अमेरिका-ईरान के बीच कबूतर बने आसिम मुनीर, तेहरान से मैसेज लेकर जाएंगे वॉशिंगटन, ट्रंप से होगी मुलाकात या नहीं?

Pakistan के आर्मी चीफ इन दिनों इंटरनेशनल पॉलिटिक्स में जो काम कर रहे हैं उसके लिए डाकिया (पोस्टमैन) एकदम सटीक शब्द है। हालांकि वे खुद को एक पीसमेकर के तौर पर पेश कर रहे हैं लेकिन उनकी आतंकवाद की सोच और छवि इसे बनने नहीं दे रही। दरअसल आसिम मुनीर इन दिनों अमेरिका की चिठ्ठी ईरान में भेजने और ईरान की चिठ्ठी अमेरिका में भेजने का काम कर रहे हैं, जबकि उनका काम पाकिस्तान की सेना को संभालना है। अमेरिका का मैसेज ईरान लेकर गए आसिम मुनीर को अब अगली जिम्मेदारी मिली है ईरान का मैसेज वॉशिंगटन पहुंचाने की। इसीलिए, Asim Munir ईरान दौरे के बाद अब वाशिंगटन जाने वाले हैं। ईरानी मीडिया, खासकर Tasnim News Agency की रिपोर्ट के मुताबिक, मुनीर अमेरिका और ईरान के बीच रुकी हुई बातचीत को फिर से शुरू करने की कोशिश करेंगे। हालांकि मुनीर का जोर इस बात पर ज्यादा है कि एक बार फिर से दोनों देशों के नेता इस्लामाबाद की जमीन पर आएं ताकि पाकिस्तान को इंटरनेशनल लेवल पर थोड़ी इज्जत मिल सके। वहीं व्हाइट हाउस की तरफ से अभी तक आसिम मुनीर को मिलने का समय नहीं दिया गया है।

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वॉशिंगटन कब जाएंगे मुनीर?

रिपोर्ट्स की मानें तो मुनीर 17 अप्रैल को तेहरान से वापस लौटने के बाद सीधे वाशिंगटन के लिए उड़ान भरेंगे। तेहरान में उन्हें ईरानी टॉप कमांडर्स और नेताओं द्वारा समझा दिया गया है कि ईरान की शर्तें और अमेरिका के लिए संदेश क्या है। अब मुनीर का काम सिर्फ इतना है कि वे वॉशिंगटन जाएं और वहां के टॉप लीडर्स को ये मैसेज दें। हालांकि तेहरान के तुरंत बाद वाशिंगटन का यह दौरा दिखाता है कि क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान अपनी इमेज चमकाने पर खूब जोर दे रहा है। इस बीच Axios की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वाशिंगटन और तेहरान संघर्ष खत्म करने के लिए किसी समझौते के करीब पहुंच सकते हैं, जिससे थोड़ी उम्मीद जरूर जगी है।

एक बार फेल, दोबारा की तैयारी में इस्लामाबाद

हाल ही में पाकिस्तान ने इस्लामाबाद में अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के बीच सीधी बातचीत की मेजबानी की थी। यह कई दशकों में दोनों देशों के बीच सबसे हाई-लेवल संपर्क माना गया। हालांकि ये बातचीत किसी अंतिम समझौते के बुरी तरफ फेल हो गई, वहीं अब एक बार फिर से दोनों पक्षों ने बातचीत जारी रखने की इच्छा जताई। दूसरी तरफ, मुनीर का वाशिंगटन दौरा ऐसे समय हो रहा है जब अमेरिका-ईरान बातचीत में संभावित दोनों तरफ के लोग जंग खत्म करना चाहते हैं। इस पूरे मामले ने शहबाज शरीफ की हैसियत पर भी सवाल खड़ा कर दिया है। दरअसल आसिम मुनीर न तो प्रधानमंत्री हैं और न ही कोई मंत्री, फिर वे कैसे इस बातचीत को लीड कर रहे हैं, ये सवाल उठ रहें। लिहाजा अपने इज्जत बचाने के लिए शहबाज शरीफ सऊदी के दौरे पर निकल गए हैं ताकि खुद को थोड़ा बिजी दिखा सकें।

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