ऑस्ट्रेलिया के अखबार का बड़ा दावा- 'गलवान के खूनी संघर्ष में नदी में बह गए थे 38 चीनी सैनिक, चीन ने बोला झूठ'
सिडनी, 03 फरवरी। 15 जून 2020 को गलवान घाटी में भारत-चीन के बीच में हुए संघर्ष को कोई नहीं भूल सकता है। इस खूनी झड़प में कर्नल संतोष बाबू समेत भारत के 20 वीर सैनिक शहीद हो गए थे और बड़ी संख्या में चीनी सैनिकों के मारे जाने की खबर थी लेकिन चीन ने इस बारे में हमेशा गोल-मोल जवाब दिया लेकिन अब इस बारे में ऑस्ट्रेलिया के अखबार 'द क्लैक्सन' ने बड़ी बात कही है, उसने दावा किया है कि इस झड़प के दौरान चीन के 38 सैनिक नदी में बह गए थे।

'गलवान डिकोडेड'
हालांकि चीन की ओर से अब तक सिर्फ 4 सैनिकों की मौत की बात कबूली गई है और वो हमेशा अपने मारे गए सैनिकों के नंबर्स को बताने से कतराता रहा है। 'गलवान डिकोडेड' नाम से प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया है कि इस झड़प में भारत से ज्यादा नुकसान चीन को हुआ था, कई चीनी सैनिक अंधेरे में नदी पार करते हुए डूब गए थे।
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चीन ने बड़ी सफाई से तथ्यों को छुपाया
‘द क्लैक्सन' की खबर शोधकर्ताओं और चीन के ब्लॉगरों की सूचना पर आधारित है लेकिन सुरक्षा कारणों की वजह से पेपर ने उन लोगों के नामों को उजागर नहीं किया है। रिपोर्ट में साफ तौर पर लिखा है कि उस रात को वास्तव में क्या हुआ था इस बारे में चीनी ने बहुत कुछ दुनिया को नहीं बताया है। उसने बड़ी सफाई से तथ्यों को छुपाया है और तोड़मरोड़कर पेश किया है।

रुसी एजेंसी तास ने भी किया था बड़ा दावा
इस रिपोर्ट में कई ब्लॉगरों ने चीन पर झूठ बोलने का आरोप लगाया है। आपको बता दें कि ये कोई पहली बार नहीं है जब चीन पर इस तरह के आरोप लगे हैं, इससे पहले रुसी एजेंसी तास (TASS) ने कहा था कि गलवान की हिंसक झड़प में चीन के कम से कम 45 सैनिक मारे गये थे।

इंडिया और चीन के बीच बढ़ा तनाव
मालूम हो कि गलवान की घटना के बाद से इंडिया और चीन के बीच के रिश्ते काफी बिगड़े हुए हैं। दोनों देशों के बीच बार्डर का विवाद समाप्त करने के लिए 14वें दौर की सैन्य वार्ता हो चुकी है लेकिन अभी तक कोई नतीजा नहीं निकला है।
पैंगोंग झील पर पुल
चीन की ओर से बार्डर पर पैंगोंग झील पर पुल बनाने की भी बात सामने आई है, हाल ही में सेटेलाइट तस्वीरों में देखा गया है कि चीन पैंगोंग झील के अपने कब्जे वाले क्षेत्र में पुल का निर्माण कर रहा है। फिलहाल इस बारे में भारत ने कहा है कि इस पुल का निर्माण उस इलाके में हो रहा है, जो करीब 60 साल से चीन के अवैध कब्जे में हैं। इंडिया की पूरी नजर चीन की हरकतों पर हैं। वो उसे उसके नापाक हरकतों में कामयाब नहीं होने देगा।












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