ने उन्हें सेना की देखरेख करने वाले सरकारी आयोग का प्रमुख भी बनाया है। ऐसी रिपोर्ट है, कि किसी अन्य नाम पर शी जिनपिंग ने कोई विचार नहीं किया।

वांग हुनिंग
वांग हुनिंग भी पिछली स्टैडिंग कमेटी में शामिल थे और उन्हें फिर से स्टैंडिंग कमेटी में शामिल किया गया है। वांग हुनिंग का बैकग्राउंड शिक्षा के क्षेत्र से है और वो शंघाई के फुडन विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय राजनीति के प्रोफेसर रहे हैं। इसके साथ ही वो शी जिनपिंग से पहले, चीन के दो राष्ट्रपतियों के वरिष्ठ सलाहकार भी रहे हैं। 67 साल के वांग हुनिंग ने कभी भी स्थानीय स्तर पर या केन्द्रीय स्तर पर कोई भी सरकारी पद नहीं संभाला है। वहीं, वांग को पश्चिमी राजनीति और समाज की आलोचना करने वाली किताबों के लिए जाना जाता है, और उम्मीद की जाती है कि उन्हें चीनी पीपुल्स पॉलिटिकल कंसल्टेटिव कॉन्फ्रेंस का प्रमुख नामित किया जाएगा, जो एनपीसी की सलाहकार संस्था है, और जो पार्टी के संयुक्त मोर्चा विभाग के साथ मिलकर विदेशों में शी जिनपिंग के प्रभाव और छवि को बनाने के लिए काम करती है।

काय क्यूई
कै क्यूई ने 2017 के बाद से लगातार राजधानी बीजिंग की राजनीति को संभाली है और उन्हें भी शी जिनपिंग के करीबी होने का अवार्ड मिला है। काई क्यूई ने COVID-19 महामारी के बीच 2022 बीजिंग शीतकालीन ओलंपिक का काम संभाला था, जिसे कम्युनिस्ट पार्टी ने जीत के रूप में मनाया था। 67 साल के काय क्यूई ने शहरी इलाकों से हजारों प्रवासी कामगारों की जबरन बेदखली का भी निरीक्षण किया और शंघाई और अन्य जगहों पर देखे गए कठोर लाकडाउन को लागू किए बिना, बीजिंग में COVID मामलों को अपेक्षाकृत कम रखा। अर्थशास्त्र में डॉक्टरेट की डिग्री रखने वाले काय क्यूई भी झेजियांग में शी जिनपिंग के करीब आए थे। ऐसा माना जा रहा है, कि उन्हें प्रोपेगेंडा और मैसेजिंग का प्रभारी बनाया जाएगा।

डिंग ज़ुक्सियांग
2017 के बाद से पार्टी के जनरल ऑफिस के डायरेक्टर के रूप में, डिंग ज़ुक्सियांग ने प्रभावी रूप से शी जिनपिंग के चीफ ऑफ स्टाफ के रूप में काम किया है। डिंग ज़ुक्सियांग उस वक्त शी जिनपिंग के साथ साए की तरह रहे, जब कोई विदेशी नेता चीन का दौरा करता था। डिंग ज़ुक्सियांग विदेशी नेताओं के साथ होने वाली बैठक के दौरान उपस्थित रहते थे। वांग हुनिंग की तरह ही, डिंग ने कभी सरकारी कार्यालय नहीं संभाला है, लेकिन पोलित ब्यूरो के ठीक नीचे पार्टी मामलों के केंद्र में वो बने रहे। शंघाई पार्टी के प्रमुख के रूप में अपने संक्षिप्त कार्यकाल के दौरान उन्होंने सिर्फ 60 दिनों तक शी जिनपिंग के सचिव के तौर पर काम किया और खुद को शी जिनपिंग का करीबी और विश्वासपात्र बना लिया। उन्हें प्रशासनिक मामलों की देखरेख करने वाले पहले उप प्रधान मंत्री के रूप में नियुक्त किए जाने की उम्मीद है।
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ली शी
स्टैडिंग कमेटी में अपनी नियुक्ति से पहले, 66 साल के ली शी ने, ग्वांगडोंग प्रांत का नेतृत्व किया है, जो चीन के सबसे धनी क्षेत्रों में से एक है और चीन के विशाल मैन्यूफैक्चर सेक्टर का आधार है। उन्होंने पहले माओत्से तुंग के यानान के प्रसिद्ध क्रांतिकारी आधार के पार्टी सचिव के रूप में काम किया था। चीन में कम्युनिस्ट पार्टी को मजबूत करने में उनका काफी योगदान माना जाता है और वो शी जिनपिंग के विश्वासपात्र और करीबी माने जाते हैं। ली शी को सेन्ट्रल कमेटी का प्रमुख बनाया गया है।
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