भारत दौरे पर आए जस्टिन ट्रूडो और खत्म हो गया कनाडा में उनका तिलिस्म
कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो न सिर्फ अपने देश में बल्कि देश के बाहर भी खासे पॉपुलर हैं। अगले वर्ष कनाडा में चुनाव होने वाले हैं और इससे पहले ट्रूडो के लिए एक बुरी खबर आई है। ट्रूडो की लोकप्रियता में अचानक से गिरावट दर्ज हुई है।
ओटावा। कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो न सिर्फ अपने देश में बल्कि देश के बाहर भी खासे पॉपुलर हैं। अगले वर्ष कनाडा में चुनाव होने वाले हैं और इससे पहले ट्रूडो के लिए एक बुरी खबर आई है। ट्रूडो की लोकप्रियता में अचानक से गिरावट दर्ज हुई है। फरवरी में ट्रूडो भारत आए थे और उनकी यही यात्रा उनके 'क्रश मोमेंट' के लिए खतरनाक साबित हुई और उनकी लोकप्रियता को खत्म करने में इसका अहम रोल रहा है। कनाडा में अक्टूबर 2015 में चुनाव हुए थे और चुनावों विशाल जीत दर्ज कर ट्रूडो इस देश के सबसे कम उम्र के प्रधानमंत्री बने थे।

पहली बार लोकप्रियता में इतनी गिरावट
ओटावा स्थित पोलिंग फर्म एबैकस डाटा की ओर से जस्टिन ट्रूडो पर पोल कराया गया था। इस कंपनी के चीफ एग्जिक्यूटिव डेविड कोलेटो कहते हैं, 'हमने एकदम से लोकप्रियता में यह गिरावट देखी है।' कंपनी की ओर से मार्च में पोल कराया गया था। कोलेटो के मुताबिक जब से ट्रूडो प्रधानमंत्री बने हैं उसके बाद से यह पहली बार है और अब कंजरवेटिव पार्टी थोड़ा आगे हो गई है। ट्रूडो कनाडा की लिबरल पार्टी के नेता हैं। एक और पोल सीबीसी के पोल ट्रैकर और इससे अलग दर्जन भर हुए सर्वे में साफ नजर आ रहा है कि अब कनाडा की विपक्षी कंजरर्वेटिव पार्टी, ट्रूडो की लिबरल पार्टी से आगे है। ट्रूडो की पार्टी को 33.7 प्रतिशत वोट मिले तो वहीं विपक्षी कंजरर्वेटिव पार्टी को 37.7 प्रतिशत वोट मिले हैं। इसके अलावा न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी तीसरे नंबर पर है और इसे 18.5 प्रतिशत वोट मिले हैं।

भारत यात्रा बनी उनके लिए मुसीबत
कुछ लोगों की मानें तो फरवरी में ट्रूडो की भारत यात्रा उनकी लोकप्रियंता में कमी आने की सबसे बड़ी वजह है। ट्रूडो करीब एक हफ्ते तक भारत में थे और उनकी भारत यात्रा 17 फरवरी से शुरू होकर 24 फरवरी तक चली थी। एक हफ्ते की अपनी इस यात्रा में ट्रूडो का उनके घर कनाडा में उनके ही लोगों ने काफी मजाक उड़ाया था। ट्रूडो अपनी पत्नी और तीन बच्चों के साथ भारत आए थे। यहां पर कभी उनके आउटफिट तो कभी उनके बॉलीवुड स्टाइल में डांस का कनाडा में काफी मजाक बना था। विशेषज्ञों के मुताबिक जो लोग ट्रूडो को एक प्रगतिवादी ग्लोबल नेता समझते थे और कनाडा की पहचान होने पर खुशी जाहिर करते थे, उनके लिए भारत से आने वाली ट्रूडो की तस्वीरें दिल तोड़ने वाली थीं।

बौद्धिक स्तर पर कमजोर ट्रूडो
कोलेटो के मुताबिक जब आप विदेशी मीडिया जैसे सीएनएस और बीबीसी को अपने प्रधानमंत्री का मजाक उड़ाते देखते हैं तो एक कनाडैडियन होने के नाते आपको तकलीफ होती है। ऐसे में लोग सोचने पर मजबूर हो जाते हैं कि क्या आपने वाकई प्रधानमंत्री जैसे पद के लिए योग्य व्यक्ति चुना है। कनाडा के अखबार नेशनल पोस्ट में कॉलम लिखने वाले एंड्रू कोएन ट्रूडो के अलोचक भी हैं। वह मानते हैं कि पीएम आकर्षक जरूर हैं लेकिन उनका बौद्धिक स्तर काफी हल्का है। उनका कहना है, 'छोटी चीजें पहले आकर्षक लगती हैं लेकिन बाद में इन्हीं बातों से आपको उलझन होने लगती है।' कोएन ने लिखा है भारत दौरे पर एक के बाद एक गड़बड़ और हल्की विदेश नीति की झलक देखने को मिली थी।

जसपाल अटवाल को बुलाना बना मुसीबत
इन सबसे अलग जब ट्रूडो ने 19 फरवरी को अपने मुंबई डिनर में प्रतिबंधित संगठन के आतंकी जसपाल अटवाल को भी इनवाइट किया तो उन्हें हर जगह आलोचना का सामना करना पड़ा। हालांकि इस इनवाइट को वापस ले लिया गया। इनवाइट भले ही कनाडा के उच्चायोग की तरफ से वापस ले लिया गया हो और डिनर को कैंसिल कर दिया गया हो मगर तब तक ट्रूडो के लिए राजनीतिक तौर पर अच्छा-खासा नुकसान हो चुका था। चुनाव सर्वेक्षक निक नैनोस कहते हैं कि ट्रूडो की लोकप्रियता में सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात है कि यह पूरी तरह से थोपी गई है। वह मानते हैं कि कंजरर्वेटिव और डेमोक्रेटिक पार्टी के पास नए और गैर-अनुभवी नेता हैं। ऐसे में ट्रूडो आज भी पीएम पद के लिए लोगों की पसंद हैं और उनके पास अच्छी खासी लीड है।












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