चीन ने शंघाई को भी किया 'सील', 'फेल' हुई जीरो कोविड पॉलिसी, शेनझेन समेत कई बड़े शहरों में हाहाकार
बीजिंग, 14 मार्च: भारत में आज दो साल बाद कोरोना के सबसे कम मामले सामने आए हैं, लेकिन चीन में अब तक की सबसे बुरे दौर की शुरुआत हो चुकी है। चीन के लगभग 10 बड़े शहर काफी सख्त पाबंदियां झेल रहे हैं और यहां तक कि वहां के सबसे अधिक आबादी वाले शहर शंघाई भी सील किया जा चुका है और वह भी इसलिए क्योंकि शी जिनपिंग की सरकार शंघाई में लॉकडाउन लगाने से मचने वाले हाहाकार को टालना चाह रही है। चीन में अकेले रविवार को ही एक दिन में इतने कोविड केस आए, जितने ना तो कभी वुहान में आए थे और ना ही कहीं और। यही वजह है कि कोविड की रोकथाम में नाकाम रहने वाले अफसरों पर गाज गिर रही है और अबतक दर्जनों नप चुके हैं।

1.70 करोड़ की आबादी दो दिन से सख्त लॉकडाउन में
चीन के तकनीक हब शेनझेन शहर में 1 करोड़ 70 लाख की आबादी दो दिनों से पूरी तरह से लॉकडाउन में है। इसके बाद चीन की सबसे ज्यादा आबादी वाला शहर शंघाई और कई बड़े शहर भी पाबंदियों की गिरफ्त में आ गए हैं। यह कोविड के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने वाले देश की कहानी है। जिस दिन भारत में 680 दिनों बाद कोरोना के सबसे कम मामले सामने आए हैं, उस दिन कोविड-19 का जन्मदाता चीन खुद को ओमिक्रॉन वेरिएंट के प्रकोप से बचाने के लिए सख्त से सख्त उपाय अपनाने में लगा हुआ है। एक दिन पहले शेनझेन को लॉकडाउन में बंद करने के बाद सोमवार को दूसरे बड़े हब दालियां,नालजिंग और तिआंजिन में भी पाबंदियां शुरू की गई हैं, जो कि राजधानी बीजिंग के आसपास हैं। शेनझेन की तस्वीरें सामने आई हैं, उससे स्पष्ट हो रहा है कि लोगों को कैसे प्लास्टिक की बैरिकेडिंग करके उनके लिए लक्ष्मण रेखा खींच दी गई है। चीन के सख्त नियंत्रण के बावजूद कोरोना के आउट ऑफ कंट्रोल होने के खतरे की आशंका को देखते हुए हॉन्ग कॉन्ग एक्सचेंज का शेयर बाजार भी सोमवार को गिर गया। क्योंकि यह शहर फॉक्सकॉन, हुआवेई और टेंसेंट जैसी कंपनियों का हब है।
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कम्युनिटी ट्रांसफर के खतरे से हाहाकार
आने वाले दिन और भी भयानक गुजरने के संकेत दिए जा रहे हैं। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि ओमिक्रॉन वेरिएंट की संक्रामकता को देखते हुए और भी सख्त प्रतिबंधों को लागू किया जा सकता है। चीन की सरकार की ओर से जो आधिकारिक आंकड़े जारी किए गए हैं, उसके मुताबिक सोमवार को वहां कुल 2,300 कोविड केस सामने आए हैं, जो कि रविवार के 3,400 के मुकाबले कम हैं और यह वुहान से कोरोना की शुरुआत के बाद सबसे ज्यादा संख्या थी। शेनझेन शहर के अधिकारी ने सोमवार को हुई ब्रिफिंग में कहा है, 'शहरी गांवों और फैक्ट्रियों में कई छोटे-छोटे क्लस्टर (संक्रमितों के) हैं।' 'इससे कम्युनिटी ट्रांसफर का बहुत ज्यादा खतरा हो गया है और आगे ज्यादा सावधानियां अपनाने की जरूरत है।'

शंघाई में लॉकडाउन टालना चाह रहा है चीन
चीन अबतक के सबसे ज्यादा कोरोना संकट की दौर में पहुंच चुका है, इसका अंजादा उसके सबसे ज्यादा आबादी वाले शंघाई शहर की स्थिति से लगता है। चीन में हाहाकार ना फैले इसके मद्देनजर चीन सरकार यहां पूर्ण लॉकडाउन को टालने की कोशिश कर रही है, लेकिन हकीकत है कि यहां सोमवार को भी अनगिनत रिहायशी इलाके और दफ्तर भी पूरी तरह से सील अवस्था में हैं। सोमवार को यहां आधिकारिक तौर पर सिर्फ 170 नए संक्रमण की बात मानी गई है, लेकिन कारोबारियों और प्रशासन में बढ़ती बेचैनी देखकर हालात का अंदाजा लग जाता है।

स्थानीय स्तर पर बहुत सख्त पाबंदियों का इस्तेमाल
शंघाई के एक रेस्टोरेंट कारोबारी ने एएफपी को अपना नाम नहीं जाहिर होने की शर्त पर कहा है कि स्थानीय स्तर पर अहले दर्जे की पाबंदियां लगा दी गई हैं, जिससे अंदाजा लगता है कि जब दुनिया इस महामारी से उबर रही है, चीन का जन-जीवन पूरी तरह से उलझता जा रहा है। चार रेस्टोरेंट चलाने वाले शख्स ने बताया कि 'विभिन्न जिले अलग नीतियां अपनाते हैं।' 'मैं एक को बंद करना चाहता हूं और बाकी को खोलना चाहता हूं, देखते हैं कि बाद में क्या होता है। इससे जूझने के अलावा मैं कर भी क्या सकता हूं।' हालांकि, कई जगहों पर हालात इससे भी बदतर हैं।

कई शहरों में मार्च की शुरुआत से ही लगा है लॉकडाउन
उत्तरपूर्वी चीन के जिलिन प्रांत में लगातार दूसरे दिन 1,000 से ज्यादा नए मामले आधिकारिक तौर पर सामने आए हैं। सोमवार से लोगों से कहा जा रहा है कि वे बिना पुलिस की इजाजत के शहर से बाहर नहीं जा सकते। इस प्रांत के कम से कम 5 शहरों में मार्च की शुरुआत से ही लॉकडाउन लगा है, जिसमें चैंगचुन जैसा बड़ा औद्योगिक इलाका भी शामिल है, जहां 90 लाख लोग शुक्रवार तक अपने घरों में कैद थे। वैसे कहने के लिए बाकी दुनिया के मुकाबले चीन में केस लोड अभी भी काफी कम हैं, लेकिन जिस तरह से जीरो-कोविड नीति फेल हुई है, उससे वहां की सरकार स्थिति पूरी तरह से अनियंत्रित होने को लेकर आशंकित है। इसके चले सिर्फ तीन प्रांतों में ही कुछ दिनों के भीतर स्थानीय आउटब्रेक को नहीं संभालने के आरोपों में कम से कम 26 अधिकारियों को बर्खास्त किया जा चुका है।












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