गाजा में इजराइली हमले के बीच चीन में जुटे इस्लामिक देशों के नेता, मुसलमानों के नये मुखिया बनेंगे शी जिनपिंग?
China Israel-Hamas War: चीन ने इजराइल-हमास संघर्ष को "कम करने" पर बातचीत के लिए सोमवार को अरब और मुस्लिम बहुसंख्यक देशों के अधिकारियों के साथ बैठक का आयोजन किया है और बीजिंग की कोशिश, इस्लामिक देशों के नये मुखिया बनने की है।
चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने सोमवार को राजधानी बीजिंग में सऊदी अरब, जॉर्डन, मिस्र, फिलिस्तीनी राष्ट्रीय प्राधिकरण, इंडोनेशिया के समकक्षों के साथ-साथ इस्लामिक सहयोग संगठन के प्रमुख से मुलाकात की है।
बीजिंग ने मुस्लिम देशों के नेताओं की इस यात्रा को "मौजूदा फ़िलिस्तीनी-इज़राइली संघर्ष को कम करने", नागरिकों की रक्षा करने और फिलिस्तीनी मुद्दे को "उचित रूप से हल करने" के लिए "गहन संचार और समन्वय" के अवसर के रूप में बताया है।

यह बैठक तब हो रही है, जब खाड़ी राज्य कतर की मध्यस्थता में संयुक्त राज्य अमेरिका, इज़राइल और आतंकवादी समूह के बीच कई हफ्तों की बातचीत के बाद, हमास द्वारा रखे गए कुछ बंधकों की रिहाई को सुरक्षित करने के लिए एक संभावित समझौता होने की उम्मीद जताई गई है। माना जा रहा है, कि कतर की मध्यस्थता में इजराइल और हमास के बीच एक बड़ा समझौता हो सकता है।
इस्लामिक देशों का नया मुखिया बनना चाहता चीन
अमेरिका, जो इजराइल का सबसे बड़ा सहयोगी है, वहीं चीन ने खाड़ी देशों के बीच अपने संबंधों को काफी मजबूत कर लिए हैं, लिहाजा चीन की मध्यस्थ बनने की ये कोशिश, खाड़ी देशों में अमेरिका बनाम चीन के तौर पर देखा जा रहा है।
बीजिंग ने गाजा पट्टी में हमास के खिलाफ इजरायल की जवाबी कार्रवाई की आलोचना की है। वहीं, चीन ने अभी तक 7 अक्टूबर को इजराइल पर हमास के हमले को लेकर कोई बयान नहीं दिया है और चीन की तरफ से गाजा संघर्ष को लेकर जितने भी बयान जारी किए गये हैं, एक भी बयान में हमास का जिक्र नहीं है, जिससे इजराइल भड़का हुआ है।
चीन संघर्ष का समाधान खोजने में सक्रिय भूमिका निभाने का प्रयास कर रहा है, क्योंकि वह एक प्रमुख वैश्विक शक्ति के रूप में अपनी स्थिति का विस्तार करना चाहता है।
बीजिंग ने पिछले महीने खाड़ी क्षेत्र में अपना शांति दूत भेजा था। इसके अलावा, चीन ने यूनाइटेड नेशंस में गाजा पट्टी में तत्काल युद्धविराम के लिए जोरदार आवाज उठाने की भी कोशिश की थी। वहीं, चीन के पास इस महीने यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल की अध्यक्षता भी है।
जहां पिछले हफ्ते गाजा में युद्धविराम को लेकर पहला प्रस्ताव पारित किया, जिसमें हमास द्वारा रखे गए सभी बंधकों की तत्काल रिहाई और नागरिकों की सुरक्षा के लिए पूरे क्षेत्र में विस्तारित मानवीय गलियारों का आह्वान किया गया। हालांकि, इस दौरान भी हमास की निंदा नहीं की गई और जो प्रस्ताव पास किया गया, उसमें हमास का जिक्र नहीं किया गया था, लिहाजा अमेरिका, ब्रिटेन और भारत समेत कई देशों ने प्रस्ताव का विरोध किया।

चीन के शांति प्रस्ताव का क्या करेगा इजराइल?
गाजा पट्टी में चल रहे इस नये संघर्ष ने चीन को अरब देशों के साथ अपने पहले से ही मजबूत हो रहे संबंधों को और मजबूत करने और एक स्वतंत्र फिलिस्तीन की स्थापना के लिए "दो-राज्य" समाधान पर जोर देने वाली एक प्रमुख आवाज के रूप में खुद को स्थापित करने का मौका दिया है, जिसे व्यापक रूप से दीर्घकालिक शांति सुनिश्चित करने का एक प्रमुख मार्ग के तौर पर देखा जाता है।
लिहाज, सोमवार और मंगलवार को बीजिंग में होने वाली चीनी और अरब देश के अधिकारियों के बीच रुकी हुई शांति प्रक्रिया को कैसे पुनर्जीवित किया जाए, इस पर चर्चा होने की उम्मीद है।
चीन के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, पिछले महीने क्षेत्र के लिए चीन के विशेष दूत झाई जून के मध्य पूर्व के लगभग 10 दिवसीय दौरे के दौरान भी गाजा संघर्ष एक प्रमुख विषय था, जिन्होंने मिस्र, कतर, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और जॉर्डन का दौरा किया था।
पिछले हफ्ते चीनी दूत ने तुर्की और बहरीन का दौरा किया और अधिकारियों से मुलाकात की, जहां झाई ने एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के मौके पर सिंगापुर, अमेरिका और यूरोप के प्रतिनिधियों के साथ "क्षेत्रीय स्थिति" पर भी चर्चा की।












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