Cough Syrup: बच्चों की मौत के बाद सरकार सख्त, अब बिना डॉक्टर की पर्ची नहीं मिलेगा कोई भी सिरप, 10 खास बातें
Cough Syrup Sale Rules: केंद्र सरकार ने दवाओं की बिक्री को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है, उसने एक नोटिफिकेशन जारी किया है, जिसके तहत खांसी की सिरप अब बिना डॉक्टर की पर्ची के नहीं मिलेंगी, इसका मतलब साफ है कि अब मेडिकल स्टोर से कोई भी सिरप खरीदने के लिए डॉक्टर का प्रिस्क्रिप्शन दिखाना अनिवार्य होगा।
आखिर सरकार ने क्यों लिया यह फैसला?
दरअसल, दिसंबर 2025 में केंद्र सरकार ने ड्रग्स रूल्स, 1945 के तहत Schedule K में संशोधन का मसौदा जारी किया था। इसमें सिरप"शब्द को छूट वाली श्रेणी से हटाने का प्रस्ताव रखा गया था। अब इस प्रस्ताव को लागू कर दिया गया है, जिसके बाद सिरप केवल डॉक्टर की सलाह पर ही बेचे जा सकेंगे। स्वास्थ्य मंत्रालय और केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) का मानना है कि सिरप के अनियंत्रित इस्तेमाल, गलत डोज और बिना मेडिकल सलाह के सेवन से गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा हो रहे थे।

बच्चों की मौतों ने बढ़ाई चिंता
साल 2025 में मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में कथित तौर पर दूषित कफ सिरप पीने के बाद 22 से अधिक बच्चों की मौत की खबर सामने आई थी। इसके बाद पूरे देश में कफ सिरप की गुणवत्ता और बिक्री व्यवस्था पर सवाल उठे थे आपको बता दें कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) पहले भी भारतीय कफ सिरप में डायएथिलीन ग्लाइकोल (DEG) जैसे जहरीले रसायनों की मौजूदगी को लेकर चेतावनी जारी कर चुका है।
140 से अधिक बच्चों की मौत दूषित कफ सिरप से हुई
भारत में बने कुछ कफ सिरप अफ्रीका और मध्य एशिया के देशों में भी बच्चों की मौतों से जुड़े पाए गए थे। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, 2022 और 2023 के दौरान गाम्बिया, उज्बेकिस्तान और कैमरून में 140 से अधिक बच्चों की मौत दूषित कफ सिरप (खांसी की दवा) पीने के कारण हुई थी।

सिरप बिक्री पर नए नियम की 10 खास बातें
- कफ सिरप समेत सभी औषधीय सिरप खरीदने के लिए डॉक्टर का प्रिस्क्रिप्शन जरूरी होगा।
- पहले कई सिरप मेडिकल स्टोर से सीधे खरीदे जा सकते थे, अब ऐसा नहीं होगा।
- स्वास्थ्य मंत्रालय ने नियमों में बदलाव कर सिरप को छूट वाली श्रेणी से बाहर कर दिया है।
- पिछले कुछ वर्षों में दूषित कफ सिरप से बच्चों की मौत के मामले सामने आने के बाद सरकार ने सख्ती दिखाई।
- बिना सलाह दवा लेने से होने वाले दुष्प्रभाव और ओवरडोज के खतरे को कम करने की कोशिश की जा रही है।
- विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे बच्चों में सिरप का इस्तेमाल डॉक्टर की निगरानी में ही होना चाहिए।
- फार्मासिस्ट को अब सिरप बेचने से पहले डॉक्टर की पर्ची जांचनी होगी।
- खांसी-जुकाम होने पर खुद से सिरप खरीदकर सेवन करने की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी।
- दवा सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए यह कदम उठाया गया है।
- सरकार का दावा है कि नए नियम से दवाओं के दुरुपयोग में कमी आएगी और मरीजों की सुरक्षा बढ़ेगी।
India's Drugs Rules, 1945 क्या हैं?
Drugs Rules, 1945 भारत में दवाओं और कॉस्मेटिक उत्पादों के निर्माण, बिक्री, वितरण, आयात और गुणवत्ता नियंत्रण को विनियमित करने वाले नियम हैं। ये नियम Drugs and Cosmetics Act, 1940 के तहत बनाए गए थे और देश में दवाओं की सुरक्षा, प्रभावशीलता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने का काम करते हैं।
- दवाओं का लाइसेंस: दवा बनाने, बेचने और वितरित करने के लिए लाइसेंस अनिवार्य है।
- दवाओं का वर्गीकरण: दवाओं को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है, जैसे Prescription Drugs और Over-the-Counter (OTC) Drugs।
- डॉक्टर की पर्ची पर मिलने वाली दवाएं: कुछ दवाएं केवल पंजीकृत चिकित्सक के प्रिस्क्रिप्शन पर ही बेची जा सकती हैं। इनमें Schedule H, H1 और X की दवाएं शामिल हैं।

डॉक्टर क्या कहते हैं?
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ प्रियंका अग्रवाल ने वनइंडिया हिंदी से कहा कि 'छोटे बच्चों को बिना डॉक्टर की सलाह के कफ सिरप नहीं देना चाहिए। गलत डोज से सांस संबंधी समस्याएं, एलर्जी और अन्य दुष्प्रभाव हो सकते हैं। कई बार माता-पिता अलग-अलग दवाएं एक साथ दे देते हैं, जिससे ओवरडोज का खतरा बढ़ जाता है। बच्चों में खांसी का कारण संक्रमण, एलर्जी या अन्य बीमारी भी हो सकती है, जिसकी सही पहचान जरूरी है।'
स्वास्थ्य मंत्रालय ने क्या कहा?
स्वास्थ्य मंत्रालय ने अक्टूबर 2025 में राज्यों के साथ हुई बैठक में भी कहा था कि 'अधिकांश खांसी सेल्फ-लिमिटिंग होती है और बच्चों में कफ सिरप का इस्तेमाल बेहद सोच-समझकर किया जाना चाहिए। मंत्रालय ने बच्चों में कफ सिरप के "रैशनल यूज" यानी विवेकपूर्ण उपयोग पर जोर दिया था।'
नए नियम लागू होने के बाद क्या-क्या बदलेगा?
- मेडिकल स्टोर बिना प्रिस्क्रिप्शन सिरप नहीं बेच सकेंगे।
- कफ सिरप समेत सभी औषधीय सिरप डॉक्टर की सलाह पर ही मिलेंगे।
- सिरप को विनियामक रियायत देने वाली सूची से हटा दिया गया है।
- दवाओं के दुरुपयोग और सेल्फ-मेडिकेशन पर रोक लगेगी।
- बिक्री का रिकॉर्ड रखना होगा और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई होगी।














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