चीन: हिरासत में पत्रकार झांग झैन की जिंदगी खतरे में

वुहान, 19 नवंबर। हिरासत में ली गईं पत्रकार झांग झैन की रिहाई के लिए चीन सरकार पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ रहा है. बताया जा रहा है कि झांग ने जेल में ही भूख हड़ताल शुरू कर दी है जिससे उनकी जिंदगी खतरे में पड़ गई है. रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स यानी आरएसएफ संस्था ने गुरुवार को साहस श्रेणी में साल 2021 के प्रेस फ्रीडम अवॉर्ड के लिए झांग के नाम की घोषणा की.
पिछले साल वुहान में कोविड महामारी की स्थिति के बारे में यूट्यूब पर दर्जनों वीडियो पोस्ट करने के बाद झांग को मई 2020 में गिरफ्तार किया गया था. तब से झांग सरकारी हिरासत में हैं और दिसंबर में चीन की एक अदालत ने उन्हें "विवाद भड़काने और परेशानी खड़ा करने" के आरोप में चार साल की सजा सुनाई है. चीन में पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ यह आरोप बहुत ही सामान्य है.
अगस्त महीने में कुछ विश्वस्त सूत्रों ने डीडब्ल्यू को बताया था कि जेल में महीनों तक भूख हड़ताल करने के बाद झांग का वजन 40 किलोग्राम यानी करीब 88 पाउंड से भी कम हो गया था. पिछले महीने उनके भाई झांग जू ने ट्विटर पर खुलासा किया कि वह जेल में मरने की स्थिति में पहुंच गई हैं.
उन्होंने ट्विटर पर लिखा था, "वह बहुत जिद्दी है. मुझे लगता है कि वह लंबे समय तक जिंदा नहीं रह पाएगी. यदि वह कड़ाके की ठंड को नहीं झेल पाई, तो मुझे उम्मीद है कि दुनिया उसे वैसे ही याद रखेगी जैसी वह थी."
आरएसएफ के महासचिव क्रिस्टोफ डेलोर भी झांग जू की चिंता से सहमति जताते हैं. वह कहते हैं "सेंसरशिप की अवहेलना करने और दुनिया को एक नई महामारी की वास्तविकता से सचेत करने के लिए, साहस की श्रेणी में पुरस्कार जीतने वाली पत्रकार अब जेल में है और उसका स्वास्थ्य बेहद चिंताजनक है."
डीडब्ल्यू के साथ एक इंटरव्यू में झांग के वकील झांग केके ने बताया कि पत्रकार की मां ने पिछले हफ्ते शंघाई की महिला जेल के अधिकारियों से झांग को स्वास्थ्य के आधार पर पैरोल देने की मांग की थी. उस वक्त जेल के अधिकारियों ने उनसे लिखित रूप में आवेदन देने को कहा था.
जेल के अधिकारियों ने उनसे कहा कि आप जितना जल्दी हो सके, आवेदन और जरूरी कागजात जमा कर दीजिए. चूंकि सप्ताहांत पर दफ्तर बंद थे इसलिए उन्होंने झांग की मां से 15 नवंबर को आने को कहा था. उन्होंने सारे कागजात जमा भी कर दिए लेकिन उसके 48 घंटे बाद भी उनके आवेदन पर किसी कार्रवाई की कोई सूचना नहीं थी.
झांग के भाई की ओर से अधिकारियों को सौंपे गए एक ऑनलाइन आवेदन के अनुसार, जब झांग की मां ने उन्हें आखिरी बार 29 अक्टूबर को एक वीडियो कॉल के जरिए देखा था, तो वह बेहद कमजोर थीं और चलने के लिए सहारा ले रही थीं.
जिंदगी 'एक धागे के सहारे लटकी हुई है'
अपने आवेदन में उन्होंने लिखा है, "उसके चेहरे और माथे में बस हड्डियां ही दिख रही थीं और यह रक्तहीन सा दिख रहा था, जैसे उसका जीवन एक धागे से लटका हुआ है."
वह आगे लिखते हैं, "झांग झैन की वर्तमान शारीरिक स्थिति उसे अकेले चलने से रोकती है और वह मुश्किल से कुछ मीटर ही बिना सहारे के चल पाती है. मेरी मां इस खबर से इतनी व्याकुल थी कि उन्होंने जेल के कर्मचारियों के सामने दोनों घुटनों के बल बैठकर, इस उम्मीद में प्रार्थना की कि वे कुछ मानवीय तरीके से उसकी देखभाल करेंगे."
झांग के मामले को पिछले एक साल से देखने वाले एक सामाजिक कार्यकर्ता सरकारी प्रतिरोध के चलते अपना नाम नहीं जाहिर करना चाहते. डीडब्ल्यू से बातचीत में वो कहते हैं कि झांग के स्वास्थ्य की स्थिति बहुत चिंताजनक है, लेकिन यह बता पाना मुश्किल है कि क्या चीनी सरकार मेडिकल पैरोल पर उसे रिहा करने पर विचार करेगी.
सूत्र के मुताबिक, "ऐसे मामलों में, राजनीतिक कैदियों के लिए चिकित्सा पैरोल पर रिहा होना दुर्लभ है. लेकिन चूंकि वो बहुत बीमार हैं और उन्हें मदद की सख्त जरूरत है, इसलिए उन्हें रिहा किया जा सकता है." झांग झैन भूख हड़ताल के लिए इतनी दृढ़ थीं कि उन्होंने अपनी जान की भी परवाह नहीं की.
चीन में मानवाधिकार मामलों की शोधकर्ता याकी वांग कहती हैं कि अतीत में ऐसे कई उदाहरण हैं जिनमें असंतुष्ट लोगों की या तो जेल में ही मौत हो गई या फिर जेल से रहा होने के कुछ समय बाद. इनमें नोबेल पुरस्कार विजेता लियू शियोबो भी शामिल हैं.
डीडब्ल्यू से बातचीत में वांग कहती हैं, "जेल से रिहा होने के कुछ ही समय बाद उनकी मौत इसलिए हो गई क्योंकि जेल में उनके स्वास्थ्य का ध्यान नहीं रखा गया. झांग का मामला इकलौता उदाहरण नहीं है."
पत्रकार झांग झैन के वकील झांग केके ने बताया कि उनके भाई और मां सरकारी आरोपों से बहुत व्यथित हैं, लेकिन वे भी झांग की भूख हड़ताल के खिलाफ हैं. केके कहते हैं, "वे उम्मीद कर रहे थे कि अधिकारी उसे जीने देंगे."
वकील केके कहते हैं कि उनका मानना है कि झांग के भाई ने ट्विटर पर बोलना शुरू कर दिया क्योंकि उन्हें अपनी बहन के जीवित रहने की कोई उम्मीद नहीं है, और वह उसकी स्थिति को छिपाए रखने के लिए खुद को दोषी नहीं बनाना चाहते.
वकील केके कहते हैं, "उनके भाई का कहना है कि यदि वह जेल में मर रही है और वह इसके बारे में कुछ नहीं करता है, तो वह इसे बर्दाश्त नहीं कर पाएगा. इसलिए उन्होंने अपनी बहन के बारे में अपनी भावनाओं को साझा करने के लिए ट्विटर का सहारा लिया."
'बिना शर्त' रिहाई की अपील
पिछले कुछ हफ्तों में, कई मानवाधिकार संगठनों ने इस बारे में बयान जारी किए हैं जिनमें चीन की सरकार से झांग को रिहा करने की अपील की गई है. 4 नवंबर को ह्यूमन राइट्स वॉच यानी एचआरडब्ल्यू ने चीन सरकार से उसे "तुरंत और बिना शर्त रिहा" करने की मांग की.
एचआरडब्ल्यू की याकी वांग कहती हैं, "चीनी सरकार को एक और शांतिपूर्ण आलोचक को अन्यायपूर्ण रूप से कैद होने के दौरान गंभीर रूप से होने देने के लिए जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए. अन्य देशों की सरकारों को चाहिए कि कोई भी दुखद स्थिति आने से पहले ही झांग झैन की तत्काल रिहाई की अपील करनी चाहिए."
अमेरिका और जर्मनी ने भी झांग की हालत को लेकर चिंता जाहिर की है. अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता नेड प्राइस ने कहा कि अमेरिका उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंतित है. वह कहते हैं, "हम पीआरसी को उसकी तत्काल और बिना शर्त रिहाई के लिए और चीन के लिए एक स्वतंत्र प्रेस और लोगों के स्वतंत्र रूप से खुद को व्यक्त करने के अधिकार का सम्मान करने के लिए अपनी अपील को दोहराते हैं."
जर्मन विदेश मंत्रालय ने भी इस हफ्ते पुष्टि की कि चीन स्थित जर्मन दूतावास ने चीनी विदेश मंत्रालय से अनुरोध किया है कि झांग की तत्काल रिहाई की जाए. कुछ कार्यकर्ताओं का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के समर्थन से परिवार को उसकी रिहाई की लड़ाई में मदद मिलेगी.
लंदन स्थित एक सामाजिक कार्यकर्ता जेन वांग उनकी रिहाई के बाद से ही उनके समर्थन में आवाज उठा रहे हैं. वह कहते हैं, "उसके परिवार का मानना है कि उसका स्वास्थ्य गंभीर अवस्था में पहुंच गया है, इसलिए उन्होंने झांग के मेडिकल पैरोल के अधिकार के लिए लड़ने का साहस जुटाया है. बाहरी दुनिया को इस बार चुप नहीं रहना चाहिए. अगर बाहर के लोगों ने ध्यान न दिया होता, तो झांग आज कैसी होती?"
लंबे समय से झांग के मामले को देख रहे कुछ सूत्रों ने डीडब्ल्यू को बताया कि चीनी सरकार को इस मामले को 'बुद्धिमानी' से संभालना चाहिए, क्योंकि पहले ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं जब चीन की जेलों में कैदियों की की मौत हो गई है.
ऐसे ही एक सूत्र का कहना है, "चूंकि इस मामले पर इतनी चर्चा हो रही है, इसलिए कोई सफलता मिल सकती है. कुछ लोग आशान्वित हैं और कुछ अभी भी सोचते हैं कि ऐसी व्यवस्था में उन्हें कोई उम्मीद नहीं दिख रही है. लेकिन मुझे लगता है कि हमें आशान्वित होना चाहिए."
याकी वांग का मानना है कि झांग के प्रयास अभी भी लोगों को प्रेरित कर सकते हैं, इस आम धारणा के बावजूद कि सत्तावादी शासन के तहत बोलना ठीक नहीं है. वह कहती हैं, "मुझे लगता है कि झांग की प्रेरणा आध्यात्मिक स्तर की है. हो सकता है कि भविष्य में जब चीनी समाज में लोगों को अपनी मांगों को उठाने की इजाजत मिले, तो वे उसके बारे में जरूर सोचेंगे और यही कहेंगे कि वह बहादुर है."
Source: DW
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