वो एक के बाद एक नवजातों का कत्ल कर रही थी... जानिए, भारतीय मूल के डॉक्टर ने राक्षसी नर्स को कैसे पकड़ा?
British nurse found guilty: उत्तरी इंग्लैंड के एक अस्पताल में एक के बाद एक सात नवजातों को मौत के घाट उतारने वाले और कम से कम 15 नवजातों को अपना शिकार बनाने वाली खतरनाक नर्स लुसी लेटबी को भारतीय मूल के एक डॉक्टर की वजह से पकड़ा गया।
नर्स लुसी लेटबी को ब्रिटेन की एक अदालत ने सात नवजातों की हत्या करने के जुर्म में दोषी ठहराया है और अब उस अगले कोर्ट सुनवाई में उसके खिलाफ सजा का ऐलान होगा। लेकिन, ब्रिटेन में जन्मे भारतीय मूल के सलाहकार बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. रवि जयराम उन लोगों में शामिल हैं, जिन्होंने राक्षस बन चुकी इस नर्स को उसके किए की सजा दिलवाने में अहम भूमिका निभाई है।

कैसे पकड़ी गई राक्षसी नर्स?
उत्तरी इंग्लैंड के चेस्टर में स्थित, काउंटेस ऑफ चेस्टर अस्पताल के डॉ. रवि जयराम ने कहा, कि अगर नर्स लुसी लेटबी की हरकतों पर गहराई से ध्यान दिया जाता, और अगर उन्होंने जो चिंताएं जताई थीं, उसपर अस्पताल प्रशासन ने संज्ञान लिया होता, तो शायद मारे गये बच्चों में से कुछ बच्चों की जान बचाई जा सकती थी।
33 साल की नर्स लुसी लेटबी को मैनचेस्टर क्राउन कोर्ट की जूरी ने सात नवजात शिशुओं की हत्या का दोषी पाया है और छह अन्य शिशुओं से संबंधित हत्या के प्रयास के सात मामलों में भी उसे दोषी पाया गया है। उसे सोमवार को इसी अदालत में सजा सुनाई जाएगी।
डॉ. जयराम ने फैसले के बाद एक टेलीविजन इंटरव्यू में 'आईटीवी न्यूज' को बताया, कि "मैं वास्तव में मानता हूं, कि चार या पांच बच्चे ऐसे हैं, जो अभी स्कूल जा रहे होते, लेकिन वो नहीं जा रहे हैं।"
डॉ. जयराम ने कहा, कि उन्होंने "जून 2015 में तीन शिशुओं की मृत्यु के बाद पहली बार चिंता व्यक्त करना शुरू किया। जैसे ही और बच्चे गिर गए और मर गए, उनके जैसे वरिष्ठ चिकित्सकों ने लेटबी के बारे में अपनी चिंताओं को उठाने के लिए अस्पताल के अधिकारियों के साथ कई बैठकें कीं।"
आखिरकार, अप्रैल 2017 में राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (एनएचएस) ट्रस्ट ने डॉक्टरों को एक पुलिस अधिकारी से मिलने की अनुमति दी।
डॉ. जयराम ने कहा, कि महज 10 मिनट से भी कम समय में पुलिस को लगने लगा, कि इस केस में उनका शामिल होना जरूरी है और फिर कुछ ही समय में पुलिस ने अपनी जांच शुरू की और फिर नर्स लुसी लेटबी की जांच होने लगी।
यूके की क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस (सीपीएस) ने अदालत को बताया कि लेटबी ने 2015 और 2016 के बीच काउंटेस ऑफ चेस्टर अस्पताल के नवजात वार्ड में कुल 13 शिशुओं पर गुप्त रूप से हमला करने के लिए कई तरीकों का इस्तेमाल किया था।
पिछले साल शुरू हुआ मुकदमा
नर्स लुसी के खिलाफ पिछले साल अक्टूबर में ट्रायल शुरू हुआ था और डॉक्टरों ने मैनचेस्टर क्राउन कोर्ट को बताया, कि अस्पताल के डॉक्टरों ने उन शिशुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी है जो मर रहे थे या अप्रत्याशित रूप से मर रहे थे।
क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस (सीपीएस) ने बच्चों की मौत, उनपर हमला होने और हमला होने के तरीकों को लेकर कई सबूत पेश किए, जिसमें ये भी बताया गया था, कि कैसे नर्स लुसी नवजात के शरीर में होने वाले रक्त प्रवाह में हवा भरती थी, उन्हें इंसुलिन का इंजेक्शन लगा देती थी, उनके प्राइवेट पार्ट के जरिए उनके पेट में हवा भर देती थी, कैसे नवजात को जबरदस्ती हद से ज्यादा दूध पिला देती थी और इन सबसे कैसे बच्चों की दर्दनाक मौत हो जाती थी, इन सबको अदालत को बताया गया था।
सीपीएस ने जूरी को बताया, कि नर्स का इरादा बच्चों को मारने का था और वो अपने सहकर्मियों को यह विश्वास दिलाने की कोशिश करती थी, कि बच्चों की मौत प्राकृतिक हुई थी।
लेटबी को पहली बार जुलाई 2018 में गिरफ्तार किया गया था और बाद में नवंबर 2020 में उसे आरोपी करार दिया गया था।
सीपीएस मर्सी-चेशायर के मुख्य क्राउन प्रॉसीक्यूटर जोनाथन स्टोरर ने कहा, कि "यह बेहद भयावह मामला है। मुकदमे का अनुसरण करने वाले हर किसी की तरह, मैं भी लेटबी के क्रूर अपराधों से स्तब्ध हूं।"
इसके अलावा, अदालत में पेश किए गए अन्य सबूतों में मेडिकल दस्तावेज भी शामिल हैं, जिनमें नर्स द्वारा अपनी संलिप्तता छिपाने के लिए बनाए गए फर्जी नोट और अपने सहकर्मियों को धोखा देने के लिए सोशल मीडिया गतिविधि शामिल है।
नर्स लेटबी को हत्या के प्रयास के दो आरोपों में दोषी नहीं पाया गया और जूरी, जिनमें से कई इस कठिन मामले से परेशान दिख रहे थे, हत्या के प्रयास के छह अन्य मामलों में फैसले तक पहुंचने में असमर्थ रही। मुकदमे के माध्यम से, लेटबी ने दावा किया, कि अस्पताल की विफलताओं को कवर करने के लिए उस पर गलत आरोप लगाया गया है।












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