बांग्लादेश में मंदिरों पर मुस्लिमों की भीड़ ने क्यों किया हमला? जानिए हिंदू समुदाय क्यों होते हैं निशाने पर
बांग्लादेश में दुर्गा पूजा के दौरान 22 दिलों में हिंदू मंदिरों को तोड़ा गया। भगवान की प्रतिमाओं को खंडित किया गया है। जानिए वजह।
चिट्टागांव, अक्टूबर 15: शुक्रवार को बांग्लादेश में देखते ही देखते हिंदू मंदिरों पर हमले शुरू हो गये। दुर्गा पंडालों पर मुस्लिमों की भीड़ ने हमला शुरू कर दिया और मंदिरों में विराजमान भगवान की प्रतिमाओं को तोड़ने लगे। एक जगह से शुरू हुआ ये बवाल धीरे-धीरे बढ़ने लगा और देखते ही देखते 22 जिलों में मंदिरों पर हमले होने लगे। हर तरफ उपद्रव का माहौल था और पंडालो को तोड़ा जा रहा था। कई जगहों पर पुलिस ने स्थिति को संभालने की कोशिश की, तो कई जगहों पर पुलिस के सामने ही मुस्लिमों की भीड़ पंडालों को तोड़ती नजर आई।
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क्यों शुरू हुआ मंदिरों पर हमला?
दैनिक भाष्कर की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सोशल मीडिया पर एक अफवाह के बाद मुस्लिमों की भीड़ ने हिंदू गांवों और मंदिरों पर हमला शुरू कर दिया। बताया जा रहा है कि, बांग्लादेश में कट्टरपंथियों की तरफ से एक कुरान के अपमान का अफवाह फैलाया गया और फिर हिदुओं के गांवों, दुकानों और शहरों को निशाना बनाया जाने लगा। देश में कई जगहों पर हिंसा की घटनाएं सामने आने लगी, जिसे रोकने के लिए बाद में मोबाइल इंटरनेट बंद कर दिया गया। हिंसा की घटनाएं रात भर जारी रही, जबकि अधिकारियों ने स्थिति को कम करने के लिए बड़ी संख्या में सुरक्षा कर्मियों को तैनात कर दिया।

कुरान के अपमान की अफवाह
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, नानुआर दिघी के तट पर एक दुर्गा पूजा स्थल पर कुरान की कथित अपवित्रता की अफवाह काफी तेजी से बांग्लादेश में फैल गई और फिर कमिला में हिंसा भड़क उठी और दुर्गा पूजा समारोह के दौरान हिंदू मंदिरों में मुस्लिमों की भीड़ द्वारा तोड़फोड़ की गई। कमिला की सीमा से लगे चांदपुर के हाजीगंज उप-जिले में बुधवार को हुई झड़पों के दौरान कम से कम चार लोगों की मौत हो गई और कई जिलों में अब तक हुई झड़पों में दर्जनों लोग घायल हो गए।

राजनीतिक मकसद के लिए हिंसा
रिपोर्ट के मुताबिक, नोआखली, चांदपुर, कॉक्स बाजार, चट्टोग्राम, चपैनवाबगंज, पबना, मौलवीबाजारा और कुरीग्राम में कई दुर्गा पूजा स्थलों में हिंसा फैल गई। इस मामले से परिचित लोगों ने कहा कि, जमात-ए-इस्लामी (जेईआई) दक्षिणी बांग्लादेश में दुर्गा पूजा पंडालों में हुई हिंसा के पीछे शामिल थी और शेख हसीना सरकार को शर्मिंदा करने और सांप्रदायिक आग भड़काने के मकसद से हमले किए गए थे।

एक्शन में आईं शेख हसीना
बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा कि, कमिला में हिंदू मंदिरों और दुर्गा पूजा स्थलों पर हमलों में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह किसी भी धर्म का हो। ढाका ट्रिब्यून ने गुरुवार को कहा कि, "कमिला की घटनाओं की पूरी जांच की जा रही है। किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वे किस धर्म के हैं। उन्हें दंडित किया जाएगा।" बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने दुर्गा पूजा के अवसर पर हिंसा के बाद ढाका के ढाकेश्वरी राष्ट्रीय मंदिर में हिंदू समुदाय के बीच पहुंची, जहां उन्होंने कहा कि कमिला में मंदिरों की तोड़फोड़ "बहुत दुर्भाग्यपूर्ण" है और जो लोगों का विश्वास और विश्वास हासिल करने में असमर्थ हैं और उनकी कोई विचारधारा नहीं है, वे ऐसे हमले कर सकते हैं।

भारत ने जताई चिंता
रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश की कुछ कट्टरपंथी पार्टियों ने राजनीतिक फायदे के लिए मंदिरों पर हमले किए थे। जिसको लेकर बांग्लादेश की पीएम ने कहा कि, जो लोग लोगों का विश्वास हासिल नहीं कर सकते हैं, वो इसी तरह की हिंसा करते हैं। वहीं, भारत ने बांग्लादेश में हिंदू समुदाय पर किए गये हमले को लेकर गंभीर चिंता जताई है और बांग्लादेश की सरकार से हिंदुओं को सुरक्षा देने की मांग की है। भारत सरकार की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि, वो बांग्लादेश सरकार के साथ करीबी संपर्क बनाए हुई है और पड़ोसी देश इस मुद्दे पर कार्रवाई कर रही है। इसके साथ ही बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने भारत को संबोधित करते हुए कहा कि, ''हम उम्मीद करते हैं कि वहां ऐसा कुछ नहीं होगा, जो बांग्लादेश में हिंदू समुदाय को प्रभावित करने वाली किसी भी स्थिति को प्रभावित कर सके''।

पहले भी हो चुके हैं हमले
बांग्लादेश और पाकिस्तान में मंदिरों और हिंदू समुदाय पर हमले होना कोई नई बात नहीं है। इन दोनों देशों के कट्टरपंथी हर बात पर हिंदू मंदिरों को तोड़तो रहते हैं। कभी कोई राजनीतिक मकसद से मंदिर तोड़ते हैं, तो कभी बिना वजह ही किसी हिंदू गांव पर हमला कर देते हैं। बांग्लादेश में इससे पहले 30 अक्टूबर से 2 नवंबर 1990 तक लगातार हिंदुओं के खिलाफ हिंसा की गई, जिसमें हजारों हिंदुओं को मार दिया गया था। कहा जाता है कि, हिंदुओं पर हमले के बाद आरोपियों पर कार्रवाई नहीं की जाती है, जिससे उपद्रवियों के हौसले बुलंद रहते हैं। हालांकि, बांग्लादेश के मुसलमानों का कहना होता है कि, इस तरह की हिंसक घटनाएं कभी-कभी ही होती हैं, और मुसलमानों ने सांप्रदायिक सौहार्द को बचाकर रखा है।












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