Video: आखिरकार दुनिया के सामने आए अशरफ गनी, बोले- भगोड़ा कहने वाले मुझे नहीं जानते, वहां रुकता तो..
काबुल, 18 अगस्त। राष्ट्रीय राजधानी काबुल पर कब्जे के साथ ही अफगानिस्तान में एक बार फिर तालिबानी राज का आगाज हो चुका है। 15 अगस्त को तालिबान के प्रवेश के साथ ही तत्कालीन राष्ट्रपति अशरफ गनी अफगानिस्तान छोड़ कथित रूप से पड़ोसी देश तजाकिस्तान रवाना हो गए। दो दिनों तक अज्ञातवास में रहने के बाद बुधवार को अशरफ गनी के यूएई में होनी की पुष्टि की गई। इस बीच देश छोड़ने के बाद बुधवार की शाम वह पहली बार दुनिया के सामने आए और अफगानिस्तान में तालिबान के नाम पर अपना संदेश दिया।

अपने भाषण में पूर्व राष्ट्रपति अशरफ गनी ने कहा कि वह अफगानिस्तान नहीं छोड़ना चाहते थे, उन्हें उनकी इच्छा के खिलाफ देश छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा। अशरफ गनी ने इस दौरान उन अटकलों को भी खारिज किया जिसमें पैसे लेकर भागने की बात कही जा रही है। अशरफ गनी ने कहा,
मैंने अपने मुल्क के लोगों को खूनी जंग से बचाया है। मैं अपने सुरक्षाबलों और सेना का शुक्रिया अदा करता हूं। मुझे मेरी इच्छा के खिलाफ देश से बाहर भेजा गया। सुरक्षा अधिकारियों की सलाह के बाद देश छोड़ा हूं क्योंकि कोई अनहोनी हो सकती थी।
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अशरफ गनी ने सोशल मीडिया पर लिखे अपने बयान को दोहराते हुए कहा कि अगर मैं अफगानिस्तान में रहता तो कत्लेआम मच जाता। सुरक्षा कारणों की वजह से अफगानिस्तान से दूर हूं। पूर्व राष्ट्रपति ने राष्ट्र के नाम संबोधन में लोगों से पूरा सच जानने की अपील की है। अशरफ गनी आगे कहते हैं,
काबुल में तालिबान के आते ही मेरी जान पर खतना होने की आशंका जताई गई थी, जो लोग मुझे नहीं जानते वो फैसला ना सुनाएं, तालिबान से बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकल रहा था। भगोड़ा कहने वाले मेरे बारे में नहीं जानते हैं, मैं शांति से सत्ता सौंपना चाहता था। मैं अफगानिस्तान वापस लौटूंगा और अफगानिस्तान के लोगों को इंसाफ दिलाएंगे।












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