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जॉर्डन में खुदाई के दौरान मिला 9 हजार साल पुराना मंदिर, रेगिस्तान में छिपा मिला दुर्लभ मंदिर का खंडहर

जॉर्डन के रेगिस्तान में पुरातत्वविदों ने हजारों साल पुराना मंदिर खोजा है।

अम्मान, फरवरी 23: मुस्लिम बाहुल्य देश जॉर्डन में पुरातत्वविदों को खुदाई के दौरान चमत्कारिक खजाना हाथ लगा है। जॉर्डन में फ्रांसीसी पुरातत्वविदों ने खुदाई के दौरान पूर्वी रेगिस्तान में हजारों साल पुराने एक मंदिर की खोज की है। जांच के दौरान पुरातत्वविदों को पता चला है कि, ये मंदिर करीब 9 हजार साल पुराना है।

9 हजार साल पुराना मंदिर

9 हजार साल पुराना मंदिर

जॉर्डन के पुरातत्वविभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, जॉर्डन और फ्रांसीसी पुरातत्वविदों की एक टीम ने मंगलवार को कहा कि, उसे जॉर्डन के पूर्वी रेगिस्तान में एक सुदूर नवपाषाण स्थल पर लगभग 9,000 साल पुराना एक मंदिर मिला है। रिपोर्ट में कहा गया है कि, मंदिर की लंबी लंबी दीवारें, जो एक तरफ आकर मिलती हैं, उसे मध्य पूर्व के रेगिस्तान में खोजने में कामयाबी हासिल की गई है।

क्या बोले जॉर्डन के अधिकारी

क्या बोले जॉर्डन के अधिकारी

इस परियोजना के को-डायरेक्टर और जॉर्डन के पुरातत्वविद् वेल अबू-अजीजा ने इस खोज का एक 'चमत्कार' ही कहा है। उन्होंने कहा कि, ये एक अद्वितीय खोज है और जो भी अवशेष मिले हैं, वो पूरी तरह से संरक्षित मिले हैं। उन्होंने कहा कि, यह मंदिर करीब 9 हजार साल पुराना है और ये अभी भी अपनी पुरानी अवस्था में ही बरकरार है। उन्होंने कहा कि, ये मंदिर रेत में दबा था और पूरी तरह से संरक्षित था।

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    किस हाल में मिला मंदिर?

    जॉर्डन के पुरातत्वविद् वेल अबू-अजीजा ने कहा कि, ''इस धर्मस्थल के भीतर दो नक्काशीदार खड़े पत्थर मिले हैं, जिनमें एंथ्रोपोमोर्फिक (इंसानों की तरफ की) आकृतियां बनी थीं। उन्होंने कहा कि, मंदिर के अंदर एक रेगिस्तानी पतंग की तरह दिखने वाले एक हवन करने जैसा वेदी मिला है। वहीं, यहां पर चूल्हा, समुद्री गोले और गजेल जाल के छोटे मॉडल मिले हैं।

    आध्यात्मिक रोशनी डालता है मंदिर

    आध्यात्मिक रोशनी डालता है मंदिर

    शोधकर्ताओं ने कहा है कि, मंदिर "अब तक अज्ञात नवपाषाण आबादी के प्रतीकवाद, कलात्मक अभिव्यक्ति के साथ-साथ आध्यात्मिक संस्कृति पर नई रोशनी डालता है।" बयान में कहा गया है कि, यहां पर जाल भी मिले हैं, जिससे पता चलता है कि, यहां पर जो लोग रहते हैं, वो समुद्री मछलियों के शिकार करने में माहिर रहे होंगे और यहां जो चीजें मिली हैं, उससे पता चलता है कि, ये चीजें उनके सांस्कृतिक, आर्थिक और प्रतीकात्मक तौर पर उनके जीवन के केन्द्र में रही होंगी।

    टीम में कौन कौन?

    टीम में कौन कौन?

    आपको बता दें कि, पुरातत्वविदों की इस टीम में जॉर्डन के अल हुसैन बिन तलाल विश्वविद्यालय और फ्रेंच इंस्टीट्यूट ऑफ द नियर ईस्ट के पुरातत्वविद शामिल थे। पिछले एक साल से इस जगह पर पुरातत्वविद लगातार रिसर्च और खुदाई कर रहे थे।

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