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आसियान सम्मेलन से पहले अमेरिका ने बनाई रणनीति, भारत के लिए चीन को झटका देने का मौका

अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन 2 अगस्त से 6 अगस्त तक आसियान की बैठक में हिस्सा लेंगे। जानिए भारत के लिए भी आसियान कितना महत्वपूर्ण है।

वॉशिंगटन/नई दिल्ली, अगस्त 01: एशिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाने वाले आसियान सम्मेलन में अमेरिका ने अपनी रणनीति तैयार कर ली है और अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन 2 अगस्त से 6 अगस्त के दौरान आसियान सम्मेलन में ऑनलाइन हिस्सा लेंगे। इस दौरान वो आसियान देशों को को भी संबोधित करने वाले हैं। रिपोर्ट के मुकाबिक अमेरिकी विदेश मंत्री 5 ऑनलाइन मंत्रिस्तरीय बैठकों में हिस्सा लेने वाले हैं, वहीं चीन से तनाव के बीच भारत के लिए ये भी इस बार का आसियान सम्मेलन काफी महत्वपूर्ण होने वाला है।

अमेरिका की रणनीति

अमेरिका की रणनीति

माना जा रहा है कि आसियान सम्मेलन में इस बार अमेरिका कुछ महत्वपूर्ण घोषणाएं कर सकता है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा है कि विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन 2 अगस्त से 6 अगस्त के बीच यूएस-आसियान, पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन (ईएएस), आसियान क्षेत्रीय बैठक फोरम (एआरएफ), मेकांग-यूएस पार्टनरशिप और फ्रेंड्स ऑफ द मेकांग मंत्रिस्तरीय बैठकों में हिस्सा लेंगे। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि आसियान की बैठक के दौरान अमेरिका का मकसद आसियान देशों के बीच क्षेत्रीय शांति और इंडो पैसिफिक के मुद्दे पर बात करेंगे। आपको बता दें कि आसियन देशों में इंडोनेशियास, मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड, ब्रुनेई, वियतनाम, लाओस, म्यांमार और कंबोडिया है। भारत आसियान का सदस्य तो नहीं है, लेकिन आसियान के साथ भारत का काफी गहरा रिश्ता है।

म्यांमार और चीन का मुद्दा अहम

म्यांमार और चीन का मुद्दा अहम

अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि "अमेरिकी विदेश मंत्री जलवायु संकट को दूर करने के लिए साहसिक कार्रवाई करने के महत्व को भी उठाएंगे। एंटनी ब्लिंकन आसियान देशों को भरोसा देंगे कि संयुक्त राज्य अमेरिका समुद्र की स्वतंत्रता और यूएनसीएलओएस समेत अंतरराष्ट्रीय कानून की रक्षा में अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ खड़ा है।" इसके साथ ही अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन से म्यांमार की स्थिति की समीक्षा करने के साथ साथ आसियान से हिंसा को समाप्त करने की भी कोशिश करेंगे। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि एंटनी ब्लिंकर म्यांमार के सैन्य शासक से अपील करेंगे कि वो सभी राजनीतिक कैदियों को रिहा करते हुए देश में फिर से जनता की सरकार को लागू करें। चूंकी आसियान के ज्यादातर देशों के ऊपर चीन ने काफी दवाब बना रखा है, लिहाजा अमेरिका ये भी कोशिश करेगा कि वो आसियान देशों को सुरक्षा सुनिश्चित करे।

आसियान और भारत

आसियान और भारत

भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी की नींव का सबसे प्रमुख स्तंभ आसिया है और आसियान के ज्यादातर देशों के साथ भारत के काफी मजबूत संबंध है। खासकर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में आसियान पर चीन दवाब बनाने की कोशिश करता है, लिहाजा आसियान देशों को अमेरिका और भारत का मजबूत समर्थन चाहिए और भारत लगातार आसियान के साथ खड़ा रहा है। भारत के पास इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में आसियान और पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन के लिए अलग अलग मिशन हैं और आसियान भारत का चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। आसियान के साथ भारत का अनुमानित व्यापार करीब 10.6 प्रतिशत है और भारत के कुल निर्यात का आसियान से निर्यात करीब 11.28 प्रतिशत है।

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