सालों बाद दोस्त बनेंगे सऊदी अरब और इजरायल, नेतन्याहू बोले- साथ मिलकर करेंगे ‘नए पश्चिम एशिया’ का निर्माण
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा कि इजरायल-सऊदी अरब के साथ शांति समझौते के लिए एक ऐतिहासिक सफलता के करीब है। इस दौरान उन्होंने कहा कि इस शांति से एक नये पश्चिम एशिया का निर्माण होगा।
अपने 25 मिनट के भाषण में नेतन्याहू इस बात पर जोर दिया है कि फिलिस्तीनियों को ऐसे समझौतों पर "वीटो" नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि फिलिस्तीन को इस शांति से काफी लाफ हो सकता है।

नेतन्याहू ने कहा, "मैं लंबे समय से फिलिस्तीनियों के साथ शांति स्थापित करने की कोशिश कर रहा हूं। लेकिन मेरा यह भी मानना है कि हमें फ़िलिस्तीनियों को अरब देशों के साथ नई शांति संधियों पर वीटो नहीं देना चाहिए।''
नेतन्याहू ने इजरायल और सऊदी अरब के बीच औपचारिक संबंधों की संभावना की सराहना करते हुए अमेरिका के प्रयासों की प्रशंसा की। अमेरिका बीते कुछ समय से सऊदी अरब और इजरायल के बीच दोस्ती के प्रयास में गंभीरता से प्रयास कर रहा है।
अपने संबोधन के दौरान नेतन्याहू ने इजरायल का एक नक्शा भी दिखाया जिसमें जिसमें वेस्ट बैंक और गाजा को इजरायल के हिस्से के रूप में दिखाया गया था। इसे दिखाते हुए नेतन्याहू ने उन छह देशों को दिखाया, जिन्होंने इजरायल के साथ संबंध सामान्य कर लिए हैं, जिनमें चार ऐसे देश भी शामिल हैं, जिन्होंने 2020 में अब्राहम समझौते तथाकथित रूप से ऐसा किया था।
नेतन्याहू ने कहा, "इसमें कोई संदेह नहीं है कि अब्राहम समझौते ने शांति के एक नए युग की शुरुआत की। लेकिन मेरा मानना है कि इजरायल और सऊदी अरब के बीच एक ऐतिहासिक शांति के शिखर पर हैं। इसमें और अधिक सफलता मिल सकती है। उन्होंने कहा कि इजरायल और सऊदी अरब के बीच शांति वास्तव में एक नए मिडिल ईस्ट(पश्चिम एशिया) का निर्माण करेगी।
इससे पहले बुधवार को अमेरिकी समाचार टीवी फॉक्स न्यूज के साथ बातचीत में क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने उन रिपोर्ट्स को भी खारिज किया था, जिसमें कहा गया था कि उन्होंने इजराइल से संबंध सामान्य करने की वार्ता रोक दी है। उन्होंने कहा कि सऊदी अरब और इजरायल हर दिन करीब आ रहे हैं।
मोहम्मद बिन सलमान ने कहा कि पहली बार है जब चीजें गंभीर लग रही हैं। उन्होंने कहा कि उनका देश इजरायल के साथ काम कर सकता है और यह मायने नहीं रखता है कि वहां किसकी सरकार है। क्राउन प्रिंस ने कहा कि इजरायल के साथ यह समझौता, शीत युद्ध के समाप्त होने के बाद का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक समझौता होगा।
इसके साथ ही क्राउन प्रिंस ने कहा था कि सब कुछ इस पर निर्भर करता है कि फलस्तीनियों के साथ इजरायल कैसा व्यवहार करता है। उन्होंने कहा, ''अगर हमें एक ऐसे समझौते पर पहुंचने में कामयाबी मिलती है, जिससे फलस्तीनियों की जरूरतें पूरी होती हैं और इलाके में शांति आती है तो हम किसी के साथ भी काम करने को तैयार हैं।''












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