Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

बांग्लादेश बन रहा भारत के लिए नया मालदीव? पिनाकी भट्टाचार्य को मोहम्मद मुइज्जू की तरह मिलेगी कामयाबी?

Bangladesh India Out Campaign Impact: बांग्लादेश की प्रधान मंत्री शेख हसीना (Sheikh Hasina) ने इस साल की शुरुआत में सत्ता में लगातार चौथा कार्यकाल हासिल कर लिया है, जिससे विपक्षी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) को बांग्लादेश राष्ट्रीय संसद भवन में एक बार फिर से हार का सामना करना पड़ा है।

हमेशा की तरह विपक्षी दल ने चुनाव में फ्लॉप प्रदर्शन का आरोप हसीना सरकार पर नहीं लगाया, बल्कि विपक्षी नेताओं ने नई दिल्ली पर 7 जनवरी के चुनावों में हसीना सरकार को बनाए रखने के लिए, अपने राजनयिक प्रभाव का उपयोग करने का आरोप लगाया।

Bangladesh India Out Campaign Impact

बांग्लादेश की विपक्षी पार्टियों का कहना है, कि चुनाव में भारत ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल किया, जिसकी वजह से शेख हसीना एक बार फिर से प्रधानमंत्री बनने में कामयाब हुई। बांग्लादेश के विपक्षी नेताओं का ये एक ऐसा दावा है, जिसे भारत ने कई बार खारिज किया है।

बांग्लादेश में क्यों चला इंडिया ऑउट कैम्पेन?

बार बार चुनावी हार से बौखलाए बांग्लादेश के विपक्षी नेताओं की इसी बौखलाहट ने उन्हें मालवीद के 'इंडिया ऑउट' कैम्पेन को बांग्लादेश में भी लागू करने का ख्याल दिया। और मोहम्मद मुइज्जू की तरह बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी यानि बीएनपी ने भी बांग्लादेश में भारत विरोधी अभियान शुरू कर दिया।

लेकिन, यहां एक चीज पर ध्यान देना जरूरी है, कि मालदीव की आबादी सिर्फ 5 लाख है और चीन समर्थक मोहम्मद मुइज्जू सिर्फ 10 हजार वोट से जीते हैं और मोहम्मद मुइज्जू की जीत के पीछे सिर्फ इंडिया ऑउट कैम्पेन ही नहीं, बल्कि पिछली सरकार की नाकामयाबियां शामिल थीं।

द फ्रंटलाइन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बीएनपी नेताओं ने अपने वोटरों को भारत के उत्पादों का बहिष्कार करने के लिए उकसाना शुरू किया है और इसके लिए वो दूसरे देशों के एंटी-इंडिया एजेंडा वाले प्रभावशाली लोगों की सेवाएं लेनी शुरू कर दी है।

रिपोर्ट के मुताबिक, पेरिस में रहने वाले निर्वासित बांग्लादेशी डॉक्टर और प्रभावशाली सोशल मीडिया कार्यकर्ता पिनाकी भट्टाचार्य ने जनवरी के मध्य में "इंडिया आउट" अभियान की घोषणा की। उन्होंने अपने लाखों अनुयायियों से बांग्लादेश और विदेशों में भारतीय उत्पाद नहीं खरीदने का आग्रह किया। भट्टाचार्य ने "बांग्लादेश के घरेलू मामलों में भारत के लगातार हस्तक्षेप" का विरोध करने का दावा किया है।

Bangladesh India Out Campaign Impact

ऐसी रिपोर्ट है, कि पिनाकी भट्टाचार्य बांग्लादेश में काफी लोकप्रिय हो रहे हैं, हालांकि कार्रवाई के डर से वो बांग्लादेश से फरार ही रहेंगे।

बांग्लादेश में भारत विरोधी अभियान भड़काना कोई नई बात नहीं है। लेकिन, मावदीव के राष्ट्रपति चुनावों में मुइज्जू की सफलता ने बांग्लादेश के विपक्षी नेताओं को उत्साहित कर दिया है।

हाल ही में, बीएनपी के वरिष्ठ नेता रूहुल कबीर रिज़वी ने अपने कंधों पर पहना हुआ शॉल फेंक दिया। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने जो शॉल फेंकी, वह एक मशहूर कश्मीरी शॉल थी। इससे सोशल मीडिया पर युद्ध छिड़ गया और कई विपक्षी नेताओं ने भारतीय सामानों का बहिष्कार करने का वीडियो शेयर किया। भारत के खिलाफ कई हैशटैग चलाए गये।

Bangladesh India Out Campaign Impact

भारत और बांग्लादेश में व्यापार संबंध कैसे हैं?

बांग्लादेश, दक्षिण एशिया में भारत का सबसे बड़ा व्यापार भागीदार है और भारत, एशिया में बांग्लादेश का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है।

भारत, एशिया में बांग्लादेश का सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य है और वित्त वर्ष 2022-23 में बांग्लादेश ने भारत में करीब 2 अरब डॉलर के सामान बेचे हैं। जबकि, वित्त वर्ष 2022-23 में दोनों देशों के बीच का कुल द्विपक्षीय काराबोर 15.9 अरब डॉलर का रहा है।

बांग्लादेश में भारत मसाले, कपास, अनाज, आसवन उत्पाद, प्लास्टिक, चीनी और चीनी कन्फेक्शनरी, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, कॉफी, चाय, मेट, लोहे और स्टील बेचता है। जबकि, बांग्लादेश भारी मात्रा में कपड़ों की सप्लाई भारत में करता है।

इस साल की शुरुआत में फरवरी में, ढाका में भारतीय उच्चायुक्त प्रणय कुमार वर्मा ने कहा था, कि भारत एशिया में बांग्लादेश का सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य है। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग की वास्तविक क्षमता को उजागर करने में मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए, वर्मा ने कहा, कि बेहतर कनेक्टिविटी लिंक और भारतीय रुपये में व्यापार जैसे नए उपाय, भारत में बांग्लादेशी निर्यात को और बढ़ाएंगे।

Bangladesh India Out Campaign Impact

बांग्लादेश के लिए कितना महत्वपूर्ण है भारत?

1947 में हुए बंटवारे से पहले बांग्लादेश भी भारत का ही हिस्सा था, जो उसके बाद पूर्वी पाकिस्तान बना और 1971 में भारत की मदद से बांग्लादेश बना। लिहाजा, भारत और बांग्लादेश इतिहास, भाषा, संस्कृति और कई अन्य समानताओं के बंधन साझा करते हैं। इसके अलावा, ढाका अपनी अन्य जरूरतों के लिए भारत पर काफी निर्भर है। यह डीजल, गैस और बिजली जैसी ऊर्जा का आयात भी भारत से ही करता है।

विदेश मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, बांग्लादेश फिलहाल भारत से 1160 मेगावाट बिजली आयात कर रहा है।

इसके अलावा, भारत ने सड़क, रेलवे, शिपिंग और बंदरगाहों सहित विभिन्न क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए पिछले 8 वर्षों में बांग्लादेश को लगभग 8 अरब अमेरिकी डॉलर की 4 लाइन ऑफ क्रेडिट (एलओसी) प्रदान की है।

इसके अलावा, भारत सरकार बांग्लादेश को विभिन्न बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए अनुदान सहायता भी प्रदान कर रही है, जिसमें अखौरा-अगरतला रेल लिंक का निर्माण, बांग्लादेश में अंतर्देशीय जलमार्गों की ड्रेजिंग और भारत-बांग्लादेश मैत्री पाइपलाइन का निर्माण शामिल है।

Bangladesh India Out Campaign Impact

कितना असरदार होगा इंडिया ऑउट कैम्पेन?

इसमें कोई शक नहीं, कि बांग्लादेश में पिछले कुछ सालों में एक ऐसी आबादी तैयार हो रही है, जिसे अतीत के बारे में जानकारी नहीं है और वो पाकिस्तान समर्थक बन रहा है। सोशल मीडिया पर ऐसे लोगों को देखा जा सकता है, जिसको लेकर बांग्लादेश के कई एक्सपर्ट्स आश्चर्च जता चुके हैं और युवाओं से बांग्लादेश-पाकिस्तान का इतिहास पढ़ने की सलाह दे चुके हैं।

इसके अलावा, भारत के पड़ोसी देश में यह चलन नया नहीं है। हालांकि, भारत विरोधी अभियान से बीएनपी नेताओं को घरेलू स्तर पर लाभ हो सकता है, लेकिन यह दोनों एशियाई देशों के बीच संबंधों के लिए फिलहाल कोई महत्वपूर्ण खतरा पैदा नहीं करेगा।

पिछले महीने की शुरुआत में, प्रधान मंत्री शेख हसीना ने सार्वजनिक रूप से इस अभियान की निंदा की थी और विपक्षी नेताओं से कहा था, अगर ऐसा है, तो वो अपनी पत्नियों की साड़ियां जला दें, क्योंकि साड़ियां भारत से ही आती हैं।

शेख हसीना के मुताबिक, देश में ज्यादातर महिलाएं भारत की साड़ियां पहनती हैं। दरअसल, बांग्लादेशी पीएम ने दावा किया, कि विपक्षी नेताओं के परिवार के सदस्य खरीदारी के लिए भारत आते हैं और फिर इसे ढाका में बेचते हैं।

बांग्लादेशी अखबार प्रोथोमालो ने शेख हसीना के हवाले से कहा है, कि "बीएनपी नेता भारतीय उत्पादों के बहिष्कार की वकालत कर रहे हैं। मेरा सवाल है - बहिष्कार प्रचारकों की पत्नियों के पास कितनी भारतीय साड़ियां हैं? वे अपनी पत्नियों से साड़ियां लेकर उन्हें जला क्यों नहीं देते?"

शेख हसीना ने आगे कहा, कि "बीएनपी नेता #Boycottभारतीय उत्पादों को कह रहे हैं। लेकिन बीएनपी नेताओं को यह सुनिश्चित करना चाहिए, कि उनकी पत्नियाँ भारतीय साड़ी न पहनें। जिस दिन आप (बीएनपी) कार्यालय के सामने उन्हें (अपनी पत्नियों की भारतीय साड़ियों को) जला देंगे, उस दिन मुझे विश्वास हो जाएगा कि आप वास्तव में भारतीय सामानों का बहिष्कार कर रहे हैं।"

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+