कनाडाई स्कूल में एके-47 के साथ था रेफरेंडम का प्लान, विरोध में उतरे भारतीय, तो कार्यक्रम हुआ कैंसिल
Canada Khalistan: कहावत बड़ी पुरानी है, कि सांप पालने वालों को भी नहीं छोड़ता है और खालिस्तानी, जो अपने वतन भारत से गद्दारी कर देश विरोधी हरकतें कर रहे हैं, वो भला किसी और देश के क्या हो सकते हैं। कनाडा को भी अब खालिस्तानी सांपो को पालने की सजा मिलेगी और खालिस्तानियों ने उसका टीजर दिखा दिया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, 'खालिस्तान जनमत संग्रह' के आयोजकों को रविवार को उस वक्त झटका लगा, जब कनाडाई अधिकारियों ने एक पब्लिक स्कूल में मतदान कराने की उनकी अनुमति वापस ले ली। जनमत संग्रह 10 सितंबर को ब्रिटिश कोलंबिया के सरे शहर के तमनविस सेकेंडरी स्कूल में निर्धारित किया गया था।

एके-47 के साथ था कार्यक्रम
हालांकि, सरे डिस्ट्रिक्ट स्कूल बोर्ड के एक प्रवक्ता ने एक विज्ञप्ति में कहा, कि उन्होंने "हमारे किराये समझौते का उल्लंघन किया था, इसकी वजह से एक स्कूल में आयोजित होने वाला कार्यक्रम रद्द कर दिया है।" यानि, झूठ बोला जा रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, कार्यक्रम की इजाजद रद्द करने की मुख्य वजह कार्यक्रम की प्रचार सामग्री में हथियार की तस्वीरों के साथ-साथ स्कूल की तस्वीरें भी थीं। जनमत संग्रह के पोस्टर में वास्तव में एक एके-47 मशीन गन के साथ-साथ कृपाण भी थी।
यानि, खालिस्तानियों के पोस्टर में एके-47 दिखाया गया था और जाहिर तौर पर, तस्वीरों के जरिए भारत को धमकी दी गई थी। कनाडा लगातार खालिस्तानी सांपों को दूध पिलाता और दही खिलाता रहा है। लेकिन, अब खालिस्तानी सांपों ने अपना फन दिखाना शुरू कर दिया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, बार बार कहने के बाद भी कार्यक्रम के आयोजकों ने पोस्टर्स से हथियारों की तस्वीर को नहीं हटाया गया और लगातार इन तस्वीरों को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया जाता रहा।
सरे डिस्ट्रिक्ट स्कूल बोर्ड की तरफ से जारी बयान में कहा गया है, कि "फैसले के बारे में कार्यक्रम आयोजकों को सूचित कर दिया गया है।"
बयान में आगे कहा गया है, कि "एक स्कूल जिले के रूप में, हमारा प्राथमिक मिशन हमारे छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सहायता प्रदान करना और हमारे स्कूल समुदायों के लिए एक सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना है। किराये सहित हमारे समझौते, नीतियां और दिशानिर्देश, हमारे समुदाय के लिए एक सुरक्षित वातावरण बनाने में, हमारे जिले का समर्थन करते हैं। हमारी फैसिलिटीज को किराए पर लेने वाले किसी भी व्यक्ति को इसका पालन करना होगा।"
सरे स्थित फ्रेंड्स ऑफ कनाडा एंड इंडिया फाउंडेशन के अध्यक्ष मनिंदर गिल ने अपने संगठन की ओर से "फैसले का स्वागत किया" है।
पिछले सप्ताह की शुरुआत में, जनमत संग्रह और भारत-विरोधी अभियानों के लिए एक सरकारी स्कूल का इस्तेमाल किए जाने की खबर फैलने के बाद भारतीय-कनाडाई लोगों ने स्कूल बोर्ड से शिकायत की थी, कि स्कूल परिसर के चारों ओर तलविंदर सिंह परमार के पोस्टर चिपकाए गए थे।
परमार को एयर इंडिया की उड़ान 182 पर किए गये आतंकवादी बम विस्फोट का मास्टरमाइंड माना जाता है, 23 जून 1985 को किए गये इस आतंकी हमले में 329 लोगों की जान चली गई थी।
खालिस्तानियों की इस हरकत के खिलाफ सरे में रहने वाले भारतीयों ने अपनी शिकायत में पोस्टर्स में एके-47 दिखाए जाने का भी जिक्र किया था। शिकायत में कहा गया था, कि "स्कूल बोर्ड, सरे शहर और बीसी की प्रांतीय सरकार, बंदूक हिंसा को दिन-दहाड़े बढ़ावा देने के लिए अभिभावकों के प्रति जवाबदेह है।"
इसके अलावा, पत्र में उठाए गए मुद्दों को शनिवार को सरे टॉक रेडियो के साथ एक इंटरव्यू के दौरान सरे मेयर ब्रेंडा लॉक के सामने रखा गया। मेजबान इवान स्कॉट ने कहा, कि उन्होंने "स्पष्ट किया कि शहर तमनविस सेकेंडरी स्कूल या किसी अन्य सरे-नियंत्रित परिसर के लिए योजनाबद्ध खालिस्तानी आंदोलन या जनमत संग्रह गतिविधियों का समर्थन नहीं करता है और न ही कभी किया है।"
मेयर ने आगे कहा, कि "सरे स्कूल डिस्ट्रिक्ट स्कूल परिसर का उपयोग कैसे करता है, इस पर सरे सिटी काउंसिल का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। उन्होंने एके-47 ऑटोमेटिक हथियार को दर्शाने वाले पोस्टरों की भी कड़ी निंदा की और इसे बिल्कुल अस्वीकार्य बताया।"
रिपोर्ट के मुताबिक, खालिस्तानियों ने जनमत संग्रह के लिए एक और तारीख की घोषणा नहीं की है, लेकिन सिख फॉर जस्टिस या एसएफजे के जनरल एडवोकेट गुरपतवंत पन्नून ने खालिस्तान समर्थक तत्वों से 8 सितंबर को वैंकूवर में भारत के वाणिज्य दूतावास को "बंद" करने का आह्वान किया है।












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