क्या नेपाल फिर बन सकता है हिंदू राष्ट्र, कम्युनिस्ट PM ओली ने पहली बार की पशुपतिनाथ मंदिर में पूजा
नई दिल्ली- नेपाल के कार्यकारी प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली (Nepal's PM KP Sharma Oli) ने सोमवार को सुबह-सुबह काठमांडू (Kathmandu) के प्रसिद्ध भगवान पशुपतिनाथ मंदिर (Pashupatinath Temple) में पहुंचकर सबको चौंका दिया। नेपाल के पीएम के तौर पर यह उनका दूसरा कार्यकाल है और वह इससे पहले तीन साल में कभी भी पशुपतिनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना करने के लिए नहीं आए थे। वैसे भी कम्युनिस्ट नेताओं का धार्मिक मान्यताओं से सरोकार नहीं रहता है। लेकिन, जिस तरह से एक दिन पहले ही नेपाल की सत्ताधारी नेपाल कम्यूनिस्ट पार्टी (Nepal Communist Party) के 'प्रचंड' गुट ने उन्हें पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से बाहर किया है, उनका हिंदुओं के प्रसिद्ध तीर्थस्थल पहुंकर पूजा करना नेपाल की करवट ले रही सियासत का संकेत नजर आ रहा है।

कम्युनिस्ट पीएम ओली ने की पशुपतिनाथ मंदिर में पूजा
नेपाल के कार्यकारी प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली (Nepal's PM KP Sharma Oli)अपनी पत्नी राधिका शाक्य (Radhika Shakya)के साथ स्थानीय समय के मुताबिक सोमवार सुबह करीब 8 बजे भगवान पशुपतिनाथ मंदिर (Lord Pashupatinath Temple)में पूजा-अर्चना के लिए पहुंच गए थे। पशुपतिनाथ एरिया डेवलपमेंट ट्रस्ट के अधिकारियों के मुताबिक इस मौके पर पीएम ओली ने विश्व शांति और राष्ट्र कल्याण के लिए 1,25,000 दीए जलाए। इस मौके पर ओली के साथ उनके कैबिनेट के सदस्य और संस्कृति, पर्यटन और नागरिक उड्डयन मंत्री भानू भक्त धकल भी मौजूद थे। गौरतलब है कि पशुपतिनाथ मंदिर भगवान शिव (Lord Shiva) के प्रख्यात मंदिरों में से एक है और यह हिंदुओं का बहुत ही पवित्र तीर्थस्थल है और भारत-नेपाल के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों के लिए भी यह मंदिर सदयियों से एक बहुत महत्वपूर्ण कड़ी का काम करता रहा है।

'प्रचंड' गुट को ओली का जवाब?
केपी शर्मा ओली (KP Sharma Oli)का उनके नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (nepal communist party) से निष्कासन (प्रचंड गुट ने निकाला है) के एक दिन बाद ही पशुपतिनाथ मंदिर (Pashupatinath Temple)में पूजा करने पहुंचना सामान्य घटना नहीं है। क्योंकि, एक तो कम्युनिस्ट सिद्धांतों को मानने के चलते भी उनका इस तरह से धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल होना अस्वाभाविक लगता है, दूसरा दो-दो बार प्रधानमंत्री पद पर रहने के बावजूद उन्होंने बीते तीन साल में पहले ऐसा करना कभी भी जरूरी क्यों नहीं समझा। इसलिए यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि कहीं ओली नेपाल में फिर से हिंदू राष्ट्र की बहाली के लिए कोई पैंतरा तो नहीं बदलने जा रहे? क्योंकि, राष्ट्रवाद तो पहले से भी उनका अहम मुद्दा रहा है और हाल में वह रामायण की भी एक अलग कहानी गढ़ चुके हैं।

फिर हिंदू राष्ट्र बनाने की हो रही है मांग
गौरतलब है कि नेपाल में जारी राजनीतिक संकट के बीच कुछ संगठन वहां संवैधानिक राजतंत्र और हिंदू राष्ट्र (monarchy and Hindu Rashtra)की बहाली के लिए आंदोलन भी कर रहे हैं। नेपाल की विपक्षी राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (Rastriya Prajatantra Party) उन्हीं में से एक है। इसी महीने आरपीपी के अध्यक्ष कमल थापा और पशुपति शमशेर राणा नेपाल को फिर से हिंदू राष्ट्र बनाने और संवैधानिक राजतंत्र लाने के लिए रैली भी कर चुके हैं। नेपाली संसद भंग होने से पहले भी वहां राजतंत्र के समर्थन में मार्च हो चुके हैं। गौरतलब है कि नेपाल में 2006 में हुए जन-आंदोलन के बाद साल 2008 में 240 साल पुराने राजतंत्र को खत्म करके धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र का गठन किया गया था।

राष्ट्रवाद और हिंदू राष्ट्र ओली की जुगलबंदी?
केपी ओली के बारे में कहा जाता है कि वह नेपाल को धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र बनाए जाने के हिमायती कभी नहीं रहे हैं। ऐसे में जब पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल उर्फ प्रचंड और माधव नेपाल जैसे कम्युनिस्ट नेताओं ने उनके खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया है तो राष्ट्रवाद के साथ-साथ हिंदू राष्ट्र की जुगलबंदी उनके लिए एक बेजोड़ चुनावी मुद्दा साबित हो सकता है; और पशुपतिनाथ मंदिर में धर्मपत्नी के साथ एक घंटे तक पूजा करना उसकी ओर ही इशारा हो सकता है।
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