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विज्ञान की नजर में 'विलुप्त' हो चुका था यह दुर्लभ पक्षी, अब Video कैमरे में हुआ कैद, जानिए इसके बारे में

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Black-naped Pheasant-Pigeon: पापुआ न्यू गिनी के एक द्वीप पर पक्षी विज्ञानियों और संरक्षकों को एक ऐसा पक्षी मिला है, जो 140 साल से नहीं देखा गया था। इतने समय से उसके बारे में कोई रिकॉर्ड नहीं थे। करीब एक महीने की तलाश के बाद एक खोजी अभियान दल के वीडियो कैमरे में वह पक्षी कैद हो गया है। इस पक्षी का नाम है black-naped pheasant-pigeon (ब्लैक-नैप्ड फीजेंट-पिजिन)। इसकी एक झलक पाने के लिए 12 कैमरे लगाए गए थे। खोजी अभियान दल पैकअप की तैयारी में था। निराशा में वहां से निकलने की तैयारी थी। तभी एक कैमरे को स्क्रॉल करते वक्त आखिर में इस पक्षी की झलक मिल गई। अब वाकई इसके पूरी तरह से विलुप्त हो जाने का खतरा टल सकता है, ऐसी उम्मीद वैज्ञानिको ने ही जताई है।

140 साल बाद आई यह दुर्लभ तस्वीर

140 साल बाद आई यह दुर्लभ तस्वीर

वैज्ञानिकों ने पापुआ न्यू गिनी में एक बहुत ही दुर्लभ और लुप्तप्राय पक्षी का वीडियो कैद किया है, जो वैज्ञानिकों की नजर में 140 साल पहले गुम हो चुका था। यह बहुत ही मायावी तरह का परिंदा है, जिसे black-naped pheasant-pigeon (ब्लैक-नैप्ड तीतर-कबूतर) कहा जाता है। इस पक्षी को 140 साल पहले पहली बार कैमरे में कैद किया गया था। जैसे ही यह परिंदा वीडियो कैमरे में कैद हो गया, इस काम में लगे पक्षी विज्ञानियों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। ब्लैक-नेप्ड तीतर-कबूतर को 1882 के बाद पहली बार पापुआ न्यू गिनी के फर्ग्यूसन द्वीप पर देखा गया है।

पापुआ न्यू गिनी में ही मिलता है ब्लैक-नैप्ड तीतर-कबूतर

पापुआ न्यू गिनी में ही मिलता है ब्लैक-नैप्ड तीतर-कबूतर

खोए हुए पक्षियों की तलाश में लगे एक अभियान दल की ओर से जारी एक प्रेस रिलीज के मुताबिक फर्ग्यूसन द्वीप पर वे एक महीने से काम में जुटे थे। उन्होंने एक दूर वाले इलाके में कैमरे रख छोड़े थे। संयोग से उनकी यह कोशिश कामयाब हो गई। अमेरिकी पक्षी संरक्षण के अनुसार दुर्लभ black-naped pheasant-pigeon 'एक बड़ा,जमीन पर रहने वाला कबूतर है.. ' इसकी चौड़ी और पीछे से संकुचित पूंछ होती है....' यह सिर्फ पापुआ न्यू गिनी के पूर्वी तट के द्वीप पर रहता है।

इस पक्षी की कुल चार उपप्रजातियां होती हैं

इस पक्षी की कुल चार उपप्रजातियां होती हैं

यह पक्षी पापुआ न्यू गिनी के वर्षा वनों और आसपास के द्वीपों पर पाया जाता है। यह मुख्य तौर पर पहाड़ी और निचले पर्वतीय क्षेत्रों में रहता है, लेकिन यह निचले इलाकों में भी पाया जा सकता है। इसकी कुल चार उपप्रजातियां होती हैं- व्हाइट नैप्ड तीतर कबूतर,ग्रीन-नैप्ड तीतर कबूतर, ग्रे-नैप्ड तीतर कबूतर और ब्लैक-नैप्ड तीतर कबूतर। पक्षी खोजी अभियान दल ने स्थानीय लोगों के साथ काफी संपर्क स्थापित किए थे और उन्हें इससे बहुत ही ज्यादा सहयोग मिला।

एक स्थानीय ने किया था ब्लैक-नैप्ड तीतर-कबूतर देखने का दावा

एक स्थानीय ने किया था ब्लैक-नैप्ड तीतर-कबूतर देखने का दावा

कॉर्नेल में पोस्टडॉक्टोरल शोधकर्ता और इस अभियान दल के सह-नेता जॉर्डन बोर्स्मा ने कहा, 'जब हमने कैमरा ट्रैप जुटाया, तो मुझे लगा कि ब्लैक-नैप्ड तीतर कबूतर की तस्वीर मिलने की संभावना एक फीसद से भी कम है।' उन्होंने आगे बताया, 'जब मैं फोटो स्कॉल कर रहा था, अपने कैमरे के सामने इस चिड़िया को टहलने का फोटो देखकर मैं भौंचक्का रह गया।' टीम को एक स्थानीय शिकारी ऑगस्टिन ग्रेगोरी के सहयोग से सफलता मिली है। उसने कहा था कि उसने कबूतर को देखा है और उसकी आवाज सुनी है।

3,200 फीट की ऊंचाई पर एक रिज के ऊपर लगे थे कैमरे

3,200 फीट की ऊंचाई पर एक रिज के ऊपर लगे थे कैमरे

ग्रेगरी की सलाह से ही टीम ने डुडा यूनुमा के ऊपर क्वामा नदी के पास 3,200 फीट की ऊंचाई पर एक रिज के ऊपर कैमरे लगाए थे। कैमरा लगाने वालों में से एक डोका नैसन ने कहा 'जब आखिरकार हमने ब्लैक-नैप्ड तीतर कबूतर को खोजा, यह हमारे अभियान का अंतिम समय था।' 'जब मैंने तस्वीरें देखीं, मैं अविश्वसनीय रूप से उत्साहित था।'(तस्वीरें सौजन्य: american bird conservancy वीडियो)

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12 कैमरे रख रहे थे नजर

ब्लैक-नैप्ड तीतर कबूतर के बारे में अभी तक बहुत कम जानकारी उपलब्ध है। लेकिन, वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि देखे जाने के बाद इसे विलुप्त होने से बचाया जा सकता है। 140 साल से इस पक्षी के बारे में कुछ भी नहीं लिखा जा रहा था। लेकिन, पक्षी वैज्ञानिकों और संरक्षकों के एक महीने की मेहनत से बहुत बड़ा काम हो पाया है। इस काम के लिए कुल 12 कैमरे लगाए गए थे, लेकिन एक ने ही यह कामयाबी दिलाने में मदद की।

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English summary
Black-naped Pheasant-Pigeon:This endangered rare bird has been seen on Ferguson Island of Papua New Guinea. For the first time after 140 years, the picture was captured in the camera
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