भारत के 'बॉयकॉट चाइना' अभियान से परेशान हुआ चीन, बोला- इन आवाजों पर अंकुश लगाना चाहिए
बीजिंग। चीन और भारत के बीच जारी तनाव और सीमा पर जवानों के शहीद होने के बाद से देशभर के लोग चीनी सामान के बहिष्कार की बात कर रहे हैं। भारत में 'बॉयकॉट चाइना' की अगुवाई करने वाले सोनम वांगचुक ने लोगों से इस अभियान में एकजुट होने के लिए कहा था। ये बात उन्होंने तब कही थी जब दोनों देशों के बीच तनाव शुरू हुआ था। हालांकि लद्दाख से उठाई गई ये आवाज 20 जवानों के शहीद होने के बाद पूरे देश में गूंजने लगी। सोमवार को गलवान घाटी में हुई चीन की कायराना हरकत से हर कोई गुस्से में है।

भारतीयों से किया जा रहा अनुरोध
अब चीन को भी इन आवाजों से दिक्कत होने लगी है। इसके बारे में उसकी मीडिया रिपोर्ट्स बता रही हैं। इन आर्टिकल्स में भारतीयों को सलाह दी जा रही है और ये अनुरोध किया जा रहा है कि चीनी सामान का बहिष्कार ना करें। कई में तो ये भी कहा गया है कि भारत और चीन के रिश्ते सदियों पुराने हैं, इसलिए ऐसा ना करें। बीजिंग के लिए चिंता तब अधिक बढ़ गई जब भारतीयों ने चीनी समकक्षों से जुड़ी कंपनियों के साथ अपनी बुकिंग को रद्द करना शुरू कर दिया।
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'निवेश वापस हो सकता है'
चाइनीज अकैडमी ऑफ सोशल साइंस के तहत आने वाले नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल स्ट्रैटेजी के असोसिएट रिसर्च फेलो लुई शियाक्सू ने ग्लोबल टाइम्स में लिखा, 'सीमा पर नए तनाव का आकलन करते समय, भारत को यह समझना चाहिए कि चीन का संयम कमजोर नहीं है।' बता दें ग्लोबल टाइम्स चीन की कम्युनिस्ट पार्टी का मुखपत्र है। इसमें भारत के लिए कहा गया है कि उसे महामारी के चलते वैश्विक अर्थव्यवस्था में तनाव पर ध्यान देना चाहिए। उसने लिखा, 'अगर सीमा पर तनाव बढ़ता है और प्रतिकूल कारकों में वृद्धि होती है, तो निवेश वापस हो सकता है।'

ग्लोबल टाइम्स ने क्या कहा?
ग्लोबल टाइम्स ने ट्वीट कर कहा है, 'सीमा पर टकराव के बाद भारत को 'बॉयकॉट चाइना' की आवाज पर अंकुश लगाना चाहिए। निवेश और व्यापार के साथ सीमा मुद्दों को स्पष्ट रूप से संबद्ध करना अतार्किक है। दोनों पक्षों को कोविड-19 की अनिश्चितता के बीच विकास के अवसरों को संजोने की जरूरत है।'












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