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करेंसी बदलकर अर्जेंटीना की अर्थव्यवस्था सुधारेंगे नये राष्ट्रपति, जेवियर आजमाएंगे 'मोदी सरकार' वाला प्लान?

Argentina's presidential Election Result: अर्जेंटीना में रविवार को हुए राष्ट्रपति चुनाव के नतीजों में वामपंथी सरकार का सूपड़ा साफ हो गया है और देश की अर्थव्यवस्था को गर्त में पहुंचाने वाली सरकार को जनता ने सिरे से खारिज कर दिया है। वहीं, जिस शख्स को देश की जनता ने अपना नया राष्ट्रपति चुना है, उनका नाम जेवियर माइली है, जो अपने उग्र और दक्षिणपंथी विचारों के लिए अकसर विवादों में घिरे रहे हैं।

लेकिन, जेवियर माइली के राष्ट्रपति बनने के बाद अब अर्जेंटीना की करेंसी पेसो पर खतरा मंडरा रहा है, क्योंकि जेवियर माइली ने अपने चुनावी वादे में कहा था, कि अगर वो राष्ट्रपति बनते हैं, तो देश को महंगाई से निजात दिलाने के लिए वो पेसो को डॉलर से बदल देंगे।

Argentina’s presidential Election Result

आपको बता दें, कि ये प्लान कुछ कुछ ऐसा ही है, जैसा मोदी सरकार ने भ्रष्टाचार को खत्म करने के इरादे से भारत में नोटबंदी करने का फैसला किया था। साल 2017 में मोदी सरकार ने उस वक्त चलने वाले 500 और एक हजार के नोट को अवैध कर दिया था और उसकी जगह पर 500 और 2000 रुपये की नई करेंसी चलन में लेकर आई थी। हालांकि, अर्जेंटीना में देश की ही करेंसी को बदल दिया जाएगा और उसकी जगह पर नई करेंसी डॉलर का इस्तेमाल किया जाएगा। अर्जेंटीना में अभी जो करेंसी चलती है, उसका नाम पेसो है।

जेवियर माइली का चुनावी कैम्पेन अर्जेंटीना की अर्थव्यवस्था को डॉलर में बदलने की इच्छा पर टिका हुआ था और उनके कैम्पेन डॉलरीकरण का मतलब है, कि अर्जेंटीना अब अपनी करेंसी पेसो को छोड़ देगा और अमेरिकी डॉलर को अपनी मुद्रा के रूप में उपयोग करेगा।

एक्सपर्ट्स का कहना है, कि अगर नये राष्ट्रपति ऐसा अधिनियम पारित करते हैं, तो फिर ये देश के भविष्य को एक अज्ञात दिशा में धकेल देंगे, क्योंकि अभी तक ऐसा नहीं हुआ है, जब अर्जेंटीना जितनी बड़ी अर्थव्यवस्था वाले किसी देश ने अपनी मौद्रिक नीति की बागडोर वाशिंगटन के नीकि निर्माताओं को सौंपी हो।

हालांकि, इससे पहले इक्वाडोर और अल साल्वाडोर ने भी मुद्रास्फीति से निपटने के लिए अपनी अर्थव्यवस्थाओं का डॉलरीकरण किया है, लेकिन इन देशों की अर्थव्यवस्था काफी छोटी है, लिहाजा इनके लिए ये फैसला करना मुश्किल नहीं था।

अर्जेंटीना की करेंसी बदलेंगे नये राष्ट्रपति?

आपको बता दें, कि अर्जेंटीना में दुनिया में सबसे ज्यादा महंगाई दर है और पिछले हफ्ते जारी किए गये आंकड़ों से पता चलता है, कि कीमतें साल-दर-साल 142% तक बढ़ चुकी हैं। अर्जेंटीना की मुद्रा को पेसो से अमेरिकी डॉलर में बदलने का माइली का प्रस्ताव इस तर्क पर आधारित है, कि डॉलर, पेसो से काफी ज्यादा मजबूत है और पेसो के विपरीत, इसे अपनी मर्जी के मुताबिक मुद्रित नहीं किया जा सकता है।

जेवियर माइली के करेंसी बदलने के प्रस्ताव ने अंतर्राष्ट्रीय ध्यान आकर्षित किया है और आलोचकों ने इस प्रस्ताव के खिलाफ कई चेतावनियां दी हैं, जो इस कदम को स्ट्रेटजैकेट के रूप में संदर्भित करते हैं। आलोचकों का कहना है, कि डॉलरीकरण की वजह से अर्जेंटीना का रिजर्व बैंक, ब्याज दर में बदलाव जैसे मौद्रिक नीति के फैसलों, जिससे देश की सरकार अपनी अर्थव्यवस्था को लेकर फैसले लेती है, वही अधिकार खो देगी, लिहाजा देश अपनी स्वायत्तता खो देगा।

देश के वर्तमान अर्थव्यवस्था मंत्री और माइली के प्रतिद्वंद्वी सर्जियो मस्सा ने राष्ट्रीय संप्रभुता के आत्मसमर्पण के रूप में डॉलरकरण की योजना की आलोचना की थी।

हालांकि, वाशिंगटन डीसी स्थित एक उदारवादी आर्थिक थिंक टैंक, कैटो इंस्टीट्यूट के विश्लेषकों का मानना है, कि दशकों से चली आ रही महंगाई की समस्या पर काबू पाने के लिए, देश की अर्थव्यवस्था का डॉलरीकरण एक व्यावहारिक रणनीति हो सकता है और इसने नये राष्ट्रपति के प्रस्ताव का समर्थन किया है।

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