Bangladesh Election 2026: घोषणा पत्र में हिन्दू और हिन्दुस्तान पर जमात-ए-इस्लामी ने क्या बोला? देखें रिपोर्ट
Bangladesh Election 2026: बांग्लादेश में 12 फरवरी को चुनाव के लिए मतदान किया जाना है। उससे पहले जमात-ए-इस्लामी ने अपने चुनावी घोषणापत्र में भारत का खास तौर पर जिक्र किया है। पार्टी ने साफ कहा है कि वह भारत के साथ "रचनात्मक और सहयोगात्मक रिश्ते" बनाए रखना चाहती है। जमात का कहना है कि भारत के साथ संबंध आपसी सम्मान, समानता और निष्पक्षता पर आधारित होने चाहिए।
पड़ोसी देशों से शांतिपूर्ण रिश्तों पर जोर
भारत के अलावा जमात-ए-इस्लामी ने भूटान, नेपाल, म्यांमार, श्रीलंका, मालदीव और थाईलैंड जैसे पड़ोसी देशों से भी शांतिपूर्ण और दोस्ताना संबंध बनाए रखने की बात कही है। पार्टी ने साफ किया है कि उसकी विदेश नीति का मकसद क्षेत्रीय स्थिरता और सहयोग को बढ़ावा देना होगा।

हसीना के बाद पहला चुनाव
बांग्लादेश में 12 फरवरी को मतदान होना है। यह चुनाव पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद पहला राष्ट्रीय चुनाव है। अगस्त 2024 में हुए बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के बाद देश अब एक नए राजनीतिक दौर में प्रवेश कर रहा है।
हिंसक प्रदर्शनों के बाद सत्ता से बाहर हुईं हसीना
शेख हसीना को अगस्त 2024 में पद से हटा दिया गया था। यह फैसला सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसक कार्रवाई के बाद लिया गया। हालात बिगड़ने के बाद शेख हसीना देश छोड़कर भारत चली गई थीं, जिससे बांग्लादेश की राजनीति में बड़ा भूचाल आ गया।
अवामी लीग पर बैन, राजनीति का बड़ा मोड़
हसीना की पार्टी अवामी लीग, जो कभी बांग्लादेश की सबसे ताकतवर राजनीतिक पार्टी मानी जाती थी, अब प्रतिबंधित कर दी गई है। पार्टी का चुनाव चिन्ह भी मतपत्रों से हटा दिया गया है। इससे अवामी लीग समर्थकों का एक बड़ा वर्ग अपने पारंपरिक राजनीतिक विकल्प से वंचित हो गया है।
गोपालगंज में सबसे ज्यादा अनिश्चितता
अवामी लीग की गैरमौजूदगी का सबसे ज्यादा असर गोपालगंज में देखने को मिल रहा है। यह इलाका लंबे समय से शेख हसीना और उनके परिवार का गढ़ माना जाता रहा है। हसीना ने 1991 से इसी सीट से लगातार भारी जीत दर्ज की थी।
शेख मुजीब का गृह जिला भी रहा है गोपालगंज
गोपालगंज सिर्फ हसीना का नहीं, बल्कि बांग्लादेश के संस्थापक राष्ट्रपति शेख मुजीबुर रहमान का भी गृह जिला रहा है। ऐसे में इस सीट पर अवामी लीग का न होना मतदाताओं के लिए बिल्कुल नया और अनजान अनुभव बन गया है।
दशकों बाद बिना अवामी लीग के चुनाव
यह बांग्लादेश के इतिहास में पहली बार हो रहा है कि राष्ट्रीय चुनाव अवामी लीग के बिना लड़े जा रहे हैं। पार्टी के उम्मीदवारों के न होने से वोटर्स एक बदले हुए राजनीतिक माहौल में मतदान करने जा रहे हैं।\
बीएनपी और जमात में टक्कर
अवामी लीग के बाहर होने के बाद अब बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) और जमात-ए-इस्लामी चुनाव के मुख्य दावेदार बनकर उभरे हैं। दोनों ही पार्टियां लंबे समय से शेख हसीना की राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रही हैं।
बदले समीकरणों में हो रहा ऐतिहासिक चुनाव
तीन दशकों से ज्यादा समय तक बांग्लादेश की राजनीति पर हावी रही पार्टी के बिना यह चुनाव हो रहा है। बदले हुए राजनीतिक समीकरणों के बीच मतदाता अब एक ऐसे चुनाव का सामना कर रहे हैं, जो देश के भविष्य की दिशा तय कर सकता है।
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