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ड्रैगन के नये विनाशकारी न्यूक्लियर प्लान से टीम बाइडेन के उड़े होश, रूस रह गया चीन से पीछे, भारत को भी टेंशन!

अमेरिका ने कहा है कि चीन का न्यूक्लियर प्लान जल्द ही रूस को पीछे छोड़ने वाला है और पूरी दुनिया के लिए विध्वंसकारी है।

वॉशिंगटन, अगस्त 28: एक तरफ अमेरका अफगानिस्तान में पिछले 20 सालों से उलझा रहा और अंत में बुरी तरह तालिबान के हाथों हारकर देश छोड़ रहा है तो दूसरी तरफ दुनिया के लिए चीन बहुत बड़ा टेंशन बन गया है। तालिबान को तो फिर भी अमेरिका ने पिछले 20 सालों से रोककर रखा और नया तालिबान दुनिया को यकीन दिलाने की कोशिश कर रहा है कि वो उदारवादी बन रहा है, लेकिन चीन ने जो नया न्यूक्लियर प्लान बनाया है, वो पूरी धरती के लिए विनाशकारी साबित होगा।

चीन का विध्वंसक न्यूक्लियर प्लान

चीन का विध्वंसक न्यूक्लियर प्लान

अमेरिका की खुफिया ताजा रिपोर्ट में पता चला है कि जहां एक तरफ अमेरिका और रूस लगातार न्यूक्लियर हथियारों की संख्या को काम कर रहा है तो दूसरी तरफ चीन एक अलग ही तरह से परमाणु कार्यक्रम को काफी तेजी से आगे बढ़ा रहा है। अमेरिका ने कहा है कि चीन का जो परमाणु कार्यक्रम है, वो इतना खतरनाक है कि अब उसे रोका नहीं जा सकता है। खुफिया रिपोर्ट में चीन के न्यूक्लियर प्रोग्राम को 'विनाशकारी' कहा गया है और साफ तौर पर कहा हया है कि ऐसा कोई तंत्र नहीं है, जिससे चीन को रोका जा सके।

परमाणु हथियारों का जखीरा बनाता चीन

परमाणु हथियारों का जखीरा बनाता चीन

अमेरिकी वायु सेना के लेफ्टिनेंट जनरल थॉमस बुसीरे, जो अमेरिकी सामरिक कमान के डिप्टी कमांडर भी हैं और जो अमेरिका के परमाणु शस्त्रागार की देखरेख करते हैं, उन्होंने कहा कि, चीन के परमाणु क्षमताओं के विकास को लेकर अब ये नहीं कहा जा सकता है कि वो 'काबू' में है। उन्होंने कहा कि, चीन जो सार्वजनिक तौर पर दावे करता है और चीन की जो असलियत है, उसमें अब कोई समानता नहीं है, चीन ने न्यूक्लियर हथियार बनाने के न्यूनतम सीमा को काफी पीछे छोड़ दिया है।

रूस को पीछे छोड़ेगा चीन

रूस को पीछे छोड़ेगा चीन

रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन जितनी तेजी के साथ अलग अलग तरह के न्यूक्लियर हथियारों का निर्माण करता जा रहा है, वो बहुत जल्द रूस को काफी पीछे छोड़कर आगे निकल जाएगा। अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि 'रूस का परमाणु कार्यक्रम अब तक खतरनाक रहा है, लेकिन चीन बहुत जल्द रूस को पीछे छोड़कर काफी आगे निकल जाएगा'। अमेरिकी अधिकारी थॉमस बुसीरे ने कहा कि, 'चीन के परमाणु हथियारों का निर्धारण सिर्फ इसी बात पर नहीं है कि उसके परमाणु भंडार में कितने हथियार हैं, बल्कि चीन भारी संख्या में न्यूक्लियर हथियारों को ऑपरेशनल भी बना चुका है, जो अलग अलग एयरक्राफ्ट में संचालित हो रहे हैं।'

चीन के साथ समझौता नहीं

चीन के साथ समझौता नहीं

अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि रूस के परमाणु कार्यक्रम पर अंकुश रखने के लिए अमेरिका ने रूस के साथ परमाणु संधि कर रखा था और उसके तहत दोनों ही देशों ने काफी तेजी के साथ अपने परमाणु हथियारों की संख्या में कमी की, लेकिन चीन के साथ अभी तक ऐसी कोई संधि नहीं है। अमेरिकी अधिकारी की चीन के परमाणु कार्यक्रम को लेकर टिप्पणी तब आई है, जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की सैन्य ताकत को खत्म करने के अमेरिका तेजी से अपने सहयोगियों के साथ एक्शन प्लान तैयार कर रहा है और अमेरिका की बाइडेन सरकार तेजी से अपनी विदेश नीति को विकसित करने का काम कर रही है।

अमेरिका ने जताई गहरी चिंता

अमेरिका ने जताई गहरी चिंता

चीन के अगाध न्यूक्लियर कार्यक्रम को लेकर अमेरिका के रक्षामंत्री लॉयड ऑस्टिन ने गहरी चिंता जताई है। आशियान देशों के विदेश मंत्रियों के साथ एक बैठक के दौरान अमेरिका के रक्षा मंत्री ने चीन के न्यूक्लियर हथियार और परमाणु हथियारों के कार्यक्रम को खतरनाक बताते हुए गहरी चिंता का इजहार किया है। सैटेलाइट इमेज पर आधारित थिंक-टैंक की रिपोर्ट कहती है कि चीन परमाणु मिसाइलों के लिए सैकड़ों नए साइलो का निर्माण कर रहा है, और वाशिंगटन ने बीजिंग पर परमाणु हथियारों की बातचीत का विरोध करने का आरोप लगाया है। चीन का कहना है कि उसका शस्त्रागार संयुक्त राज्य अमेरिका और रूस के मुकाबले 'काफी छोटा' है, और वह बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन केवल तभी जब वाशिंगटन अपने परमाणु भंडार को चीन के स्तर तक कम कर दे।

रूस के पास सबसे ज्यादा परमाणु हथियार

रूस के पास सबसे ज्यादा परमाणु हथियार

एफएएस की रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया में इसवक्त रूस के पास सबसे ज्यादा परमाणु बम मौजूद हैं। परमाणु बम को लेकर एफएएस की लिस्ट के मुताबिक रूस के पास इस वक्त 6257 परमाणु बम हैं, जिनमें से 1600 परमाणु बम को रूस ने तैनात करके रखा हुआ है जबकि 4497 परमाणु बम को रूस ने रिजर्व करके रखा हुआ है। वहीं, रूस ने 1700 परमाणु बमों को रिटायर्ड कर दिया है। वहीं, एफएएस की रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका के पास इस वक्त कुल 5550 परमाणु बम हैं, जिनमें से अमेरिका ने इस वक्त 1800 परमाणु बमों को तैनात करके रखा है। वहीं, अमेरिका ने 3800 परमाणु बमों को रिजर्व करके रखा है, जबकि साढ़े 1700 परमाणु बम को अमेरिका रिटायर्ड कर चुका है। वहीं, एक्टिव परमाणु बमों की अगर बात की जाए तो तीसरे नंबर पर फ्रांस और चौथे नंबर पर ब्रिटेन शामिल हैं।

परमाणु बमों की लिस्ट में चीन

परमाणु बमों की लिस्ट में चीन

एफएएस की रिपोर्ट में चीन के पास मौजूद परमाणु बमों की भी बात की गई है। लिस्ट के मुताबिक चीन के पास इस वक्त 350 परमाणु बम मौजूद हैं। वहीं चौथे नंबर पर फ्रांस का स्थान है, जिसके पास 290 परमाणु बम हैं वहीं पांचवें नंबर पर 195 परमाणु बमों के साथ ब्रिटेन मौजूद है। ब्रिटेन के बाद नंबर है पाकिस्तान का, जिसके पास 165 परमाणु बम मौजूद हैं, वहीं पाकिस्तान के बाद भारत 160 परमाणु बम के साथ सातवें नंबर पर मौजूद है। हालांकि, एफएएस की रिपोर्ट में चीन के परमाणु बमों की संख्या पर शक जताई गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन के ने चोरी-छिपे भी परमाणु बम और हथियार इकट्ठा कर रखे होंगे। रिपोर्ट के मुताबिक, शीत युद्ध के बाद परमाणु हथियारों की संख्या में इसलिए कमी आ रही है क्योंकि रूस और अमेरिका अपने रिटायर्ड परमाणु बमों को खत्म कर रहे हैं।

चीन का परमाणु कार्यक्रम से टेंशन

चीन का परमाणु कार्यक्रम से टेंशन

चीन ने अमेरिका और भारत को ध्यान में रखते हुए न्यूक्लियर हथियारों की संख्या में काफी तेजी से इजाफा किया है, जिसमें उसका अत्याधुनिक एडवांस पनडुब्बी न्यूक्लियर मिसाइल भी शामिल है। इसके साथ ही चीन बॉम्बर भी तैयार कर रहा है, जिसकी मदद से चीन, हवा, पानी और जमीन, तीनों जगहों से न्यूक्लियर हथियार छोड़ सकता है। अमेरिकी रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर कोरिया ने परमाणु हथियारों के निर्माण में तेजी लाई है और हाल ही में अमेरिका तक मार करने में सक्षम इंटरकॉन्टिनेन्टल अंतरमहाद्वीपीय दूरी की मिसाइलों का परीक्षण किया है और अपने मिसाइल कार्यक्रम में नाटकीय अंदाज में वृद्धि हासिल की है।

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