Bangladesh: अर्थशास्त्री बने घूम रहे यूनुस ने डुबोई इकोनॉमी! पाकिस्तान की तरह कंगाली की राह पर ढाका
Bangladesh इस समय गंभीर कर्ज के जाल (Debt Trap) में फंस गया है। हालत यह हो गई है कि कर्ज चुकाने पर सरकार का दूसरा सबसे बड़ा खर्च हो रहा है। देश के राजस्व प्राधिकरण के प्रमुख ने यह चेतावनी देते हुए कहा कि टैक्स-टू-जीडीपी रेशियो लगातार गिर रहा है-जो अब खतरनाक स्तर 7% तक पहुंच चुका है।
टैक्स-टू-जीडीपी रेशियो 10% से गिरकर 7%
ढाका में एक मीटिंग में राष्ट्रीय राजस्व बोर्ड (NBR) के चेयरमैन एम. अब्दुर रहमान खान ने कहा कि कम टैक्स-जीडीपी रेशियो की वजह से बांग्लादेश धीरे-धीरे खतरनाक निर्भरता की तरफ बढ़ रहा है। उन्होंने साफ कहा-"हम पहले ही कर्ज के जाल में फंस चुके हैं।"

कम टैक्स वसूली- एक बड़ा खतरा
खान ने बताया कि टैक्स-जीडीपी रेशियो हाल के वर्षों में 10% से अधिक से गिरकर 7% रह गया है। इसे उन्होंने कम संसाधनों वाले संघर्षरत देश के लिए बेहद खतरनाक बताया। इस कार्यक्रम में थिंक टैंक सीपीडी (CPD) के फेलो और अर्थशास्त्री मुस्तफिज़ुर रहमान भी मौजूद थे।
अब सबसे ज्यादा खर्च ब्याज भुगतान पर
मुस्तफिज़ुर रहमान के मुताबिक पहले राजस्व बजट में वेतन और पेंशन के बाद सबसे ज्यादा खर्च कृषि और शिक्षा पर होता था। लेकिन अब इनकी जगह सबसे बड़ा खर्च कर्ज के ब्याज भुगतान पर जाने लगा है-जो देश की आर्थिक सेहत के लिए बेहद खराब संकेत है।
इतिहास में पहली बार- छोटा किया गया नेशनल बजट
वित्त सचिव एम. खैरूज्जमां मोजुमदार ने बताया कि इस वित्त वर्ष में बांग्लादेश ने पहली बार राष्ट्रीय बजट को छोटा किया है। उन्होंने इस स्थिति की तुलना करते हुए कहा-यह ऐसा है जैसे पहले से ही दुबला व्यक्ति को और वजन घटाने के लिए कहना। उनका कहना है कि अगर बजट में ऐसे ही कटौती जारी रही, तो डिवेलपमेंट स्ट्रक्चर को नुकसान होगा।
राजस्व संग्रह जरूरत से बहुत कम
मोजुमदार ने कहा कि विकास, मुद्रास्फीति और अर्थव्यवस्था पर भले ही चर्चाएं होती रहती हैं, लेकिन असली मुद्दा एक ही है- देश को उधारी पर निर्भरता कम करनी है और घरेलू राजस्व बढ़ाना ही होगा।
बैंकिंग सिस्टम में बड़ी दिक्कतें-NPL पर काम जारी
संगोष्ठी में बांग्लादेश बैंक के गवर्नर अहसन एच. मंसूर भी मौजूद थे। उन्होंने बताया कि देश में गैर-निष्पादित ऋण यानी NPL की समस्या से निपटने के लिए कानूनी सुधार किए जा रहे हैं। साथ ही घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बकाया संपत्ति की रिकवरी के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।
विदेशी उधारी पहुंची 104.48 अरब डॉलर
विश्व बैंक की इंटरनेशनल डेट रिपोर्ट 2025 में जारी आंकड़ों ने गंभीर तस्वीर पेश की है। इसमें बताया गया है कि पिछले 5 सालों में बांग्लादेश का बाहरी कर्ज 42% बढ़ा, और 2024 के अंत तक यह 104.48 अरब डॉलर हो गया। अब बाहरी कर्ज निर्यात आय का 192% हो चुका है और कर्ज सेवा भुगतान निर्यात का 16%-जो भारी दबाव का संकेत है।
श्रीलंका के साथ बांग्लादेश सबसे जोखिम वाले देशों में
विश्व बैंक ने बांग्लादेश को उन देशों में रखा है जहां कर्ज चुकाने का प्रेशर सबसे तेज़ी से बढ़ रहा है। दक्षिण एशिया में इस सूची में सिर्फ श्रीलंका ही दूसरा देश है।
बांग्लादेश का कुल कर्ज 19,99,928 करोड़ टका
वित्त मंत्रालय के मुताबिक इस साल मार्च तक देश का कुल कर्ज 19,99,928 करोड़ टका था-
जिसमें से विदेशी कर्ज 8,41,992 करोड़ टका है।
डिफॉल्ट लोन 2.24 लाख करोड़ टका बढ़े
पिछले महीने बांग्लादेश बैंक ने बताया कि सिर्फ 6 महीनों में डिफॉल्ट लोन 2.24 लाख करोड़ टका बढ़े और सितंबर तक यह 6.44 लाख करोड़ टका हो गए। यह कुल बैंकिंग क्रेडिट का 35.7% है-जो किसी भी देश के लिए बहुत ही डरावना संकेत है।
9 महीनों में डिफॉल्ट लोन में 3 लाख करोड़ टका की बढ़ोतरी
पिछले साल दिसंबर की तुलना में सिर्फ 9 महीनों में डिफॉल्ट लोन में लगभग 3 लाख करोड़ टका की बढ़ोतरी हुई। डिफॉल्ट रेट मार्च में 24% से बढ़कर सितंबर में 35.73% पहुंच गई।
बैंकिंग क्षेत्र में कुल लोन 18 लाख करोड़ टका है।
निवेश में भारी गिरावट
विशेषज्ञों का कहना है कि यह पूरी स्थिति देश की बैंकिंग प्रणाली की कमजोरी और वित्तीय प्रशासन की खराब हालत दिखाती है। अखबार 'प्रथम आलो' की रिपोर्ट के अनुसार बांग्लादेश ने इतिहास में कभी निवेश में इतनी भारी गिरावट नहीं देखी थी।
अशांति, अनिश्चितता और आर्थिक चुनौतियों ने हालात किए खराब
रिपोर्ट में निवेश कम होने की बड़ी वजहें बताई गई हैं-
• राजनीतिक अशांति
• आर्थिक अनिश्चितता
• ऊर्जा संकट
• हाई इंटरेस्ट रेट
• महंगाई
• कम मजदूरी
• घटती क्रय क्षमता
इन सभी वजहों ने मिलकर देश की आर्थिक परेशानी को और बढ़ा दिया है।
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