PM मोदी के ‘दोस्त’ की इजराइल में बन सकती है सरकार, बेंजामिन नेतन्याहू फिर बन सकते हैं प्रधानमंत्री
तेल अवीव, 14 जूनः इजराइल में प्रधानमंत्री नेफ्ताली बेनेट की गद्दी खतरे में है। उनकी गठबंधन सरकार पर खतरा मंडरा रहा है। अल्पमत में चल रही उनकी सरकार कभी भी गिर सकती है। बेनेट की सरकार के पास विपक्ष से मात्र एक सीट अधिक थी लेकिन अब सरकार में सहयोगी रही एक पार्टी ने गठबंधन से बाहर आने का फैसला किया है। ऐसे में दावे किए जा रहे हैं कि एकबार फिर से इजराइल में सत्ता की कुर्सी पूर्व प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को मिल सकती है।

अरब समर्थक पार्टी नाराज
इजराइल में दो साल में चार सरकारें अल्पमत में रही हैं। टाइम्स ऑफ इजराइल की एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बेनेट का बयान सामने आया है। बेनेट के मुताबिक अगले एक या दो सप्ताह में यह तय हो जाएगा कि उनकी सरकार रहेगी या गिर जाएगी। रिपोर्ट के मुताबिक 8 पार्टियों के गठबंधन में शामिल अरब समर्थक पार्टी, यूनाइटेड अरब लिस्ट फिलिस्तीन के मामले पर बेनेट सरकार से नाराज है।

डेमोग्राफी में चेंज का लगाया आरोप
फिलिस्तीनी बस्तियों को लेकर, अरब लिस्ट पार्टी का पहले भी सरकार से टकराव रह चुका है। अरब लिस्ट पार्टी का आरोप है कि बेनेट सरकार फिलिस्तीन बस्तियों में डेमोग्राफी में बदलाव करने में लगी हुई है। यह सरकार फिलिस्तीन बस्तियों में यहूदियों को जगह दे रही है। पार्टी का कहना है कि यह अरब मूल के लोगों के साथ नाइंसाफी है।

सांसद ने पार्टी छोड़ी
सोमवार को बेनेट को एक और बड़ा झटका लगा है। यामिना पार्टी के सांसद नीर ओरबाक ने गठबंधन से अलग होने का ऐलान किया है। इसके साथ ही सरकार 59 सीटों के साथ अल्पमत में आ गई। नीर ओरबाक का आरोप है कि प्रधानमंत्री बेनेट अरब पार्टी के सामने घुटने टेक रहे हैं।

फिर पीएम बन सकते हैं नेतन्याहू
टाइम्स ऑफ इजराइल की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पूर्व प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू एक बार फिर से सरकार बना सकते हैं। इसके लिए उन्हें सिर्फ दो सीटों का इंतजाम करना होगा। नेतन्याहू 12 साल प्रधानमंत्री रह चुके हैं। अगर बेनेट सरकार गिर जाती है तो दो रास्ते होंगे। पहला- एक नए चुनाव कराने होंगे। दूसरा- नेतन्याहू बहुमत का फिर जुगाड़ करें और सरकार बना लें।

4 चुनावों में नहीं मिला किसी को बहुमत
2019 से लेकर अब तक इजराइल में अब तक 4 आम चुनाव हो चुके हैं लेकिन किसी भी चुनाव में किसी भी दल को बहुमत नहीं मिला। आखिरी चुनाव मार्च 2021 में हुए थे। इसके बाद भी कोई भी दल बहुमत नहीं साबित कर रहा था तो बेंजामिन नेतान्याहू पीएम बने थे। इसके बाद 13 जून 2021 को नफ्ताली बेनेट ने सदन में बहुमत साबित किया और पीएम बने।

इजराइल की राजनीति में कुछ भी तय नहीं
इजराइल की राजनीति पर नजर रखने वाले लोगों ने उस वक्त कहा था कि यह जबरदस्ती का गठबंधन है और यह अधिक दिनों तक नहीं चल सकता है और अब ऐसा सच होता दिख रहा है। पॉलिटिकल एक्सपर्ट जैमनी मेरोज के मुताबिक इजराइल की सियासत में कुछ भी तय नहीं है। इससे दुनिया में देश की इमेज पर भी असर पड़ता है। बेनेट उन्हीं नेतन्याहू को कुर्सी से हटाकर प्रधानमंत्री बने थे, जिन्हें उनका राजनीतिक गुरू माना जाता है।

क्या आयेगा बेंजामिन नेतान्याहू युग?
यामिनी पार्टी के बेनेट को वैसे तो सितंबर 2023 तक प्रधानमंत्री रहना है। इसके बाद वो यह पद सहयोगी येर लैपिड को सौंप देंगे। यह गठबंधन की शर्तों में शामिल है। नेतन्याहू इसे सत्ता के लिए सौदेबाजी बता चुके हैं, लेकिन उनके खिलाफ भी भ्रष्टाचार के केस चल रहे हैं। बता दें कि इजरायली संसद में नेतान्याहू की पार्टी लिकुड के सबसे अधिक 30 सांसद हैं। ऐसे में एक्सपर्ट्स का कहना है कि इजरायली राजनीति में एक बार फिर बेंजामिन नेतान्याहू का युग संभव है।












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