ऐस्टरॉइड, जिसने धरती से डायनासोर का नामोनिशान मिटा दिया था, उसपर हुआ है रहस्यमयी खुलासा
मैनचेस्टर विश्वविद्यालय के नेतृत्व वाली वैज्ञानिकों की एक टीम ने ऐस्टरॉइड और डायनासोर के खत्म होने को लेकर चौंकाने वाला निष्कर्ष निकाला है।
वॉशिंगटन, दिसंबर 11: पृथ्वी के डायनासोर का नामोनिशान मिटाने वाले ऐस्टरॉइड को लेकर रहस्यमयी और बेहद चौंकाने वाला खुलासा वैज्ञानिकों ने किया है। खुलासा हुआ है कि, धरती पर मौजूद हजारों डायनासोर का समूल नाश कर देने वाले ऐस्टरॉइड ने पृथ्वी को काफी लंबे समय तक के लिए भीषण सर्दी में डूबो दिया था और शायद आज से 66 मिलियन साल पहले वसंत के अंत और गर्मियों की शुरूआत में ये घटना हुई थी।

जीवाश्म स्थल पर वैज्ञानिकों का शोध
मैनचेस्टर विश्वविद्यालय के नेतृत्व वाली वैज्ञानिकों की एक टीम ने ऐस्टरॉइड और डायनासोर के खत्म होने को लेकर चौंकाने वाला निष्कर्ष निकाला है। ये रिसर्च उस जगह पर किया गया है, जहां पर ऐस्टरॉइड की टक्कर पृथ्वी से हुई थी और ये जगह उत्तरी गोलार्ध में स्थिति है, जिसे तानिस जीवाश्म स्थल कहा जाता है। इस जगह पर हजारों जीवाश्म मिले थे और जिनके बारे में माना जाता है कि, उनकी मौत ऐस्टरॉइड के पृथ्वी से टकराने के बाद हुई थी। इस जगह को लेकर वैज्ञानिकों की अलग अलग टीम ने अलग अलग विश्लेषण किए हैं।

66 मिलियन साल पहले घटना
शोध में पता चला है कि, वन्यजीवों की मृत्यु 66 मिलियन वर्ष पहले युकाटन प्रायद्वीप में एक बड़े ऐस्टरॉइड के धरती पर टकराने के कुछ घंटे के अंदर हो गई थी। इस जगह पर मछलियों के जीवाश्म का अध्ययन करने वाले वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि, जिस वक्त पृथ्वी से ऐस्टरॉइड की टक्कर हुई होगी, उस वक्त धरती पर बसंत ऋृतु खत्म हो रहा था और गर्मी की शुरूआत हो रही थी। ये जगह आज के मैक्सिको के पास है, जहां धरती के अंदर हजारों जीवाश्म दफ्न हैं और ये सभी के सभी जीवाश्म सिर्फ डायनासोर के ही नहीं हैं, बल्कि इनमें विशालकाय मछलियों के जीवाश्म भी दफ्न हैं, जिनके विश्लेषण से अद्भुत जानकारियां वैज्ञानिकों के हाथ लग रही हैं। बड़े पैमाने पर विलुप्ति क्रेटेशियस और पुरापाषाण काल के बीच की सीमा को चिह्नित करती है, और उस समय जीवित 75 प्रतिशत प्रजातियों की मृत्यु हो गई।

पृथ्वी से टकराया था ऐस्टरॉइड
वैज्ञानिकों ने कहा है कि, जिस ऐस्टरॉइड की पृथ्वी से टक्कर हुई थी, वो करीब 6.2 मील चौड़ा था और आज वो जहां पर पड़ा है, उसे हम मेक्सिको के युकाटन प्रायद्वीप के रूप में जानते हैं, जो 93-मील-चौड़े चिक्क्सुलब क्रेटर के पीछे स्थिति है। यह शोध मैनचेस्टर विश्वविद्यालय के जीवाश्म विज्ञानी रॉबर्ट डीपल्मा और उनके सहयोगियों द्वारा किया गया है। टीम ने अपने रिसर्च पेपर में लिखा है कि, 'एंड-क्रेटेशियस चिक्सुलब प्रभाव ने पृथ्वी के द्रव्यमान को कम कर दिया था, जिसकी वजह से धरती पर मौजूद 75 प्रतिशत प्रजाति पूरी तरह से लुप्त हो गये। इसके साथ ही वैश्विक परिस्थितियों में भी बदलाव आ गया था और धरती स्तनपायी प्राणियों के लिए अनुकूल हो गया।

संसार चक्र में समय की भूमिका
वैज्ञानिकों का मानना है कि, समय ने पृथ्वी पर जीवन के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और समय ही कई जैविक कार्यों में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जैसे कि कब रिप्रोडक्शन करना है और कब हाइबरनेशन करना है, जो धरती पर आने वाली नई प्रजातियों के रहने और पनपने के लिए अनुकूल वातावरण का निर्माण करती हैं और उनके मुताबिक प्रकृति का निर्माण करती है। हालांकि, 66 मिलियन साल पहले ऐस्टरॉइड के पृथ्वी पर गिरने की घटना से साबित होता है कि, प्राकृतिक आपदा जीवन को कितनी कठोर रूप से प्रभावित करती है, कौन सी प्रजाति विलुप्त हो जाती है और घटना के मद्देनजर शेष बायोटा कितनी अच्छी तरह ठीक हो सकता है।

भविष्य को समझने में मदद
मेक्सिको में 66 मिलियन साल पहले गिरे ऐस्टरॉइड को Chicxulub नाम दिया है और Chicxulub ऐस्टरॉइड का पृथ्वी से टकराने का प्रभाव ना सिर्फ इतिहास को समझा रहा है, बल्कि कई भविष्यवाणियां भी करता है, कि वो आज का जीवन कैसे प्रभावित कर सकता है और अगर फिर से ऐसी कोई घटना होती है, तो फिर पृथ्वी पर उसका प्रभाव कैसा हो सकता है। मैनचेस्टर विश्वविद्यालय के विख्यात रिसर्चर और जीवाश्म विज्ञानी फिल मैनिंग ने कहा कि, 'जीवाश्म रिकॉर्ड प्रदान करता है और महत्वपूर्ण जानकारियां देता है, जिसे आज लागू किया जा सकता है, ताकि हम कल के लिए योजना बना सकें।

कैसे किया गया रिसर्च?
वैज्ञानिकों ने कई आधार पर अलग अलग जानवरों के जीवाश्म का अध्ययन किया और उस आधार पर संभावना जताई है कि, गर्मी के शरू होते वक्त ऐस्टरॉइड की पृथ्वी से टक्कर हुई होगी। इसमें सभी मृत जानवरों के अवशेषों के अध्ययन के जरिए पता लगा कि, इनके मरने का वक्त एक समान है, यानि इन जानवरों की सामूहिक मौत हुई होगी। सबसे पहले वैज्ञानिकों ने साइट से जीवाश्म मछली की हड्डियों को देखा और उनके विकास की प्रक्रिया को जाना। ये मछलियां पेड़ों के नीचे दबे हुए थे। इसके साथ ही हर एक जानवर पर रिसर्च किया गया और उनके जीवन चक्र को समझा गया। और फिर उस आधार पर निष्कर्ष निकाला गया कि, ऐस्टरॉइड की टक्कर बसंत के खत्म होने पर हुई होगी।












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