Beer Price Hike: शराब के शौकीनों के लिए बुरी खबर, भारत में महंगी होगी 'Beer'! दो वजहों ने बढ़ाई लागत और खर्च
Beer Price Hike: अमेरिका-इजरायल और ईरान की जंग मिडिल ईस्ट से निकलकर यूरोप और एशिया तक पहुंच गई है। भले ही यहां सीधे हमले नहीं हो रहे हैं लेकिन गैस और तेल के दाम ने एक अलग जंग छेड़ दी है। भारत में सरकार गैस आपूर्ति के दावे कर रही है लेकिन गैस एजेंसियों के बाहर लगी लाइन इसकी गवाही खुद दे रही हैं। वहीं, अब ये जंग एल्कोहल इंडस्ट्री को भी अपनी जद में लेने के लिए तैयार है। खबर आई है कि भारत में जल्द बीयर के दाम बढ़ सकते हैं। अब आप सोच रहे होंगे कि मैन्युफैक्चरिंग भारत में हो रही है तो दाम किस बात के लिए बढ़ रहे हैं। चलिए इसे समझते हैं।
बीयर कंपनियों की बढ़ रही टेंशन
भारत में काम कर रहे प्रमुख वैश्विक ब्रुअर्स ने इस नई चुनौती पर चिंता व्यक्त की है। 'ब्रुअर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया', जो हीनेकेन, एनह्यूसर-बुश इनबेव और कार्लस्बर्ग जैसी कंपनियों का प्रतिनिधित्व करता है, उसके मुताबिक, कांच की बोतलों की कीमतें लगभग 20% बढ़ गई हैं। इसके अलावा, कागज के डिब्बों और लेबल, टेप जैसी अन्य पैकेजिंग सामग्रियों की दरें भी दोगुनी हो गई हैं, जिससे लागत में काफी इजाफा हुआ है।

एल्यूमिनियम भी बना दाम बढ़ने का कारण
बीयर कैन जिसे हम उंगली से उठाकर खोलते हैं और मुंह से लगाकर पीते हैं, वह एल्युमिनियम से बनती है। एल्युमिनियम के लिए भारत मुख्त: खाड़ी देशों पर निर्भर करता है। जैसा कि आपको पता है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जंग का थिएटर बना हुआ है। ऐसे में गैस-तेल के साथ-साथ एल्युमिनियम की भी किल्लत होने लगी है। चूंकि यह रोजमर्रा की जिंदगी से उतना नहीं जुड़ा है तो इस पर असर देर से पड़ रहा है।
पीक सीजन से पहले बड़ा झटका
यह संकट ऐसे समय में आया है जब भारत में गर्मियों का पीक सीजन आ रहा है, जब बीयर की बिक्री सामान्य रूप से बढ़ जाती है। गैस की कमी के कारण, भट्टियों और उत्पादन लाइनों को चलाने के लिए आवश्यक ईंधन न मिलना जैसे समस्याओं ने कई कांच की बोतल निर्माताओं को आंशिक या पूरी तरह से संचालन बंद करने के लिए मजबूर किया है। साथ ही बीयर कैन का निर्माण भी अधर में लटकता दिख रहा है।
कीमतें बढ़ाने की तैयारी
रॉयटर्स में छपी रिपोर्ट के मुताबिक एसोसिएशन के महानिदेशक विनोद गिरी ने बताया, "हम 12-15% की सीमा में कीमतों में बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं।" उन्होंने कहा कि बढ़ती उत्पादन लागत कुछ संचालनों को अस्थिर बना रही है। कुल मिलाकर गैस और एल्यूमिनियम के भारत पहुंचने में हो रही दिक्कतों की वजह से अब आपकी ठंडी बीयर गर्म हो सकती है।
तेजी से बढ़ता भारतीय बीयर बाजार
ग्रैंड व्यू रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में भारतीय बीयर बाजार का मूल्य $7.8 बिलियन था और 2030 तक इसके दोगुना होने की उम्मीद है। एसोसिएशन ने बताया कि हीनेकेन अकेले इस बाजार का लगभग आधा हिस्सा रखता है, जबकि एबी इनबेव और कार्लस्बर्ग 19-19% बाजार हिस्सेदारी रखते हैं। इस क्षेत्र में बीरा और सिम्बा जैसे कई छोटे खिलाड़ी भी एक्टिव हैं।
कीमत बढ़ाने में सरकारी नियम अड़चन
भारत में शराब क्षेत्र अत्यधिक विनियमित है, और खुदरा (रिटेल) कीमतों में वृद्धि के लिए आमतौर सरकार की रजामंदी लगती है। देश के 28 राज्यों में से लगभग दो-तिहाई को पैसा बढ़ाने के लिए राजी करना पड़ता है। लिहाजा एसोसिएशन ने जानकारी दी है कि, "वे राज्य जो कीमतों में बढ़ोतरी की अनुमति नहीं देते हैं, वहां ब्रुअर्स को आपूर्ति बनाए रखने में कठिनाई हो सकती है।"
पूरे इंडस्ट्री पर असर
शराब कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाली 'कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन अल्कोहलिक बेवरेज कंपनीज' (CIABC) ने भी कई राज्यों को पत्र लिखकर बढ़ती माल ढुलाई, लॉजिस्टिक्स और इनपुट लागतों को समायोजित करने के लिए मूल्य समायोजन की मांग की है। यह बताता है कि यह संकट केवल बड़ी ब्रुअरीज तक ही सीमित नहीं है बल्कि पूरे उद्योग को प्रभावित कर रहा है, जिसमें छोटी घरेलू कंपनियां भी शामिल हैं।
कांच उद्योग पर सीधा असर
कांच निर्माण उद्योग इस संकट से सीधे प्रभावित हो रहा है। उत्तरी उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद में स्थित फाइन आर्ट ग्लास वर्क्स के सीईओ नितिन अग्रवाल ने बताया कि गैस की कमी के कारण उन्हें अपने कांच की बोतल बनाने वाले कारखाने में उत्पादन में 40% की कटौती करनी पड़ी है। उनके ग्राहकों में कई शराब कंपनियों के साथ-साथ जूस और केचप की बोतलें बनाने वाले भी शामिल हैं। लिहाजा इन प्रोडक्ट्स के भी दाम आने वाले दिनों में बढ़ सकते हैं।
उत्पादन घटा, कीमतें बढ़ीं
अग्रवाल ने पुष्टि की, "हमने उत्पादन में कटौती की है और कीमतों में 17-18% की वृद्धि की है।" साथ ही इनपुट लागत में बढ़ोतरी का बोझ ग्राहकों तक पहुंचने की संभावना है। इसी बीच बोतलों की आपूर्ति में अड़चन भी दाम बढ़ने का इशारा कर रही है।
ढक्कन भी होगा महंगा
यह संकट अब केवल बीयर उद्योग तक ही सीमित नहीं है, बल्कि अन्य क्षेत्रों में भी फैल रहा है। भारत के $5 बिलियन के बोतल बंद पानी के बाजार पर भी इसका असर पड़ा है, जहां प्लास्टिक की बोतलों और ढक्कनों की बढ़ती दरों के कारण कुछ उत्पादकों ने कीमतों में 11% का उछाल आया है।
भारत की कतर पर भारी निर्भरता
प्राकृतिक गैस का दुनिया का चौथा सबसे बड़ा आयातक होने के कारण भारत ईंधन उपलब्धता के मामले में बेहद संवेदनशील है। देश अपनी गैस आपूर्ति का लगभग 40% कतर से प्राप्त करता है और डिलीवरी के लिए मिडिल ईस्ट पर काफी हद तक निर्भर करता है। ईरान और कतर के बीच बढ़ते तनाव ने गैस को भारत पहुंचना मुश्किल कर दिया है, जिससे भारतीय निर्माताओं के लिए स्थिति और बिगड़ गई है।
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