क्या अमरत्व प्राप्त कर सकता है मनुष्य ? इस जीव में खोजा जा रहा है जवाब
मैड्रिड, 31 अगस्त: आदिकाल से इंसान अमर होने की कोशिशें कर रहा है। धार्मिक ग्रंथों में इसके लिए कठोर तप करने के वर्णन मिलते हैं। आधुनिक विज्ञान भी इसकी संभावनाओं की तलाश में जुटा हुआ है कि क्या मानव अमरत्व प्राप्त कर सकता है? क्या ऐसा हो पाना कभी संभव है ? क्योंकि, प्रयोगशाला में सिंथेटिक जीव विकसित करने की दिशा में तो वैज्ञानिक काफी आगे बढ़ चुके हैं। लेकिन, लोगों की कभी मौत ही ना हो, वह हमेशा के लिए जीवित रहे हैं, इसका कोई सुराग अबतक नहीं मिल पाया है। लेकिन, धरती पर ही एक जीव है, जिसने वैज्ञानिकों को इस सवाल का जवाब खोजने के लिए उम्मीदें जगा दी हैं।

'अमर' जेलीफिश ने वैज्ञानिकों की जगाई उम्मीद
जीवन लंबा हो, उम्र ना बढ़े और यहां तक कि अमर हो जाएं, मनुष्यों में ऐसी चाहत युगों-युगों से चली आ रही हैं। धार्मिक साहित्यों में तो ऐसी मनोकामना करने वालों की भरमार मिलती है। किसी को भगवान शिव का वरदान मिला तो कोई ब्रह्मा जी की भक्ति करके खुश हो गया और कुछ को विष्णु का आशीर्वाद मिला। लेकिन, ऐसे उदाहरण शायद ही मिलते हैं, जो सामान्य मनुष्य वाकई में अमर हो गया हो। हालांकि, हिंदू धार्मिक मान्यताओं में कुछ पौराणिक चरित्र ऐसे हुए हैं, जिनके बारे में मान्यता है कि वह आज भी जीवित हैं। उदाहरण के तौर पर इसके लिए हनुमान जी, अश्वत्थामा, परशुराम और विभीषण आदि का नाम लिया जा सकता है। धार्मिक मान्यताओं में इन्हें चिरंजीवी माना गया है। हालांकि, इसकी वैज्ञानिक पुष्टि की जाए या नकारा जाए, अभी विज्ञान भी इतना बड़ा नहीं हुआ है। लेकिन, इस गुप्त रहस्य का जवाब ढूंढ़ने के लिए वैज्ञानिकों को एक जीव में उम्मीदें जरूर दिखाई पड़ी है। यह है- जेलीफिश (टुरिटोप्सिस दोहर्नी)। यह एक ऐसा प्राणी है, जो बार-बार युवा अवस्था में लौटने में सक्षम है।

जेलीफिश के दीर्घायु होने के रहस्य में छिपा हो सकता है सुराग
स्पेन के शोधकर्ताओं ने अमर जेलीफिश के जीनोम की गुत्थी सुलझाने में कामयाबी हासिल की है। वे इसके विभिन्न जीनोमिक कुंजियों को परिभाषित कर पाए हैं, जो इसकी उम्र को मौत टालने तक बढ़ाने में सक्षम बनाते हैं। ओविएडो विश्वविद्यालय के डॉ कार्लोस लोपेज-ओटिन की अगुवाई में टीम ने इस उम्मीद में खास जेलीफिश के जेनेटिक सीक्वेंस की मैपिंग की है, जिससे इसके अनोखे रूप से दीर्घायु होने के रहस्य से पर्दा उठ सके और उसकी मदद से इंसानों की उम्र को लेकर कुछ नया सुराग खोजा जा सके। यह शोध प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल अकैडमी ऑफ साइंसेज में प्रकाशित हुआ है।

दो तरह की जेलीफिश पर रिसर्च
इस शोध के लिए वैज्ञानिकों ने जेलीफिश (टुरिटोप्सिस दोहर्नी) के साथ उसी की एक 'बहन' जेलीफिश (टुरिटोप्सिस रुब्रा) की सीक्वेंसिंग की, ताकि उन जीनों की पहचान हो सके जो दोनों में अलग हैं। टुरिटोप्सिस रुब्रा उसकी एक करीबी आनुवंशिक कजिन है, जिसमें यौन प्रजनन के बाद फिर से युवावस्था में लौटने की क्षमता का अभाव है। इस रिसर्च पेपर के पहले ऑथर मारिया पास्कुअल-टॉर्नर ने एक बयान में कहा, 'कायाकल्प और अमरता की एक ही कुंजी होने के बजाय, हमारे काम में विभिन्न तंत्र सहक्रियात्मक रूप से पाए गए और इसी के हिसाब से समग्र रूप से कार्य करना होगा। इस प्रकार से अमर जेलीफिश के सफल कायाकल्प को सुनिश्चित करने की प्रक्रिया को व्यवस्थित करना है।'

कुछ जेलीफिश अपनी उम्र घटाने में सक्षम
बाकी जेलीफिश की तरह टुरिटोप्सिस दोहर्नी लाइफ-साइकिल के दो हिस्सों से गुजरती है। एक अलैंगिक अवस्था जब समुद्र तल पर भोजन की कमी के समय जीवित रहने वाली मुख्य भूमिका निभानी है। दूसरी, जब परिस्थितियां सामान्य हों तब, जेलीफिश यौनिक तौर पर संतानें उत्पन्न करती हैं। ऑथर्स के मुताबिक कई प्रकार की जेलीफिश उम्र बढ़ने के साथ अपने उम्र को घटाने और लार्वा के चरण में लौटने में सक्षम होती है। लेकिन, ज्यादातर यौन परिपक्वता तक पहुंचकर यह क्षमता खो देती हैं।

ढलती उम्र को रोकने में मिलेगी मदद ?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस शोध से मनुष्य के अमर होने का प्रश्न किस हद तक हल हो पा रहा है। तो इसके बारे में अस्तुरियन यूनिवर्सिटी के बायोकेमिस्ट्री एंड मोलेक्युलर बायोलॉजी के प्रोफेसर कार्लोस लोपेज-ओटिन ने कहा, 'यह कार्य मानव अमरता के सपनों को हासिल करने के लिए रणनीतियों की खोज का पीछा नहीं करता है, जिसके बारे में कुछ घोषणा की जा सके, लेकिन आकर्षक सेलुलर प्लास्टिसिटी की मुख्य बातों और सीमाओं को समझने के लिए यह कुछ जीवों को पिछली स्थिति में वापस होने में सक्षम होने की इजाजत जरूर देता है। इस ज्ञान से, हम उम्र बढ़ने के साथ जुड़ी कई बीमारियों का बेहतर जवाब पाने की उम्मीद करते हैं, जो आज हम पर हावी हैं।'












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