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लोप नूर में परमाणु परीक्षण की तैयारी कर रहा चीन, सैटेलाइट इमेज में दिखी सुरंग, सतर्क हुआ अमेरिका

चीन ने तकला माकन रेगिस्तान इलाके के लोप नूर में लगभग 60 साल पहले अपना पहला परमाणु बम विस्फोट किया था। अब ऐसी सूचना मिल रही है कि चीन एक बार फिर से परमाणु परीक्षण करने के लिए इस स्थल का पुनर्निर्माण करने जा रहा है।

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक चीन इस बात पर विचार कर रहा है कि लोप नूर इलाके में नई पीढ़ी के परमाणु हथियारों का परीक्षण करने पर विचार कर रहा है ताकि उसकी तेजी से बढ़ती मिसाइल शक्ति की घातकता बढ़ाई जा सके।

China planning Nuclear Weapons Test

न्यूयार्क टाइम्स ने सैटेलाइट इमेज के माध्यम से यह खुलासा किया गया है। दरअसल, चीन नई पीढ़ी की बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों पर फिट करने के लिए अपने परमाणु हथियारों के डिजाइनों की टेस्ट करने का प्लान कर रहा है। वह अपनी सैन्य क्षमता में लगातार इजाफा कर रहा है।

सैटेलाइट इमेज की छवियों से पता चलता है कि चीन ने सैन्य अड्डे में नए ड्रिल किए गए बोरहोल हैं। इसके अलावा ये भी पता चलता है कि बेस के मौजूदा सड़क नेटवर्क में कई नई सड़कें जोड़ी गईं, जो पूर्वी पहाड़ियों में एक नए क्षेत्र तक लगभग 30 मील तक फैली हुई हैं।

अन्य सैटेलाइट इमेज में इन पहाड़ियों में छिपे ड्रिल रिग का पता चलता है, जो भविष्य में संभावित अंडरग्राउंड टेस्ट एरिया हैं। कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस के परमाणु विशेषज्ञ टोंग झाओ ने कहा, "सभी सबूत इस बात की ओर इशारा करते हैं कि चीन ऐसी तैयारी कर रहा है जिससे वह परमाणु परीक्षण फिर से शुरू कर सके।"

NYT ने बताया कि 2017 तक लोप नूर में मुट्ठी भर इमारतें थीं। अब यह साइट एक आकर्षक और अत्याधुनिक कैंपस में बदल गई है जहां 30 से अधिक इमारतें हैं। इसकी नई संरचनाओं में मिट्टी के ढेर और लाइटिंग अरेस्टर से संरक्षित बंकर है। यह हाई एक्सप्लोसिव्स से भी सुरक्षित है। इस क्षेत्र में एयरबेस, स्मोकिंग गन की फोटोज भी सामने आई हैं।

सैटेलाइट इमेज में एक मिनी टाउनशिप भी दिख रहा। टाउनशिप के भीतर, जिसे मालन के नाम से जाना जाता है, एक रिंग है जो लोप नूर साइट के समान है। यह सैकड़ों किलोमीटर दूर स्थित है। ऐसा माना जाता है कि यह शाफ्ट ड्रिलर्स के लिए एक ट्रेनिंग स्पेस है।

विश्लेषकों का कहना है कि लोप नूर की गतिविधि चीन के परमाणु प्रतिष्ठान के व्यापक आधुनिकीकरण का संकेत देती है, चेतावनी देती है कि इससे हथियारों के निर्माण में तेजी आ सकती है और परमाणु प्रतिद्वंद्विता के एक नए युग की शुरुआत हो सकती है।

न्यू मैक्सिको में लॉस अलामोस हथियार प्रयोगशाला के पूर्व निदेशक सिगफ्रीड एस. हेकर ने लोप नूर के पुनर्निर्माण को असामान्य बताया।

चीन के परमाणु परीक्षण की तैयारियों का खुलासा व विश्लेषण एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय भू-स्थानिक खुफिया विशेषज्ञ डॉ रेनी बेबियार्ज ने किए हैं। उन्होंने ही सारे सबूत उपलब्ध कराए हैं।

पेंटागन के पूर्व विश्लेषक डॉ. बार्बियार्ज ने लोप नूर फेसिलिटी के सैटेलाइट इमेजरी का अध्ययन करने में वर्षों बिताए हैं। चीन ने 16 अक्टूबर 1964 को अपना पहला परमाणु परीक्षण लोप नूर में किया था।

लोप नूर की गतिविधि अमेरिका-चीन संबंधों में सबसे संवेदनशील क्षणों में से एक है। अमेरिकी ख़ुफ़िया अधिकारियों का कहना है कि वे वर्षों से लोप नूर में हो रही गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं। उन्होंने माना कि चीन परमाणु परीक्षण की तैयारी कर सकता है।

चीन ने 1996 के बाद से पूर्ण पैमाने पर परमाणु परीक्षण नहीं किया है। इस दौरान दुनिया के कई प्रमुख परमाणु शक्ति संपन्न देशों ने नए परीक्षणों पर खुद ही रोक लगा दी थी। हालांकि, बाद में भी अमेरिका, चीन और रूस समय समय पर परमाणु हथियारों के गैर परमाणु पार्ट्स का परीक्षण करते रहे हैं।

हालांकि, परमाणु परीक्षण तैयारी को चीन ने सिरे से खारिज कर दिया है। बीजिंग में विदेश मंत्रालय ने लोप नूर में अपग्रेड के बारे में सवालों का जवाब देते हुए ऐसे दावों को "पूरी तरह से गैर-जिम्मेदाराना" बताया।

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