तालिबान को मान्यता देने की तैयारी में चीन-पाकिस्तान, काबुल गिरने का है इंतजार, इमरान का प्लान कामयाब?
चीन सरकार तालिबान को मान्यता देने की तैयारी कर रही है, इसका खुलासा अमेरिकन इंटेलीजेंस एजेंसी ने किया है
बीजिंग/काबुल/इस्लामाबाद, अगस्त 13: तालिबान अब तक अफगानिस्तान के 10 से ज्यादा प्रांतीय राजधानियों पर कब्जा कर चुका है और इस बीच चीन से बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। रिपोर्ट आ रही है कि जैसे ही काबुल पर तालिबान कब्जा करेगा, ठीक वैसे ही चीन इस आतंकी संगठन को मान्यता दे देगा। माना जा रहा है कि पिछले महीने तालिबानी नेताओं ने जब बीजिंग का दौरा किया था, तभी इस बात का फैसला हो गया था और अब रिपोर्ट आ रही है कि आतंकवादी संगठन तालिबान जैसे ही बंदूक के बूते तालिबान पर कब्जा करेगा, ठीक वैसे ही चीन उसे मान्यता दे देगा। वहीं, पिछले हफ्ते पाकिस्तान के भी कई मंत्रियों ने परोक्ष तौर पर कहा था कि वो तालिबान को मान्यता दे देगा।

तालिबान को मान्यता देगा चीन
समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक चीन की मिलिट्री और इंटेलीजेंस ने अफगानिस्तान की स्थिति को बारिकी से परखा है और फिर चीन में तय किया गया है कि चीन की सरकार आतंकवादी संगठन तालिबान के साथ पार्टनरशिप करते हुए उसे मान्यता दे देगी। चीन सरकार तालिबान को मान्यता देने की तैयारी कर रही है, इसका खुलासा अमेरिकन इंटेलीजेंस एजेंसी ने किया है, जो अफगानिस्तान में चीन की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रही है। इससे पहले पिछले महीने तालिबान के प्रतिनिधियों ने बीजिंग का दौरा किया था, जिसमें चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ तालिबानी नेताओं के साथ बैठक हुई है। इस बैठक के दौरान कुछ बातें सार्वजनिक हुई थी और रिपोर्ट के मुताबिक तय किया गया था कि तालिबान को अफगानिस्तान के अंदर चीन के विरोध का सामना नहीं करना पड़ेगा। वहीं, तालिबान ने चीन को आश्वस्त किया था कि वो अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल चीन के खिलाफ नहीं होने देगा।

तालिबान-चीन में गठबंधन
27 जुलाई को जब तालिबानी नेताओं ने बीजिंग का दौरा किया था, उस वक्त रिपोर्ट आई थी कि चीन ने तालिबान को बताया था कि वो कैसे आसानी से अफगानिस्तान की सरकार को सत्ता से हटाकर काबुल पर कब्जा कर सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, तालिबान के नेताओं ने चीन से अफगानिस्तान पर कब्जे के लिए समर्थन मांगा था। रिपोर्ट के मुताबिक चीन ने तालिबान से कहा कि अगर तालिबान सत्ता में आता है तो किसी भी हालत में अफगानिस्तान की जमीन को चीन के खिलाफ इस्तेमाल नहीं होने देगा, इसका वायदा करे। जिसके जवाब में तालिबान ने चीन को वचन दिया है कि वो किसी भी ऐसे संगठन का समर्थन नहीं करेगा, जो चीन में आतंकवाद फैलाना चाहते हैं। तालिबानी नेता मुल्ला बरादर ने चीन को आश्वासन दिया है कि वो उइगर चरमपंथियों का साथ नहीं देगा और ना ही अफगानिस्तान में उन्हें शरण लेने देगा।

पाकिस्तान में भी मान्यता देने की जल्दबाजी
पाकिस्तानी मीडिया के एक बड़े हिस्से ने दावा किया है कि जैसे ही तालिबान काबुल पर नियंत्रण स्थापित करता है, ठीक वैसे ही पाकिस्तान उसे मान्यता दे देगा। बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान से ऐसे संकेत मिले हैं कि इमरान खान सरकार उभरते तालिबान को जल्द से जल्द मान्यता देने की कोशिश कर रहा है। बीबीसी ने अपनी रिपोर्ट में पाकिस्तान के शीर्ष नेताओं के बयानों के हवाले से लिखा है कि ''ऐसा प्रतीत होता है कि पाकिस्तान चाहता है कि अफगानिस्तान में कम अफरा-तफरी के साथ जल्द से जल्द सत्ता का हस्तांतरण तालिबान के हाथ में हो जाए''। बीबीसी ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि पाकिस्तान इस बात के लिए अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी की आलोचना कर रहा है कि वो तालिबान के रास्ते में 'बाधा' बन रहे हैं।

तालिबान और चीन में किन मुद्दों पर समझौता?
चीनी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक तालिबान ने बीजिंग को कई बार आश्वासन दिया है कि वो अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल किसी तीसरे देश के खिलाफ नहीं होने देगा। रिपोर्ट के मुताबिक, तालिबान लगातार उन देशों को आश्वस्त करने में लगा हुआ है, जिन्हें डर है कि तालिबान के सत्ता में आने के बाद अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल उनके खिलाफ होगा। जिसमें सबसे बड़ा डर भारत और चीन को है। चीन को अफगानिस्तान की सीमा से सटे शिनजियांग प्रांत में उइगर आतंकवाद फैलने का डर है, तो भारत को कश्मीर की सुरक्षा का डर है। जिसको लेकर तालिबान ने चीन से कहा है कि वो अफगानिस्तान की जमीन पर फिर से अलकायदा को पनपने नहीं देगा। साथ ही वो कट्टरपंथी इस्लाम का विरोध करने वाले देशों को निशाना बनाने के लिए आतंकी प्रशिक्षण शिविरों को अफगानिस्तान में स्थापित नहीं होने देगा।

तालिबान होगा शक्तिशाली
चीन और पाकिस्तान अगर तालिबान को मान्यता दे देता है, तो ये तालिबान के लिए सबसे बड़ी जीत होगी। माना जा रहा है कि पाकिस्तान ने ही चीन और तालिबान के बीच दोस्ती करवाई है। तालिबानी नेताओं के बीजिंग दौरे से पहले पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी और सेना प्रमुख ने चीन की यात्रा की थी और रिपोर्ट के मुताबिक उसी दौरे के दौरान अफगानिस्तान को लेकर रोडमैप बनाया गया था और पाकिस्तान ने ही चीन और तालिबानी नेताओं को एक मंच पर लाया था। पाकिस्तान ने ही इस बात को सुनिश्चित किया कि काबुल फतह के साथ साथ चीन पहले तालिबान को मान्यता दे दे और फिर पाकिस्तान भी तालिबान को मान्यता दे देगा।












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