Baby Ghost Shark:वैज्ञानिकों की इस दुर्लभ खोज के बारे में जानिए, करीब 2 Km गहरे समुद्र में होता है बसेरा
वेलिंगटन, 17 फरवरी: न्यूजीलैंड के एक मत्स्य वैज्ञानिक को समुद्र की गहराइयों में रिसर्च के दौरान एक छोटी सी मछली हाथ लगी। उन्हें देखते ही अहसास हुआ कि उनके हाथ जो मछली आई है, वह सामान्य नहीं है। लेकिन, जब उनकी ली हुई तस्वीर ने इंटरनेट पर तहलका मचाया, तब उन्हें मालूम हुआ कि वाकई, उन्होंने एक बहुत ही दुर्लभ खोज कर डाली है। दरअसल, उनके हाथ जो मछली आई थी, वह है 'घोस्ट शार्क' का बच्चा। क्योंकि, इसके बारे में बहुत ही कम रिसर्च उपलब्ध है और इसकी प्रजाति के बारे में ज्यादा शोध भी नहीं हो पाया है। इसकी वजह ये है कि यह दुर्लभ मछलियां आमतौर पर समंदर के तलों में रहती हैं और वहीं पर मिलने वाले कीड़े-मकोड़ों को खाकर जीवित रहती हैं।

न्यूजीलैंड के वैज्ञानिकों को मिला 'बेबी घोस्ट शार्क'
न्यूजीलैंड के वैज्ञानिकों ने समुद्र की बहुत ही गहराई में ऐसी दुर्लभ मछली की खोज की है, जिसको लेकर खुद उन्हें भी यकीन नहीं आ रहा है। यह दुर्लभ खोज है एक 'बेबी घोस्ट शार्क' की। यह न्यूजीलैंड के साऊथ आइलैंड के पूर्वी तट के समुद्र से मिला है। घोस्ट शार्क को चिमेरा के नाम से भी जाना जाता है, लेकिन अपने नाम के विपरित यह मछलियां शार्क की जैसी थोड़ी-बहुत दिखती जरूर हैं, लेकिन शार्क होती नहीं हैं। लेकिन, यह इस वजह से शार्क से संबंधित भी हैं, क्योंकि दोनों के कंकाल उपास्थि या कार्टलिज से बनी होती हैं, हड्डियों से नहीं।

समुद्र के तल में रहता है 'घोस्ट शार्क' का बसेरा
घोस्ट शार्क को दरअसल एक रहस्यमयी समुद्री जीव कह सकते हैं, क्योंकि अभी तक इसके बारे में बहुत ही कम जानकारी उपलब्ध है। इसकी वजह ये है कि यह समुद्र में सामान्यतौर पर करीब 1,829 मीटर तक या 6,000 फीट नीचे रहती हैं, जहां घुप अंधेरा होता है और आमतौर पर शोधकर्ताओं को वहां तक पहुंचना बहुत ही मुश्किल होता है।

समुद्र में 1.2 किलोमीटर गहराई से पकड़ी गयी
न्यूजीलैंड के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वॉटर एंड एटमोस्फेरिक रिसर्च की वैज्ञानिक ब्रिट फिनुची ने गुरुवार को रॉयटर्स से कहा है, 'हम जो भी जानते हैं वह वयस्कों के बारे में है, जो आमतौर पर एक मीटर या डेढ़ मीटर लंबाई के होते हैं। इसलिए मेरे हाथ की हथेली में आ जाने लायक को ढूंढ़ना वास्तव में अविश्वसनीय और असामान्य है।' फिनुची का कहना है कि हाल ही में अंडे से बाहर आए इस घोस्ट शार्क को करीब 1.2 किलोमीटर की गहराई से पकड़ा गया है।

'बेबी घोस्ट शार्क' की बनावट
तस्वीर से मालूम होता है कि इसके शरीर की पारदर्शी त्वचा से काले पंख जुड़े हुए हैं। धुंधला सा सफेद पूंछ भी है और काली और बड़ी आंखें भी। फिनुची हंसते हुए कहती हैं कि 'मुझे लगा था कि यह कूल है, लेकिन बोट पर मौजूद बाकी लोगों को ऐसा नहीं लगा।' उनके मुताबिक, 'मैं शुरू से जानती थी कि यह कुछ खास और अलग है, इसलिए मैंने इसे पकड़ लिया और कुछ तस्वीरें खींच लीं, जो अब इंटरनेट पर पूरी तरह से फैल गया है।'

समुद्र के तल में अंडे देती हैं घोस्ट शार्क
इसे पकड़ कर विज्ञान की दुनिया में तहलका बनाने वाली वैज्ञानिक के मुताबिक बच्चे घोस्ट शार्क व्यस्कों की तुलना में अलग-अलग गहराइयों में पाए जाते हैं और कई मामलों में बड़ों से अलग भी होते हैं। जीवों में रैटफिश, रैबिटफिश, एलिफैंटफिश या स्पूकफिश के भी सिर बड़े और आंखें उनके शरीर की तुलना में ज्यादा विशाल होते हैं। घोस्ट शार्क समुद्र की सतह पर ही अंडे देती हैं और बाहर आने से पहले यह उसी की जर्दी खाकर जीवित रहती हैं।

घोस्ट शार्क के रिसर्च में मदद मिलने की उम्मीद
उनका कहना है कि यह 'बहुत ही दुर्लभ और चौंकाने वाली खोज है', जिससे प्रजाति के बारे में कुछ मालूमात हो सकता है। अभी वैज्ञानिक इस बेबी शार्क पर रिसर्च कर रहे हैं। इससे इनके बर्ताव और आदतों को समझने में और ज्यादा मदद मिलेगी। आमतौर पर भूत शार्क समंदर की गहराइयों और तल में रहने की वजह से वहां मौजूद मोलस्क और कीड़े खाकर ही जीवित रहते हैं। (पहली तस्वीर के अलावा बाकी सारी प्रतीकात्मक,पहली तस्वीर सौजन्य-ब्रिट फिनुची ट्विटर)












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