Australia red sky: कयामत का संकेत या विज्ञान? ऑस्ट्रेलिया का आसमान रातों-रात हुआ खून जैसा लाल
Australia red sky: पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में हाल ही में प्रकृति का एक ऐसा रूप देखने को मिला जिसने सबको हैरान कर दिया। वहां का आसमान अचानक गहरा लाल हो गया, जिसे देखकर लोग डर गए और इसे किसी अनहोनी का संकेत मानने लगे। सोशल मीडिया पर इन तस्वीरों ने तहलका मचा दिया है।
असल में, यह कोई चमत्कार या अपशगुन नहीं, बल्कि एक दुर्लभ मौसमी घटना थी। 'नारेल' नामक चक्रवात की वजह से उठी धूल ने आसमान के रंग को पूरी तरह बदल दिया। विज्ञान और कुदरत के इस अनोखे मेल ने दुनिया भर के वैज्ञानिकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।

Western Australia dust storm: क्यों लाल हुआ ऑस्ट्रेलिया का आसमान?
आसमान का लाल होना एक शक्तिशाली चक्रवात 'नारेल' का नतीजा था। जब यह तूफान ऑस्ट्रेलिया के सूखे इलाकों से गुजरा, तो इसकी तेज हवाओं ने जमीन से भारी मात्रा में लाल धूल और मिट्टी को आसमान में उड़ा दिया। इस मिट्टी में 'आयरन ऑक्साइड' (लोहा) की मात्रा बहुत ज्यादा थी। जब सूरज की रोशनी इन धूल के कणों से टकराई, तो मिट्टी के लाल रंग ने पूरी फिजा को खूनी लाल बना दिया। यह दृश्य जितना डरावना था, उतना ही वैज्ञानिक रूप से दिलचस्प भी।
Why did Australia sky turn red: प्रकाश का विज्ञान: मी स्कैटरिंग
आमतौर पर आसमान नीला दिखता है क्योंकि हवा के छोटे कण नीली रोशनी को फैलाते हैं। लेकिन ऑस्ट्रेलिया में 'मी स्कैटरिंग' (Mie Scattering) की प्रक्रिया हुई। जब हवा में धूल के कण बड़े होते हैं, तो वे नीली और हरी रोशनी को सोख लेते हैं और केवल लंबी तरंगदैर्ध्य वाली लाल रोशनी को ही आगे जाने देते हैं। उस दिन ऑस्ट्रेलिया के आसमान में धूल के कणों ने एक फिल्टर की तरह काम किया, जिससे सूरज की चमक फीकी पड़ गई और सब कुछ लाल दिखने लगा।
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चक्रवात 'नारेल' की ताकत
ट्रॉपिकल साइक्लोन नारेल एक बेहद शक्तिशाली और दुर्लभ तूफान साबित हुआ। यह इतिहास का तीसरा ऐसा तूफान है जिसने ऑस्ट्रेलिया के तीन अलग-अलग तटों पर दस्तक दी। कैटेगरी 3 और 4 की तीव्रता वाले इस चक्रवात में हवाएं 125 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही थीं। इसने न केवल धूल भरी आंधी पैदा की, बल्कि भारी बारिश भी की। इस तूफान की वजह से जान-माल के नुकसान का खतरा काफी बढ़ गया था और मौसम विभाग ने हाई अलर्ट जारी किया था।
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सेहत और पर्यावरण पर असर
इस तरह की धूल भरी आंधियां केवल दिखने में डरावनी नहीं होतीं, बल्कि सेहत के लिए भी खतरनाक हैं। हवा में मौजूद खनिज धूल के बारीक कण सांस के जरिए फेफड़ों में जाकर गंभीर बीमारियां पैदा कर सकते हैं। इससे हवा की गुणवत्ता बहुत खराब हो गई और सड़कों पर कुछ भी देख पाना मुश्किल (लो-विजिबिलिटी) हो गया। पर्यावरण के नजरिए से देखें तो यह मिट्टी दूर-दराज के इलाकों तक फैल गई, जिससे खेती और यातायात दोनों पर काफी बुरा प्रभाव पड़ा।












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