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Blasphemy: दुनियाभर के मुस्लिम देशों में लागू है ईशनिंदा कानून, सऊदी और ईरान में मिलती है मौत की सजा

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के शहर फैसलाबाद में बुधवार को कट्टरपंथियों ने कई चर्चों को आग के हवाले कर दिया। इस दौरान ईसाइयों के घरों में पहले लूटपाट भी की गई। कट्टरपंथी समूहों का आरोप है ये चर्च ईशनिंदा को बढ़ावा दे रहे थे।

इन हालिया घटनाओं के बाद पाकिस्तान में एक बार फिर से तौहीन-ए-रिसालत यानी ईशनिंदा कानून पर बहस तेज हो गई है। पाकिस्तान में ईशनिंदा करने पर सजा-ए-मौत का प्रावधान है।

blasphemy law in which countries

पाकिस्तान पर अक्सर आरोप लगते हैं कि वहां के अल्पसंख्यकों पर ईशनिंदा के तहत केस चलाया जाता है। इस दौरान इस कठोर कानून के जरिए कइयों को सजा भी दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार 2022 में पाकिस्तान में ईशनिंदा के 35 मामले सामने आए थे जिसमें कुल 171 लोगों को अभियुक्त बनाया गया था।

ईशनिंदा क्या है?

ईशनिंदा को पाकिस्तान में तौहीन-ए-रिसालत के नाम से जाना जाता है। इस्लाम में ईशनिंदा को बेहद संवेदनशील तरीके से देखा जाता है। यह उस भाषण या व्यवहार पर लागू होता है जो किसी धर्म या उसके देवताओं, धार्मिक मान्यताओं, या धार्मिक आस्थाओं के प्रति अपमानजनक या आपत्तिजनक है।

पाकिस्तान में, 2019 में ईशनिंदा के आरोप में कम से कम 17 व्यक्तियों को मौत की सजा सुनाई गई। हालांकि एक गौर करने वाली बात ये भी है कि पाकिस्तानी सरकार ने वास्तव में कभी भी ईशनिंदा के लिए किसी को फांसी नहीं दी है।

लेकिन पाकिस्तान के अलावा कई देशों में ईशनिंदा जानलेवा हो सकता है। जैसे अफगानिस्तान, ब्रुनेई, ईरान, मॉरिटानिया, नाइजीरिया, पाकिस्तान और सऊदी अरब में - ईशनिंदा कानूनों के उल्लंघन पर मृत्युदंड की संभावना हो सकती है।

प्यू रिसर्च की एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया के 198 में से 79 देशों में धर्म के अपमान से जुड़े कानून बने हुए हैं, जहां इसका उल्लंघन करने पर सजा का प्रावधान हैं। ये कानून मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका में सबसे आम थे, जहां क्षेत्र के 20 देशों में से 18 देशों में ईशनिंदा को अपराध मानने वाले कानून हैं।

डेक्कन रिलिजियस की एक रिपोर्ट बताती है कि मुस्लिम देशों में पिछले 20 साल में ईशनिंदा के आरोप में 12 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई है।

ईशनिंदा को लेकर सबसे पहले ब्रिटेन ने वर्ष 1860 में कानून लागू किया था, जिसका विस्तार वर्ष 1927 में किया गया। इसके बाद कई ईसाई देशों और मुस्लिम देशों में इसको लेकर कानून बनाया गया।

पाकिस्तान

ब्रिटिश राज में लागू ईशनिंदा कानून को ही पाकिस्तान में लागू किया गया और फिर जिया-उल हक की सैन्य सरकार के दौरान 1980 से 1986 के बीच इसमें कई धाराएं शामिल की गईं।

सऊदी अरब

सऊदी अरब में इस्लामी कानून शरिया लागू है। यहां पर लागू शरिया कानून के तहत ईशनिंदा करने वाले लोग मुर्तद यानी धर्म को ना मानने वाले घोषित कर दिए जाते हैं जिसकी सजा मौत है। सऊदी अरब में नास्तिकता का किसी भी रूप में प्रचार करना फांसी तक पहुंचा सकता है।

ईरान

ईरान में धर्म को न मानने वाले और धर्म का अपमान करने वाले लोगों के लिए मौत की सजा का प्रावधान है। ईरान में शिया फिरके के 12 इमामों और पैगंबर इस्लाम की बेटी की निंदा करने की भी सजा मौत है।

मिस्र

मिस्र में कुछ सालों पहले ही ईशनिंदा कानून लागू हुआ है। यहां ईशनिंदा कानून का उल्लंघन करने वालों को कम से कम 6 महीने और अधिकतम पांच साल तक की सजा हो सकती है।

इंडोनेशिया

यहां ईशनिंदा कानून के तहत देश के सरकारी धर्म, इस्लाम, हिंदू धर्म, ईसाइयत, बौद्ध मत से अलग होना, या इन धर्मों का अपमान करने पर 5 साल की सजा का प्रावधान है।

इंडोनेशिया में अभिव्यक्ति की आजादी तो है लेकिन धार्मिक मामलों को छोड़कर। यहां पर नास्तिकता और नास्तिकता के प्रचार करने पर भी पाबंदी है।

मलेशिया

यहां ईशनिंदा से जुड़े मामलों में अधिकतम तीन साल की कैद व जुर्माने का प्रावधान है। यहां पर किसी दूसरे धर्म की किताबों में अल्लाह शब्द के इस्तेमाल पर भी पाबंदी है।

भारत

भारत में ईशनिंदा के लिए अलग से कोई कानून नहीं है। हालांकि भारतीय दंड संहिता की धारा 295A में धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने पर दंड का प्रावधान है। इस धारा के तहत आरोपी को 3 साल की कैद का प्रावधान है। हालांकि मुस्लिमों की मजहबी संस्था ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड भारत में ईशनिंदा कानून लाए जाने की मांग करता रहा है।

किन देशों में हटाए गए ईशनिंदा कानून?

न्यूजीलैंड में, लंबे समय से चले आ रहे ईशनिंदा कानून को 2019 में निरस्त कर दिया गया। इसे आखिरी बार 1922 से लागू किया गया था। ग्रीस ने भी मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के लंबे अभियानों के बाद 2019 में अपने ईशनिंदा कानून को निरस्त कर दिया।

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