सऊदी अरब को लेकर अमेरिका की सबसे बड़ी पलटी, हथियार प्रतिबंध हटाएगा, प्रिंस सलमान के आगे क्यों झुके बाइडेन?
US-Saudi Arabia: फाइनेंशियल टाइम्स ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से खबर दी है, कि सऊदी अरब और अमेरिका के बीच संबंधों में सुधार होने की उम्मीद काफी बढ़ गई है, क्योंकि अमेरिका, आने वाले समय में सऊदी अरब को आक्रामक हथियारों की बिक्री पर लगाए गये प्रतिबंध को हटाने पर विचार कर रहा है।
जो बाइडेन, जिन्होंने साढ़े तीन साल पहले राष्ट्रपति का पद संभाला था, उन्होंने सत्ता में आने के बाद सऊदी अरब को एक 'अछूत' देश बनाने की कोशिश की थी और सऊदी मूल के अमेरिकी पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या के लिए प्रिंस सलमान को जिम्मेदार ठहराया था, लेकिन अब वही जो बाइडेन, प्रिंस सलमान के आगे नतमस्तक नजर आ रहे हैं।

बाइडेन ने सत्ता में आने के बाद सऊदी अरब को क्रिटिकल हथियारों की बिक्री पर रोक लगा दी थी और कसम खाई थी, कि जमाल खशोगी की हत्या में जो भी जिम्मेदार हैं, उन्हें इंसाफ के कटघरे में लाया जाएगा, लेकिन जो बाइडेन की कसम टूट चुकी है, क्योंकि पिछले डेढ़ सालों में अमेरिका, बार बार सऊदी अरब के आगे झुकता और मनुहार करता नजर आया है।
सऊदी के आगे क्यों झुके जो बाइडेन?
बाइडेन ने यमन में नागरिकों के खिलाफ हमलों में अमेरिका निर्मित हथियारों के कथित उपयोग के लिए सऊदी अरब और उसके वास्तविक शासक क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान को दंडित करने का वादा किया था।
सऊदी अरब नौ साल पहले ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों को कंट्रोल करने के लिए यमन संघर्ष में शामिल हुआ था, लेकिन काफी हद तक असफल रहा। 2022 में, संयुक्त राष्ट्र ने वहां एक शांति समझौता किया और रियाद ने तब से बड़े पैमाने पर खुद को संघर्ष में शामिल करने से परहेज किया है।
फाइनेंशियल टाइम्स के मुताबिक, अमेरिका ने पहले ही देश के सबसे बड़े हथियार निर्यात स्थलों में से एक और पश्चिम एशिया में पारंपरिक सहयोगी सऊदी अरब पर प्रतिबंध हटाने का अपना इरादा बता दिया है।
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, आने वाले हफ्तों में कई द्विपक्षीय सौदों को अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है, जिसमें एक रक्षा समझौता और राज्य के नागरिक परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिकी सहयोग शामिल है।
वहीं, माना जा रहा है, कि अमेरिका इन सौदों के जरिए सऊदी अरब और इजराइल के बीच के रिश्ते को भी सामान्य करना चाहता है, खसकर सिविल न्यूक्लियर डील इसमें काफी अहम भूमिका निभा सकता है। हालांकि, फाइनेंशियल टाइम्स के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारी ने कहा, कि दोनों मामले आपस में जुड़े हुए नहीं हैं।
आपको बता दें, कि 7 अक्टूबर को दक्षिणी इजराइल पर हमास के हमले के बाद जब इजराइल ने गाजा पट्टी में युद्ध शुरू किया, उसके बाद इजराइल और सऊदी अरब के बीच रिश्तों को सामान्य करने की प्रक्रिया थम गई।
हालाकि, सऊदी अरब ने संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता वाली यमनी शांति प्रक्रिया से अभी भी खुद को अटैच कर रखा है। यहां तक कि रियाद ने हूती विद्रोहियों के खिलाफ अमेरिकी नेतृत्व वाली समुद्री टास्क फोर्स में शामिल होने से भी परहेज किया है, ताकि ईरानी प्रॉक्सी को स्पष्ट संदेश भेजा जा सके, कि वह उन्हें नाराज नहीं करना चाहता था।
वहीं, व्हाइट हाउस ने 20 मई को एक बयान में कहा था, कि अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जैक सुलिवन सऊदी अरब की यात्रा करने वाले हैं और माना जा रहा है, कि इस यात्रा के दौरान दोनों देश, एफ-35 लड़ाकू विमान को लेकर आखिरी समझौते तक पहुंच जाएंगे। जबकि, व्हाइट हाउस के नेशनल सिक्योरिटी के प्रवक्ता जॉन किर्बी ने कहा, कि "दोनों देश समझौते के इतने करीब आ गये हैं, जितने करीब पहले कभी नहीं पहुंचे थे" और द्विपक्षीय समझौता होना 'करीब करीब तय' हो गया है।
हालांकि, जॉन किर्बी ने संभावित समझौते को लेकर कोई खास जानकारी नहीं दी है, लेकिन ऐसी रिपोर्ट्स हैं, कि यदि सऊदी अरब और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय संबंधों पर हस्ताक्षर किए जाते हैं, तो अमेरिका की कोशिश सऊदी से समझौते के बदले एक औपचारिक गारंटी लेने की होगी, कि वो चीन से किसी भी तरह का हथियार ना खरीदे या फिर उसने चीन से हथियारों को लेकर जो सौदा किया है, वो उसे सस्पेंड कर दे।
अमेरिका के एक अधिकारी के मुताबिक, इस समझौते के तहत अमेरिका, सऊदी अरब को पांचवी पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमान F-35 बेचने के अलावा कई तरह के और रक्षा समझौते के लिए तैयार हो सकता है।












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