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पाकिस्तान: पेशावर हाई कोर्ट में जब सामने आया बॉलीवुड फ़िल्म 'बाग़बान' जैसा मुक़दमा

पेशावर हाई कोर्ट
BBC
पेशावर हाई कोर्ट

"हम तो उनसे कुछ नहीं मांगते, ये अपनी बीवियों को ख़ुश रखें लेकिन बूढे मां-बाप को भी बेआसरा न छोड़ें."

ये शब्द थे पेशावर हाई कोर्ट में अपने और अपने पति की देख-रेख के लिए अपील करने वाली एक मां के, जो छह बेटे होने के बावजूद बुढ़ापे में बेआसरा हैं और उनके बेटे मां-बाप को अपने पास रखने के लिए रज़ामंद नहीं.

पेशावर हाई कोर्ट में एक ऐसी अपील पर सुनवाई हुई जो बूढ़े मां-बाप की ओर से अदालत में दी गई थी.

इस अपील में बूढ़े माता-पिता ने बताया है कि उनके छह बेटे हैं, जिनमें से पांच नौकरीपेशा हैं और एक विकलांग है.

पांच बेटे अपने-अपने घरों में रहते हैं और विकलांग बेटा परिजनों के साथ है.

किराए पर रह रहे हैं मां-बाप

अपील में कहा गया है कि उन्होंने अपने बेटों की परवरिश, शिक्षा और शादी-ब्याह के लिए अपना सब कुछ बेच दिया था और अब वो ख़ुद किराए के मकान में रहते हैं जिसका वो किराया भी नहीं दे पा रहे हैं.

ये मामला अदालत में सामने आया है जिस पर जस्टिस रूहुल अमीन ने कहा कि अगर बच्चे अपने परिजनों को अपने पास नहीं रखते तो हम उन्हें अपने पास रख लेंगे.

उन बुज़ुर्ग परिजनों की ओर से वकील अफ़शां बशीर अदालत में पेश हुईं. उन्होंने बीबीसी को बताया कि आज अदालत में जब सुनवाई शुरू हुई तो उन माता-पिता का सिर्फ़ एक बेटा अदालत में पेश हुआ जबकि बाक़ी चार अदालत में नहीं थे.

उन्होंने बताया कि सुनवाई के दौरान बेटे कहा कि वो माता-पिता को हर महीने कुछ रुपये देंगे, जिस पर अदालत ने कहा कि उन्हें पैसों की नहीं मुहब्बत की ज़रूरत है.

अफ़शां बशीर एडवोकेट के मुताबिक़ बूढ़े माता-पिता इस वक़्त किराए के मकान में रहते हैं जिसका किराया कोई 4000 रुपये है और वो ये किराया अदा नहीं कर सकते हैं.

स्थानीय पत्रकार अदालत में मौजूद थे, उन्होंने बीबीसी को बताया कि अदालत ने बेटे से पूछा कि बूढ़े माता-पिता को बेसहारा क्यों छोड़ा है. अदालत ने बुज़ुर्ग महिला निसार बीबी से पूछा कि क्या आप अपने बच्चों से ख़ुश हैं, जिस पर बेटों की मां ने कहा मां को तो बच्चे मारें भी तो मां ख़फ़ा नहीं होती, और ये बातें कहते हुए निसार बीबी की आंखो में आंसू भर आए.

निसार बीबी ने अदालत में कहा कि 'उनके बेटे अपनी-अपनी बीवियों को ख़ुश रखें मगर परिजनों को बेआसरा न छोड़ें. हमने अपने बच्चों की बहुत मेहनत और मुहब्बत से परवरिश की है.'

बेटों की शादी के लिए बेच दिया था मकान

उन्होंने कहा कि उनकी शादियों के लिए अपना निजी मकान बेचा और बाक़ी जो जमा-पूंजी थी सब ख़र्च कर दी और 'अब हम दरबदर की ठोकरें खा रहे हैं.'

इस दौरान अदालत ने बेटे से कहा कि मां-बाप ने अपने बच्चों के लिए अपना मकान बेच दिया और बेटों ने मां-बाप के साथ क्या सलूक किया, सिर्फ़ हज़ार-हज़ार रुपये देने से मां-बाप के ख़र्चे पूरे नहीं होते.

अदालत ने अपनी टिप्पणी के दौरान कहा कि सरकार की ओर से माता-पिता के कल्याण के लिए जारी ऑर्डिनेंस भी क़ानून की शकल नहीं ले सका, 'क्या ये ऑर्डिनेंस सिर्फ़ लोगों को दिखाने के लिए था.'

बीते साल सितंबर में पाकिस्तान के राष्ट्रपति ने माता-पिता की सुरक्षा ऑर्डिनेंस 2021 जारी किया था जिसके तहत बच्चे परिजनों को अपने घरों से ज़बरदस्ती नहीं निकाल सकते चाहे वो अपने घर में रह रहे हों या किराए के मकान में.

इस ऑर्डिनेंस के तहत माता-पिता को घरों से बेदख़ल करने वाले बच्चों को एक साल तक क़ैद और जुर्माने की सज़ा दी जा सकती है.

अदालत ने संबंधित पुलिस थाने के एसएचओ से कहा कि आगे कि सुनवाई के दौरान सभी बेटों को अदालत में पेश किया जाए.

अफ़शां बशीर एडवोकेट ने बताया कि बुज़ुर्ग माता-पिता का एक बेटा विदेश में रहता है जबकि दो यहां नौकरी करते हैं, एक सिक्योरिटी में है और दूसरा मुंशी है.

उन्होंने बताया कि बुज़ुर्ग महिला उनके पास एक-दो बार आई थीं और अपनी परेशानी बताई थी जिसके बाद मानवीय सहानुभूति के आधार पर अदालत में अपील की.

बेटों के घर नहीं जाना चाहते हैं

इस अपील में उन्होंने संबंधित सरकारी संस्थाओं और बुज़ुर्ग माता-पिता के बेटों को एक पार्टी बनाया है. इस अपील में कहा गया है कि बुज़ुर्ग माता-पिता को एहसास प्रोग्राम और बेनज़ीर इनकम सपोर्ट प्रोग्राम और अन्य इस तरह के प्रोग्राम से भी कोई मदद नहीं की जा रही है.

अदालत में मौजूद वरिष्ठ पत्रकार आमिर जमील ने बताया कि इस अपील की सुनवाई के दौरान भी मां अपने बेटे से कह रही थी कि तुम परेशान न होना हम मजबूर हैं. इन बच्चों के पिता गौहर अली एक बुज़ुर्ग व्यक्ति हैं और जब उनसे बात करना चही तो उन्होंने कहा कि वो बात नहीं कर सकते.

उनकी पत्नी ने कहा, "उन्हें अब बच्चों के पास वापस न भेजा जाए, बल्कि उनके लिए अलग कोई इंतज़ाम अगर हो सकता है तो वो किया जाए क्योंकि अतीत में भी ऐसे ही फ़ैसले हुए और रज़ामंदी से हमें बेटों के हवाले किया गया और बाद में तमाम बेटे ज़िम्मेदारियां एक-दूसरे पर डालने लगे कि तुम अब मां-बाप को रखो."

अदालत में पेश होने वाले इस मुक़दमे की कहानी भी बॉलीवुड की फ़िल्म 'बाग़बान' से मिलती-जुलती है जिसमें बाप का किरदार अमिताभ बच्चन और मां का किरदार हेमा मालिनी ने अदा किया था.

इस फ़िल्म में भी माता-पिता के रिटायरमेंट और बेटों के नौकरीपेशा होने के बाद मां-बाप के लिए बेटों के घरों में जगह कम पड़ जाती है और बेटे आपस में एक-दूसरे पर ज़िम्मेदारियां डालते हैं कि मां-बाप को अब तुम रखो.

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