ब्लॉग: पाकिस्तान में नेताओं पर क्यों उछल रहे हैं जूते?

Posted By: BBC Hindi
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    पिछले 16 दिन में ये तीसरी घटना है. पहला जूता गृह मंत्री एहसन इक़बाल पर अपने ही कस्बे नारोवाल में अपनी ही पार्टी के समर्थकों से बात करते हुए उछाला गया.

    दूसरी घटना विदेश मंत्री ख़्वाजा मोहम्मद आसिफ़ के साथ घटी जब एक आदमी ने ख़्वाजा साहब के अपने ही चुनाव क्षेत्र सियालकोट में उनके चेहरे पर स्याही फेंक दी.

    और फिर कल मुस्लिम लीग (एन) के नेता नवाज़ शरीफ़ पर उनके अपने ही लाहौर में एक धार्मिक मदरसे में जूता उछाल दिया गया.

    अच्छी बात है कि तमाम बड़े राजनैतिक गुटों और मीडिया ने इन हरकतों की कड़ी निंदा की है और इसे देश के राजनीतिक कल्चर का अपमान बताते हुए उसे फैलने से रोकने पर ज़ोर दिया है.

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    नवाज़ शरीफ़

    एक ही पार्टी के सभी लोग?

    तीनों घटनाओं में जो लोग पकड़े गए उनका ताल्लुक़ मौलाना ख़ादिम हुसैन रिज़वी की धार्मिक पार्टी लब्बैक या रसूल अल्लाह से बताया जा रहा है.

    इसी पार्टी ने पिछले वर्ष इस्लामाबाद में तीन हफ़्ते धरना देकर राजधानी को नाकारा कर दिया था और फिर फ़ौज की तरफ़ से सुलह सफ़ाई की कोशिशों से ये धरना ख़त्म हुआ.

    और एक अफ़सर ने धरने में शामिल लब्बैक के कई समर्थकों को वापसी के लिए हज़ार-हज़ार के नोट भी कैमरे के सामने बांटे.

    ज़रूरी नहीं कि जूता उछाल तहरीक़ के पीछे भी व्यवस्था के किसी धड़े का हाथ हो.

    नवाज़ शरीफ़ की पार्टी से अपनी नफ़रत जताने के लिए जूता उछाल तरीका धार्मिक पार्टी के जोशीलों की अपनी इजाद भी हो सकता है.

    वैसे भी लब्बैक पार्टी गवर्नर पंजाब सलमान तासीर को धर्म की तौहीन के शक में क़त्ल करने वाले पुलिसकर्मी मुमताज़ क़ादरी की फांसी से पैदा हुई.

    फांसी की सज़ा तो सुप्रीम कोर्ट ने दी थी मगर लब्बैक वालों को यक़ीन दिलाया गया कि इसकी ज़िम्मेदार नवाज़ शरीफ़ सरकार है.

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    हेलिकॉप्टर पर भी उछाले जूते

    मुमताज़ क़ादरी की फांसी के बाद जब लब्बैक के समर्थकों ने इस्लामाबाद में पार्लियामेंट के सामने पहला धरना दिया तो उन्होंने पुलिस हेलिकॉप्टर अपने सरों पर मंडराता देखकर उसकी तरफ़ भी सैकड़ों जूते उछाले थे.

    उम्मीद थी कि लब्बैक पार्टी जिसकी लीडरशिप का ताल्लुक मुसलमानों के बरेलवी समुदाय से है, पंजाब में नवाज़ शरीफ़ के बरेलवी वोट बैंक को तोड़ लेगी. इसीलिए उसे निर्वाचन आयोग से बड़ी जल्दी रजिस्ट्रेशन भी दिला दी गई.

    कई उपचुनाव में लब्बैक पार्टी ने चंद हज़ार वोट भी हासिल किए, मगर ये वोट सिर्फ़ नवाज़ शरीफ़ से दिल उचाट होने वालों के नहीं थे. हर पार्टी के वोट लब्बैक के उम्मीदवारों ने काटे.

    अब जो जूते उछालने का नया सिलसिला शुरू हुआ है, अगर ये नहीं रुकता तो फिर हर नेता को अपने सिर की फ़िक़्र करनी होगी.

    वैसे भी चुनाव का मैदान गर्म होने जा रहा है. पर मुझे एक और टेंशन है.

    कोई भी व्यक्ति तमाम इंतज़ामात के होते किसी भी नेता के चार फ़ीट नज़दीक आकर आराम से जूता उछाल सकता है या चेहरे पर स्याही फेंक सकता है, गोली भी तो मार सकता है. फिर तब क्या होगा.

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    English summary
    Blog Why are bouncing on politicians in Pakistan

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