चीन से भागकर भारत आ रहीं कंपनियां.. ग्लोबल टाइम्स ने निकाली खीझ, कहा- साबित नहीं होगा रामबाण

चीन के खिलाफ भारत की स्ट्रैटजी ने शी जिनपिंग प्रशासन को परेशान कर दिया है और चीन इस बात से भी डरा हुआ है, कि कहीं भारत नाटो प्लस ज्वाइन ना कर ले।

China-India News

China-India News: अमेरिका के साथ तनावपूर्ण होते संबंध ने विदेशी कंपनियों को चीन से निकलने पर मजबूर कर दिया है, लिहाजा ज्यादातर कंपनियों ने भारत में कदम रखना शुरू कर दिया है।

किसी भी देश की अर्थव्यवस्था में विदेशी निवेश महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, लिहाजा देश के भागती कंपनियों को देखकर चीन ने भारत के खिलाफ आग उगलना शुरू कर दिया है।

चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स ने अपने आर्टिकिल में भारत के खिलाफ जिस तरह से आग उगलने की कोशिश की है और जिस तरह से खीझ निकाली है, उससे साफ जाहिर होता है, कि भागती कंपनियों को देखकर चीन डरा हुआ है। चीन को समझ में आ गया है, कि पश्चिम और भारत के बीच की मजबूत होती दोस्ती, चीन के लिए खतरनाक है।

ग्लोबल टाइम्स ने निकाली खीझ

ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है, कि "मोदी सरकार ने चीनी सप्लाई चेन पर पश्चिमी देशों की चिंता को भुनाया है, जिससे भारत के विदेशी निवेश में वृद्धि हुआ है, लेकिन अगर भारत ये सोचता है, कि वो पश्चिमी देशों की मदद से चीन को मैन्यूफैक्चरिंग हब से हटाकर खुद दुनिया का नया औद्योगिक शक्ति बन जाएगा, तो ये मोदी सरकार का सबसे बड़ा भ्रम है।"

हालांकि, भारत से खीझने के बाद भी भारत ने इस बात को स्वीकार किया है, कि 'जनवरी से मार्च के बीच भारत की आर्थिक वृद्धि (साल-दर-साल) 6.1 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा है, जो भारत को सबसे तेजी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनाता है।'

लेकिन, ग्लोबल टाइम्स ने आगे लिखा है, कि "वैश्विक आर्थिक मंदी से बढ़ते जोखिमों की पृष्ठभूमि के खिलाफ, भारत का आर्थिक डेटा अच्छा दिखता है, जिसे आश्चर्यजनक रूप से कुछ लोगों द्वारा भारत की आर्थिक क्षमता के प्रमाण के रूप में देखा जाता है।

लेकिन, अगर भारत वास्तव में यह सोचता है, कि वह अदृश्य क्षमता के आधार पर चीन की जगह ले सकता है, तो भारत वास्तव में पश्चिम द्वारा मूर्ख बनाया जा रहा है।"

चीनी अखबार ने आगे लिखा है, कि "भारत या वियतनाम के लिए चीन की जगह लेने की बात करना और कुछ नहीं, बल्कि एक राजनीतिक स्टंट है, जो पश्चिम चीन के विकास को रोकने की नीयत से खेल रहा है, लेकिन इससे भारत के उत्थान में कोई मदद नहीं होगी।"

ग्लोबल टाइम्स ने आगे अपनी खीझ निकालते हुए लिखा है, कि "यदि भारत अभी भी इस वास्तविकता को पहचानने में नाकाम रहता है, कि अमेरिका असल में मोदी सरकार को औद्योगिक शक्ति बनने की उसकी रणनीतिक आकांक्षा को प्राप्त करने में मदद नहीं कर रहा है, बल्कि उसे एक मोहरे के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है, को फिर भारत की आर्थिक संभावनाएं चिंताजनक होंगी"।

आपको बता दें, कि एपल ने भारत में उत्पादन शुरू कर दिया है, तो दुनिया के सबसे अमीर कारोबारी एलन मस्क ने भी अपनी कार कंपनी टेसला का प्रोडक्शन भारत में शुरू करने की घोषणा कर दी है। इसके अलावा करीब दर्जन भर कंपनियां चीन से निकलकर भारत में जल्द ही ्अपना प्लांट लगाने वाली हैं।

China-India News

भारत के खिलाफ शब्दों का जहर

पिछले एक साल में कई कंपनियों ने चीन में अपना परिचालन बंद किया है और वो कंपनियां भारत में आने को लेकर मोदी सरकार से संपर्क में हैं। वहीं, एपल ने भारत में अपना ऑपरेशन शुरू भी कर दिया है। लेकिन, चीनी अखबार ने लिखा है, कि भारत की अर्थव्यवस्था में कई समस्याएं काफी गहरी जड़ें जमा चुकी हैं, जिससे पार पाना भारत के लिए संभव नहीं है।

ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है, कि "2000 के बाद से भारत की अर्थव्यवस्था में जो वृद्धि हुई है, वो पश्चिमी देशों की वजह से हुई है, लेकिन अजीब बात यह है, कि दो दशकों से ज्यादा के विकास के बाद, इसकी अर्थव्यवस्था अभी भी तेजी से बढ़ने की उच्च उम्मीदों के साथ-साथ अपने व्यापार में औद्योगिक विकास को लेकर विभिन्न अराजक समस्याओं को लेकर चल रही है।"

इसने लिखा है, कि "अच्छे आंकड़े भारतीय अर्थव्यवस्था में गहरी जड़ें जमा चुकी कुछ समस्याओं को छिपा नहीं सकते हैं, जो कुछ वर्षों के लिए बाजार में प्रवेश करने के बाद विदेशी फर्मों को पलायन के लिए प्रेरित कर रही हैं। ताजा उदाहरण यह है, कि एप्पल आपूर्तिकर्ता विस्ट्रॉन 15 साल से अधिक समय तक देश में कारोबार करने के बाद, भारत में अपने ऑपरेशन को बंद कर रहा है।"

ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है, कि "भले ही एप्पल कंपनी ने अगले कुछ वर्षों में भारत में निवेश को दोगुना या तिगुना करने का लक्ष्य रखा है, फिर भी भारत के कारोबारी माहौल में उल्लेखनीय सुधार नहीं हुआ है, भले ही मोदी सरकार, चीन की जगह भारत को दुनिया के अगले विनिर्माण केंद्र के रूप में बदलने के उद्देश्य से सक्रिय रूप से औद्योगिक नीतियों का पालन कर रही है"।

यानि, एक तरफ चीन मान भी रहा है, कि मोदी सरकार औद्योगिक विकास के लिए मेहनत कर रही है और ये भी मान रहा है, कि चीन से कंपनियां निकलकर भारत जा रही हैं, उसके बाद भी चीनी अखबार लिखता है, कि भारत का इससे विकास नहीं होगा।

Recommended Video

    Indian Scientists ने कर दिया कमाल Solar System में खोजा Exoplanet, जानें क्या है ये | वनइंडिया हिंदी

    जबकि, चीन का आर्थिक विकास भी ऐसे ही हुआ है। चीन में उत्पादन करने वाली ज्यादातर बड़ी कंपनियां अमेरिका और यूरोपीय देशों की है और चीन ने टेक्नोलॉजी की चोरी करते करते अपना ऐसा विकास किया है, लेकिन कम्युनिस्ट पार्टी के अखबार के लेख से साफ पता चलता है, कि चीन अब घबराया हुआ है और वो मानने लगा है, कि भारत, अगले कुछ सालों में चीन के मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर के लिए गहरी चिंता का विषय बन जाएगा।

    Notifications
    Settings
    Clear Notifications
    Notifications
    Use the toggle to switch on notifications
    • Block for 8 hours
    • Block for 12 hours
    • Block for 24 hours
    • Don't block
    Gender
    Select your Gender
    • Male
    • Female
    • Others
    Age
    Select your Age Range
    • Under 18
    • 18 to 25
    • 26 to 35
    • 36 to 45
    • 45 to 55
    • 55+