हजारों BNP, इस्लामी कार्यकर्ता जेल से रिहा, ढाका की सड़कों पर पुलिस नहीं; बांग्लादेश के ताजा हालात जानिए

Bangladesh News: बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने सोमवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था और अब वो भारत में हैं और माना जा रहा है, कि वो लंदन शिफ्ट हो सकती हैं। इसके साथ ही विपक्ष के मुताबिक, 15 साल से चले आ रहे उनके "सत्तावादी शासन" का अंत हो गया है।

सेना प्रमुख जनरल वकर-उज-जमान ने सोमवार को एक बयान में कहा है, कि अंतरिम सरकार तत्काल प्रभाव से कार्यभार संभालेगी। उन्होंने नागरिकों से सेना पर भरोसा बनाए रखने को कहा। लेकिन, बांग्लादेश के ताजा हालात क्या हैं, आइये जानते हैं।

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ढाका की सड़कों पर ट्रैफिक पुलिस नहीं

एक दिन की अशांति और एक रात के तनाव के बाद मंगलवार की सुबह ढाका में स्थिति काफी हद तक शांत दिख रही है। हालांकि, सोमवार को देश के विभिन्न हिस्सों में पुलिस चौकियों में आग लगने की घटनाओं के बाद पुलिस चिंतित है। मंगलवार को राजधानी की अधिकांश सड़कों पर यातायात पुलिस नहीं है। वहीं, सेना के जवान और छात्र ट्रैफिक को नियंत्रित करते हुए सड़कों पर देखे जा रहे हैं।

ढाका पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, मंगलवार को सुबह करीब 10:30 बजे राजधानी के बिजॉय सरानी, ​​जहांगीर गेट, फार्मगेट, कारवां बाजार, बांग्ला मोटर और शाहबाग चौराहे पर ऐसी ही तस्वीर देखी जा सकती है। बसें और अन्य सार्वजनिक परिवहन सड़कों पर हैं और व्यापारी दुकानें खोल रहे हैं। सरकारी वाहन दफ्तरों की ओर जाते देखे गये हैं।

दूध के ट्रक, सब्जी के वैन और मिनी ट्रक सड़कों पर देखे गए हैं। साथ ही कई निजी कंपनियों के स्टाफ बसें और माइक्रोबस भी सड़कों पर दिखाई दिए हैं। सरकारी कार्यालयों के लिए शटल सेवा चल रही है।

सड़कों पर कई बैटरी से चलने वाले रिक्शा भी देखे गए। हालांकि, पुलिस कहीं नहीं दिख रही है।

सेना के जवानों ने प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास गणभवन के सामने भी मोर्चा संभाल लिया है। हालांकि, अगरगांव लिंक रोड की ओर जाने वाले चौराहे पर कोई पुलिस नहीं है। अगरगांव से वाहनों की भीड़ के कारण जहांगीर गेट से यातायात रुक गया। कुछ देर बाद जहांगीर गेट से यातायात ने आगे बढ़ना शुरू कर दिया और अगरगांव से यातायात रुक गया।

ढाका उत्तर नगर निगम के सफाईकर्मियों को सड़कों पर अवामी लीग नेताओं की पोस्टर और बैनर हटाते देखा जा सकता था, जिन्हें सोमवार को उत्तेजित लोगों ने फाड़ दिया था।

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हजारों BNP-जमात के कार्यकर्ताओं को बेल

वहीं, ढाका की एक अदालत ने आरक्षण सुधार आंदोलन के नाम पर तोड़फोड़ के मामले में बीएनपी-जमात के 1,000 से ज्यादा नेताओं और कार्यकर्ताओं को जमानत दे दी है, जिनमें बीएनपी के स्थायी समिति के सदस्य और पूर्व मंत्री अमीर खोसरू महमूद चौधरी भी शामिल हैं।

मंगलवार को ढाका मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट में जमानत याचिका दायर की गई थी। सुनवाई के बाद जज ने उन्हें जमानत दे दी। नामी आरोपियों में बीएनपी के वरिष्ठ संयुक्त महासचिव रूहुल कबीर रिजवी और जमात-ए-इस्लामी के महासचिव मिया गुलाम परवार, बीएनपी अध्यक्ष के विशेष सहायक शम्सुर रहमान उर्फ ​​शिमुल बिस्वास, ढाका मेट्रोपोलिटन उत्तर बीएनपी के संयोजक सैफुल आलम निरोब शामिल हैं।

कर्मचारियों में डर का माहौल

शेख हसीना सरकार के पतन के बाद पहले दिन मंगलवार को सचिवालय में तनावपूर्ण माहौल देखा जा रहा है। मंत्रालय के दफ्तरों में अधिकारियों और कर्मचारियों की उपस्थिति काफी कम रही और मंत्री और सांसद खास तौर पर अनुपस्थित रहे। जो लोग काम पर आए भी, वे भय और चिंता से भरे हुए थे।

सुबह करीब 11:30 बजे सचिवालय में काफी तनाव देखा गया। जबकि पिछली रात बंगबंधु एवेन्यू पर स्थित आवामी लीग के केंद्रीय कार्यालय में आग लगा दी गई, लूटपाट और तोड़फोड़ की गई। सुबह आवामी लीग के दफ्तर से आग की गंध सचिवालय से आ रही थी, जिससे अधिकारियों और कर्मचारियों में भय बढ़ा हुआ है। वहीं, बहुत से लोगों को डरे हुए सचिवालय से बाहर निकलते देखा गया है।

ढाका ट्रिब्यून के मुताबिक, शेख हसीना के इस्तीफे के बाद बांग्लादेश में लूटपाट, बर्बरता और हिंसा की घटनाएं हुई हैं, जिसमें हत्याएं भी शामिल हैं। रात भर हिु्दू अल्पसंख्यक डर के साए में रहे और भारतीय विेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी कहा है, कि बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमले किए गये हैं।

बांग्लादेश के राजनीतिक एक्सपर्ट्स का कहना है, कि आगजनी और बड़े पैमाने पर लूटपाट जैसी हरकतें करने वाले लोग स्पष्ट रूप से असहमति या सविनय अवज्ञा आंदोलन की सीमा से बहुत आगे निकल गए हैं। राजनीतिक विरोधियों के घरों और कार्यालयों में आग लगाना और उन पर हमला करना और उन्हें मारना, बिल्कुल भी उचित नहीं है।

ढाका ट्रिब्यून की संपादकीय में लिखा गया है, कि बांग्लादेश के विभिन्न हिस्सों में अल्पसंख्यक समुदायों पर हमले की खबरें और भी चिंताजनक हैं। उन्हें सुरक्षा दी जानी चाहिए। संपादकीय में कहा गया है, कि यह सुरक्षा प्रदान करना और यह सुनिश्चित करना सशस्त्र बलों का काम है, कि चीजें आगे नियंत्रण से बाहर न हों। निश्चित रूप से इस स्तर पर राष्ट्रीय मामलों में उनकी भागीदारी का यही मुख्य उद्देश्य है।

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