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चीन को दुनिया में इज्जत दिला पाएंगे शी जिनपिंग? जानिए 5 वजहें जिनसे साल भर सुर्खियों में रहेगा चीन

शी जिनपिंग के शासनकाल में चीन की वैश्विक प्रतिष्ठा दुनिया में बुरी तरह से गिरी है और दुनिया के 17 देशों में हुए सर्वे में पता चला है कि, 50 फीसदी से ज्यादा लोगों में चीन को लेकर कोई विश्वास नहीं है।

बीजिंग, जनवरी 02: 2022 का आगाज हो चुका है और साल 2021 में चीन जिस तरह से पूरी दुनिया के न्यूजपेपर्स में मुख्य हेडलाइंस बना रहा, ठीक उसी तरह से साल 2022 में भी चीन लगातार सुर्खियों में रहेगा और बीजिंग ओलिपंक से शी जिनपिंग की तीसरी बार होने वाली ताजपोशी तक, ऐसी कई वजहें हैं, जो चीन को मुख्य हेडलाइंस में रखेगा, लेकिन कई सवाल भी उठ रहे हैं। जैसे ही कोरोनोवायरस महामारी अपने तीसरे वर्ष में प्रवेश कर चुकी है, तो सवाल ये है कि, क्या चीन दुनिया के बाकी हिस्सों से अलग-थलग रहेगा? क्या राष्ट्रपति शी जिनपिंग एक तानाशाह की तरह तीसरा कार्यकाल हासिल करेंगे और विश्व पटल पर चीन का स्थान कैसा रहने वाला है, आज हम ऐसे ही पांच ऐसे मुख्य बिदुओं पर नजर डालेंगे, जिनकी वजह से दुनियाभर में चीन सुर्खियों में रहेगा।

बहिष्कार के बीच बीजिंग ओलंपिक

बहिष्कार के बीच बीजिंग ओलंपिक

अगले महीने से चीन की राजधानी में शीतकालीन ओलंपिक का आयोजन होने जा रहा है, लेकिन अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन समेत कई देश बीजिंग ओलंपिक का डिप्लोमेटिक बहिष्कार कर चुके हैं, जिससे चीन के साथ इन देशों के संबंध काफी खराब हैं, दूसरी तरफ बीजिंग, विश्व का पहला ऐसा शहर बन जाएगा, जिसने ग्रीष्मकालीन ओलंपिक के साथ साथ शीतकालीन ओलंपिक का भी आयोजन किया हो। लेकिन, चीन के लिए इस साल का आयोजन थोड़ा मुश्किल होगा, क्योंकि कोरोना वायरस के कुछ ही मामले सामने आने के बाद जिस तरह से चीन के बड़े शहरों में लॉकडाउन लगा दिया जाता है, उसके बाद सवाल यही हैं, कि आखिर ओलंपिक खेलों के बीच चीन ज़ीरो कोविड नियम को कैसे बरकरार रख पाएगा। लिहाजा, फरवरी महीने में पूरी दुनिया की निगाह चीन की तरफ ही रहने वाली है।

तीसरे साल कैसे करेगा कोरोना कंट्रोल?

तीसरे साल कैसे करेगा कोरोना कंट्रोल?

लगातार कोरोनावायरस के प्रकोप और सबसे ज्यादा सख्त लॉकडाउन को सहन करने के बाद भी चीन में कोविड के मामले लगातार आ रही है, जिससे चीन की ज़ीरो कोविड पॉलिसी की काफी आलोचना की जाती है, लेकिन बीजिंग अपनी इस पॉलिसी से पीछे नहीं हटेगा। चीन के उत्तर पश्चिम में स्थिति एक प्राचीन शहर शीआन में एक करोड़ 30 लाख की आबादी लगातार 10 दिनों से दुनिया के सबसे ज्यादा सख्त लॉकडाउन में फंसी हुआ है और वुहान के बाद से ये लॉकडाउन चीन का सबसे सख्त और सबसे बड़ा लॉकडाउन है, जिसने 2020 की शुरुआत में 11 मिलियन लोगों को सील कर दिया था। हालांकि, स्थानीय अधिकारी अपने द्वारा थोपी गई सख्त नीतियों के लिए तैयार नहीं थे। पिछले एक हफ्ते में, चीनी सोशल मीडिया भोजन और अन्य आवश्यक आपूर्ति की कमी का सामना कर रहे शीआन निवासियों की मदद के लिए चिल्ला रहा है, क्योंकि तमाम दुकान बंद हैं और एक भी शख्स को घर से बाहर निकलने की इजाजत नहीं है।

शी जिनपिंग की तीसरी बार ताजपोशी

शी जिनपिंग की तीसरी बार ताजपोशी

बीजिंग में सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी की होने वाली 20वीं राष्ट्रीय कांग्रेस की बैठक के दौरान शी जिनपिंग का तीसरी बार चीन का राष्ट्रपति बनना तय है और चीन के सबसे शक्तिशाली नेता शी जिनपिंग ने पहले ही राष्ट्रपति पद की समय सीमा समाप्त कर दी थी और संविधान में अपनी राजनीतिक विचारधारा को शामिल कर लिया था। 2021 में, उन्होंने एक कदम आगे बढ़ाया, एक ऐतिहासिक प्रस्ताव को पारित करने के साथ उन्हें आधुनिक चीन के संस्थापक पिता माओत्से तुंग और सुधारवादी नेता देंग शियाओपिंग की तरह महान नेता की लिस्ट में शामिल कर लिया गया। जिसमें कहा गया है कि, माओ और देंग के बाद से शी जिनपिंग ने ही अपने शासनराल में 1.4 अरब चीनी लोगों के जीवन पर इतना बड़ा प्रभाव डाला है। लेकिन, अपने कार्यकाल के दौरान चीन में जनता के पास मौजूद बचे खुचे अधिकारी भी जा चुके हैं और सरकार की आलोचना करने पर कई साल जेल की सजा का प्रावधान किया गया है। लिहाजा, ये तय है कि, शी जिनपिंग का पश्चिमी देशों से मानवाधिकार पर बहस होती रहेगी और चीन लगातार सुर्खियों में बना रहेगा।

चीन की अर्थव्यवस्था के सामने चुनौतियां

चीन की अर्थव्यवस्था के सामने चुनौतियां

2021 में चीन की अर्थव्यवस्था ने काफी संघर्ष किया है और नया साल भी दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के लिए कुछ बड़ी चुनौतियां लेकर आया है। चीन कुछ ऐसे सिरदर्दों से जूझ रहा है जो 2022 में विकास पर गंभीर रूप से भार डाल सकते हैं, बार-बार कोविड -19 के प्रकोप से लेकर आपूर्ति श्रृंखला में आ रही रूकावटें शामिल हैं। लेकिन, इन संकटों के बाद भी चीन को पूरी उम्मीद है कि वो साल 2022 में विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था की तरफ एक कदम और बढ़ा दिया है। कई अर्थशास्त्री लगभग 7.8% की वृद्धि का अनुमान लगा रहे हैं। लेकिन 2022 की कहानी काफी अलग रहने वाली है और एक अलग कहानी है। चीन की प्रमुख बैंकों ने अपनी वृद्धि दर विकास के अनुमानों को 4.9% और 5.5% के बीच घटा दिया है और अगर ये जारी रहा, तो 1990 के बात चीन की दूसरी सबसे धीमी विकास दर होगी।

दुनिया में छवि सुधार पाएगा ड्रैगन?

दुनिया में छवि सुधार पाएगा ड्रैगन?

महामारी के शुरुआती दिनों में, बीजिंग ने वैश्विक स्वास्थ्य संकट को अपनी छवि सुधारने के अवसर में बदलने की उम्मीद की थी। जिसके तहत चीन ने जरूरतमंद देशों को फेस मास्क और अन्य चिकित्सा संसाधन भेजे और चीनी टीकों को वैश्विक सार्वजनिक बनाने का संकल्प लिया। लेकिन चीजें वैसी नहीं निकली जैसी बीजिंग चाहता था। जबकि वायरस को तेजी से नियंत्रित करने में चीन की सफलता ने घर में भारी समर्थन हासिल किया है, लेकिन, अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा वुहान के प्रकोप के शुरुआती दौर में गलत व्यवहार के कारण गिर गई थी, जो इसके राजनयिकों और प्रचारकों ने विदेशों में फैलाया है, शिनजियांग, तिब्बत और हांगकांग पर इसकी निरंतर कार्रवाई और अपने पड़ोसियों के प्रति चीन की हड़प नीति से उसकी वैश्विक प्रतिष्ठा मिट्टी में मिल चुकी है। हालांकि, इस बात की संभावना नहीं के बराबर है, फिर भी साल 2022 में इस तरफ भी निगाहें होंगी, कि क्या चीन अपनी वैश्विक प्रतिष्ठा सुधारने की कोई कोशिश भी करता है।

चीन की छवि है काफी ज्यादा खराब

चीन की छवि है काफी ज्यादा खराब

प्यू रिसर्च सर्विस के अनुसार, दुनिया के सबसे विकसित देशों में चीन के प्रति नफरत भरे विचार रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गए हैं। प्यू द्वारा पिछले साल सर्वेक्षण किए गए 17 देशों के विशाल बहुमत में चीन के बारे में व्यापक रूप से नकारात्मक विचार हैं। जापान में 88%, स्वीडन में 80%, ऑस्ट्रेलिया में 78%, दक्षिण कोरिया में 77% और संयुक्त राज्य अमेरिका में 76% लोगों का विश्वास चीन पर नहीं रहा है। वहीं, विश्लेषकों का कहना है कि वैश्विक मंच से शी जिनपिंग की अनुपस्थिति ने चीन को दुनिया के बाकी हिस्सों से अलग-थलग करने में योगदान दिया है। सर्वेक्षण किए गए अधिकांश देशों में शी जिनपिंग के प्रति विश्वास भी ऐतिहासिक रूप से निचले स्तर पर बना हुआ है। सर्वेक्षण किए गए 17 देशों में से एक को छोड़कर (सिंगापुर को छोड़कर), बहुमत का कहना है कि उन्हें शी जिनपिंग पर बहुत कम या कोई भरोसा नहीं है। वहीं, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, स्वीडन और कनाडा में आधे से ज्यादा लोगों ने कहा कि, शी जिनपिंग और चीन पर उन्हें कोई भरोसा नहीं है। लिहाजा, अब देखना होगा, कि क्या शी जिनपिंग वैश्विक स्तर पर अपनी और चीन की छवि को कैसे बेहतर कर पाते हैं।

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