ब्रिटेन ने मान लिया था क्रैश में हो चुकी है नेताजी की मौत
लंदन। यहां नेशनल आर्काइव्स में मौजूद दस्तोवज दिखाते हैं कि ब्रिटिश खुफिया विभाग ने मान लिया था कि नेताजी सुभाष चन्द्र बोस 1942 में टोक्यो में हुए विमान हादसे में मारे गए थे। भारतीय नेता के अंतिम दिनों के दस्तावेजी सबूतों को मुहैया करा रहे एक नए वेबसाइट ने यह दावा किया है।

स्वतंत्रता सेनानी के अंतिम दिनों को पता लगाने के लिए बनाए गए इस नये वेबसाइट का मानना है कि ब्रिटिश द्वारा गलत अनुमान यह बता सकता है कि, जब 1945 में कहा गया कि बोस विमान हादसे में मारे गए तो, भारत में बड़ी संख्या में लोग इसे स्वीकार करने को तैयार क्यों नहीं थे।
आजाद हिन्द फौज का गठन करने वाले बोस जनवरी 1941 में कलकत्ता में घर में नजरबंदी से पठान के वेश में भागे थे। फिर काबुल पहुंचे और वहां से मास्को तथा बर्लिन।
वेबसाइट ‘डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डॉट बोसफाइल्स डॉट इंफो' का दावा है, ब्रिटिश खुफिया विभाग ने 25 जनवरी, 1941 में रिपोर्ट का गलत निष्कर्ष निकाला कि भारत में पुलिस की नजरों से बोस के पूरी तरह लापता होने का अर्थ उनका फर्जी पासपोर्ट के आधार पर जनवरी में सबसे पूर्वोत्तर क्षेत्रों में जाना है।
इसी आधार पर उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि वह मार्च 1942 में टोक्यो में विमान हादसे में मारे गए। हालांकि उन्होंने उसके तुरंत बाद जर्मनी से बोस का रेडियो प्रसारण सुना और तुरंत अपना मन बदल लिया।












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