Balen Shah: संकट में बालेन सरकार! गृह मंत्री सुदन गुरुंग का इस्तीफा, श्रम मंत्री पहले ही छोड़ चुके हैं पद
Balen Shah Home Minister Resigns: नेपाल की बालेन शाह सरकार के लिए शुरुआती दिन कांटों भरे साबित हो रहे हैं। पहले महीने में ही कैबिनेट के दो बड़े स्तंभ ढह गए हैं। अनुशासनहीनता के मामले में श्रम मंत्री दीपक कुमार शाह की विदाई के ठीक बाद अब गृह मंत्री सुदन गुरुंग ने भी इस्तीफा दे दिया है।
गुरुंग पर विवादित व्यवसायी दीपक भट्ट के साथ मिलकर मनी लॉन्ड्रिंग और शेयरों में हेरफेर के गंभीर आरोप लगे हैं। भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस का वादा कर सत्ता में आई इस नई सरकार के लिए अपने ही मंत्रियों का विवादों में घिरना एक बड़ी नैतिक और राजनीतिक चुनौती बन गया है।

Nepal Political Crisis: कैबिनेट में इस्तीफों की झड़ी
बालेन शाह सरकार अभी ठीक से काम शुरू भी नहीं कर पाई थी कि मंत्रियों के हटने का सिलसिला शुरू हो गया। सबसे पहले श्रम मंत्री दीपक कुमार शाह को अनुशासनहीनता के चलते पद से हाथ धोना पड़ा। अब गृह मंत्री सुदन गुरुंग का इस्तीफा सरकार के लिए दूसरा बड़ा झटका है। एक महीने के भीतर दो महत्वपूर्ण विभागों के मंत्रियों का बाहर होना यह दर्शाता है कि सरकार के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है और गठबंधन या पार्टी के भीतर कड़े अनुशासन की जरूरत है।
Sudhan Gurung Resignation: शेयर विवाद और गंभीर आरोप
सुदन गुरुंग पर लगे आरोप सीधे तौर पर उनकी ईमानदारी पर सवाल उठाते हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने जेल जा चुके विवादित कारोबारी दीपक भट्ट की कंपनियों में शेयर खरीदे। विपक्ष और नागरिक समाज का कहना है कि यह 'मनी लॉन्ड्रिंग' का मामला हो सकता है। नेपाली कांग्रेस जैसे विपक्षी दलों ने इस पर कड़ा रुख अपनाया और स्वतंत्र जांच की मांग की। इसी भारी दबाव के बीच गुरुंग ने पद छोड़ना ही अपनी साख बचाने का आखिरी रास्ता समझा।
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Deepak Bhatta Money Laundering: नैतिकता और 'जेन-जी' का दबाव
अपने इस्तीफे में सुदन गुरुंग ने बार-बार 'नैतिकता' शब्द का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी (Gen-Z) सुशासन और जवाबदेही मांग रही है। गुरुंग के अनुसार, सार्वजनिक जीवन में शुद्धता जरूरी है और पद से ज्यादा महत्वपूर्ण जनता का भरोसा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे निष्पक्ष जांच का सामना करना चाहते हैं और नहीं चाहते कि गृह मंत्री की कुर्सी पर बैठकर वे जांच को किसी भी तरह से प्रभावित करें या स्वार्थ का टकराव (Conflict of Interest) पैदा हो।
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बालेन शाह के लिए अग्निपरीक्षा
भारी जनमत के साथ प्रधानमंत्री बने बालेन शाह के लिए यह समय किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। सरकार की शुरुआत में ही मंत्रियों का इस तरह विवादित होना जनता के भरोसे को तोड़ सकता है। एक तरफ श्रम मंत्री की अनुशासनहीनता और दूसरी तरफ गृह मंत्री पर भ्रष्टाचार के आरोप-इन दोनों घटनाओं ने सरकार की छवि को नुकसान पहुँचाया है। अब प्रधानमंत्री बालेन शाह के सामने चुनौती है कि वे जल्द से जल्द अपनी कैबिनेट को स्वच्छ छवि वाले चेहरों के साथ पुनर्गठित करें।












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