दोस्ती के लिए लड़के ने लिया मगरमच्छ से पंगा, 'शैतान' के जबड़े में था लड़की का पैर और फिर...

राफ्टिंग कर रही छात्रा को मगरमच्छ ने पैर पकड़कर खींचा, दोस्त ने लगाई पानी में छलांग और फिर...

जांबिया, 3 दिसंबर: कहते हैं कि सच्चा दोस्त वही होता है, जो मुसीबत के वक्त बिना पुकारे ही आपकी मदद के लिए खड़ा हो जाए। दोस्ती का दावा करना और उसे निभाना हर किसी के वश की बात नहीं नही होती। कुछ ऐसा ही हुआ 18 साल की ब्रिटिश छात्रा एमिली ओसबोर्न स्मिथ के साथ, जिनके दोस्त उन्हें मौत के मुंह से निकाल लाए। दरअसल, एमिली अपने दोस्तों के साथ छुट्टियां मनाने के लिए जांबिया गई हुईं थी। जहां राफ्टिंग के दौरान नदी में एक मगरमच्छ उनका पैर अपने जबड़े में दबाकर उन्हें गहरे पानी में ले जाने की कोशिश करने लगा।

10 फीट लंबे मगरमच्छ ने किया हमला

10 फीट लंबे मगरमच्छ ने किया हमला

'डेली मेल' की खबर के मुताबिक, एमिली ओसबोर्न स्मिथ के पिता ब्रेंट ओसबोर्न स्मिथ ने इस रौंगटे खड़े कर देने वाली घटना के बारे में बताया है। हैंपशायर के एंडोवर शहर की रहने वालीं एमिली छुट्टियां बितान के लिए जांबिया गई हुईं थी और विक्टोरिया फॉल के नीचे जांबेजी नदी में अपने दोस्तों के साथ राफ्टिंग कर रहीं थी। एमिली के पिता ब्रेंट ओसबोर्न ने बताया, 'राफ्टिंग के दौरान मेरी बेटी नाव के एक किनारे पर अपने पैर नीद में लटकाकर बैठी थी, कि तभी करीब 10 फीट लंबा एक मगरमच्छ वहां आ गया। मगरमच्छ ने पानी में लटकते हुए मेरी बेटी के पैर देखे और उसपर हमला कर दिया।'

'वो तब तक मुक्के मारता रहा, जब तक...'

'वो तब तक मुक्के मारता रहा, जब तक...'

ब्रेंट ओसबोर्न ने आगे बताया, 'मगरमच्छ मेरी बेटी के पैर को अपने जबड़े में दबाकर गहरे पानी में ले जाने की कोशिश करने लगा। उसी वक्त उसके एक दोस्त की नजर पड़ी और उसने मेरी बेटी को बचाने के लिए बिना अपनी जान की परवाह किए पानी में छलांग लगा दी। मेरी बेटी के दोस्त ने पानी में उतरते ही मगरमच्छ के मुंह पर एक जोरदार मुक्का मारा और तब तक मुक्के मारता रहा, जब तक कि मगरमच्छ ने मेरी बेटी का पैर छोड़ नहीं दिया। इस दौरान वहां मौजूद बाकी लोग भी पानी में उतर गए और मगरमच्छ पर चारों तरफ से घूंसे बरसने लगे।'

एमिली को एयरलिफ्ट कर ले जाया गया हॉस्पिटल

एमिली को एयरलिफ्ट कर ले जाया गया हॉस्पिटल

आर्मी में मेजर रह चुके ब्रेंट ओसबोर्न ने बताया, 'मेरी बेटी के पैर से खून निकल रहा था और पानी का रंग लाल हो चुका था, लेकिन शुक्र है कि उसकी जान बच गई। पानी से बाहर आने के बाद मेरी बेटी को एयरलिफ्ट कर हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां उसकी सर्जरी हुई। मेरी बेटी काफी समझदार है और हमेशा अपना ध्यान रखती है, लेकिन उस ट्रिप पर वो पूरी तरह से राफ्टिंग कंपनी की तरफ से बताए गए निर्देशों का पालन कर रही थी। वो पानी में तैर नहीं रही थी, बल्कि केवल अपने पैर नदी में लटकाकर बैठी थी।'

'मेरी बेटी के पैर बुरी तरह जख्मी'

'मेरी बेटी के पैर बुरी तरह जख्मी'

ब्रेंट ओसबोर्न के मुताबिक, 'मगरमच्छ के हमले में मेरी बेटी के पैर बुरी तरह जख्मी हुए हैं और संक्रमण फैलने का खतरा भी बहुत ज्यादा बना हुआ है। हमारे लिए ये मानसिक तौर पर भी बहुत परेशान करने वाले पल हैं। दूसरी बड़ी समस्या ये है कि कोरोना वायरस के ओमिक्रॉन वेरिएंट की वजह से जांबिया अब 'कोविड रेड लिस्ट' में है और कई तरह के प्रतिबंध लागू हो गए हैं। इस वजह से भी अपनी बेटी को लेकर हमारा डर बना हुआ है।'

'उसने मौत को करीब से देखा है'

'उसने मौत को करीब से देखा है'

हॉस्पिटल के मुताबिक, एमिली की हालत में अब सुधार हो रहा है। एमिली के पिता ने बताया, 'जांबिया में मेरी बेटी की कई सर्जरी हो चुकी हैं, लेकिन उसे यहां यूके में एक बेहतर और गंभीर इलाज की जरूरत है। उसने मौत को करीब से देखा है।' आपको बता दें कि जांबेजी नदी विक्टोरिया फॉल के ठीक नीचे है और पर्यटकों के लिए इस नदी को काफी सुरक्षित माना जाता है। बताया जाता है कि यहां मगरमच्छ शांत जगहों पर ही रहते हैं और पर्यटकों के नजदीक वाले इलाके में नहीं जाते। इसके बावजूद एमिली पर मगरमच्छ का हमला काफी चौंकाने वाली घटना है।

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