खुलासा: दुनिया ना जान जाए कोरोना का स्रोत इसलिए चीन ने मिटाया था शुरुआती मरीजों का डेटा
नई दिल्ली, 24 जून। कोरोना वायरस के स्रोत को लेकर घिरे चीन पर एक और अहम खुलासा हुआ है। ये खुलासा उसकी वुहान लैब के बारे में है। चीनी वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस के स्रोत का पता लगाने से रोकने के लिए शुरुआती मरीजों के डेटा को डिलीट कर दिया था। आपको बता दें कि वैज्ञानिक कोरोना की उत्पत्ति को लेकर गहन जांच कर रहे हैं और इसी जांच में ये पता चला है कि इस महामारी के केंद्र रहे वुहान के दर्जनों मरीजों के नमूनों को अंतरराष्ट्रीय डेटाबेस से डिलीट कर दिया गया था। इस इंटरनेशनल डेटाबेस को कोरोना वायरस के हर छोटे-बड़े डवलपमेंट पर नजर रखने के लिए बनाया गया था।

इन फाइलों से कोरोना वायरस के उत्पत्ति को लेकर महत्वपूर्ण सुराग हाथ लग सकता था। इससे यह भी पता चल सकता था कि दिसंबर 2019 में वुहान के सी फूड मार्केट में प्रसार से कितना पहले से यह महामारी चीन में फैल रही थी। इन आंकड़ों के डिलीट किए जाने को पकड़ने वाले अमेरिकी प्रफेसर ने कुछ डेट को वापस रिकवर कर लिया है। गौरतलब है कि अमेरिकी के प्रोफेसर जेसे ब्लूम ने बताया कि चीन ने जब से कोरोना के प्रसार की आधिकारिक जानकारी दी है, उसके काफी पहले से ही यह महामारी वहां फैल रही थी।
उन्होंने पाया कि वायरस के शुरुआती नमूनों से पता चलता है कि यह विकसित हुआ है। हालांकि उन्होंने लैब से लीक के सिद्धांत पर ज्यादा जोर नहीं दिया। वायरोलॉजिस्ट प्रोफेसर ब्लूम ने कहा कि उनका मानना है कि चीन ने इसलिए फाइलों को डिलीट कर दिया ताकि उनके अस्तित्व को छिपाया जा सके।












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