प्रिंट किए सोलर पैनलों के भरोसे 15,100 किलोमीटर की कार यात्रा

कैनबरा, 21 अप्रैल। ऑस्ट्रेलिया के वैज्ञानिक एक अनोखी यात्रा की तैयारी कर रहे हैं. सितंबर में वे 15,100 किलोमीटर की ड्राइव पर निकलेंगे. इस ड्राइव में कार होगी टेस्ला, जो बैट्री से चलती है. लेकिन इस बैट्री को चार्ज करने के लिए वैज्ञानिक प्रिंट किए गए सोलर पैनल प्रयोग करना चाहते हैं. वैज्ञानिक अपनी इस ड्राइव से लोगों को स्वच्छ ऊर्जा के बारे में जागरूक भी करना चाहते हैं.

australian scientists to power tesla on 15000 km trip with printed solar panels

इस परियोजना को नाम दिया गया है 'चार्ज अराउंड ऑस्ट्रेलिया'. इसके तहत टेस्ला कार को प्रिंट किए गए 18 सोलर पैनल से चार्ज किया जाएगा. हर पैनल 18 मीटर लंबा है और उसे कार के साथ-साथ लगाया जाएगा ताकि वे सूरज से धूप सोखें और फिर बिजली बनाकर कार की बैट्री चार्ज करें.

प्रिंट किए गए सोलर पैनल की खोज करने वाले पॉल दस्तूर कहते हैं कि न्यू कासल यूनिवर्सिटी की टीम ना सिर्फ सोलर पैनलों की क्षमता परखेगी बल्कि उसके अन्य उपयोगों के बारे में भी शोध करेगी. गोसफर्थ शहर में रहने वाले दस्तूर कहते हैं, "यह दरअसल एक बढ़िया परीक्षण है जो हमें बताएगा कि इस तकनीक को हम दूर-दराज में कैसे इस्तेमाल कर सकते हैं, जैसे कि अंतरिक्ष में."

क्या होते हैं प्रिंट किए सोलर पैनल

प्रिंट किए गए सोलर पैनल बहुत हल्की, लैमिनेटेड प्लास्टिक की बनी चादर होती हैं. इन्हें बनाने का खर्च बहुत कम होता है. एक वर्गमीटर चादर बनाने में 10 डॉलर यानी 80 रुपये से भी कम का खर्च आता है. पैनल को आम कमर्शल प्रिंटर से ही प्रिंट किया जा सकता है.

दस्तूर कहते हैं कि इन सोलर पैनलों से कार को चार्ज करने का फायदा ये होगा कि उन लोगों में थोड़ी जागरूकता बढ़ेगी, जो सोचते हैं कि दूर-दराज इलाकों में कार चार्ज कैसे होगी. वह बताते हैं, "लोग ऐसी समस्याओं का का जवाब चाहते हैं जो उन्हें क्लाइमेट चेंज के कारण रोजमर्रा की जिंदगी में पेश आती हैं."

84 दिन का चक्कर

टेस्ला कार की यह ड्राइव 84 दिन लंबी होगी. इस दौरान वैज्ञानिकों की टीम 70 स्कूलों में जाएगी और छात्रों को दिखाएगी कि भविष्य की तकनीकें कैसे काम करेंगी. इस परियोजना के बारे में टेस्ला के मालिक इलॉन मस्क ने सार्वजनिक तौर पर फिलहाल कुछ नहीं कहा है. दस्तूर से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, "उम्मीद है उन्हें खुशी होगी."

दस्तूर कहते हैं कि यह परियोजना दिखाती है कि "कैसे हमारी इनोवेटिव तकनीक को उनकी खोज के साथ मिलाकर ग्रह के लिए नए-नए हल निकाले जा रहे हैं."

वीके/एए (रॉयटर्स)

Source: DW

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