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Analysis: ट्रंप-शरीफ-मुनीर मुलाकात भारत को कितना खतरा? जानिए एक्सपर्ट ने क्या-क्या खुलासा किया?

Analysis: अमेरिका और पाकिस्तान के रिश्ते एक दिलचस्प दौर में प्रवेश कर चुके हैं। डोनाल्ड ट्रंप के व्हाइट हाउस लौटने के नौ महीनों में, कई राजनयिक आदान-प्रदान हुए हैं, जो पाकिस्तान के प्रति एक नई गर्मजोशी को दर्शाते हैं। यह स्थिति बाइडेन प्रशासन के समय की ठंडक से बिल्कुल अलग है। ट्रंप का आभार और मुनीर के साथ मुलाकात मार्च में कांग्रेस के ज्वॉइंट सेशन में अपने पहले संबोधन में ट्रंप ने पाकिस्तान का आभार जताया।

आतंकवाद और पाकिस्तान की तारीफ

उन्होंने 2021 के काबुल हवाई अड्डे हमले से जुड़े वांछित ISIS-K आतंकी की गिरफ्तारी में पाकिस्तान की भूमिका की तारीफ की। तीन महीने बाद, ट्रंप ने व्हाइट हाउस में पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर को लंच पर बुलाया। शरीफ और मुनीर का वॉशिंगटन दौरा पिछले सप्ताह ट्रंप ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख मुनीर का गर्मजोशी से स्वागत किया। यह खास इसलिए भी था क्योंकि शरीफ छह साल बाद वॉशिंगटन पहुंचे थे।

Analysis

भारत के लिए कितनी चिंता का विषय

ट्रंप के पहले कार्यकाल में अमेरिका अफगानिस्तान में व्यस्त था और पाकिस्तान के आतंकवाद विरोधी प्रयासों को लेकर संशय बना हुआ था। भारत के लिए संकेत भारत के लिए फिलहाल चिंता की बड़ी वजह नहीं है, लेकिन दिल्ली को इस बदलाव पर नजर रखनी चाहिए। खासकर ऐसे समय में जब अमेरिका और भारत के रिश्ते कुछ कमजोर दिखाई दे रहे हैं। अमेरिका के लिए पाकिस्तान न सिर्फ आतंकवाद विरोधी प्रयासों बल्कि अफगानिस्तान और ईरान जैसे क्षेत्रीय मुद्दों में भी प्रासंगिक है।

लेन देन के रिश्ते

लेन-देन आधारित रिश्ते विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका-पाकिस्तान रिश्ते रणनीतिक दृष्टि से कमजोर हैं। प्रौद्योगिकी, व्यापार या साझा मूल्यों पर आधारित साझेदारियों के बजाय यह रिश्ते ज्यादातर लेन-देन पर टके रहते हैं। पाकिस्तान द्वारा "ऑपरेशन सिंदूर" में ट्रंप के हस्तक्षेप के लिए उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित करना इसका ताजा उदाहरण है। इतिहास का सबक अफगान-सोवियत युद्ध के समय भी अमेरिका ने पाकिस्तान को उसी समय मदद दी जब इस्लामाबाद उसके हितों के अनुरूप था।

काम पूरा, तू कौन-मैं कौन

मकसदा पूरा होने पर मदद से हाथ खींच लिए जाते थे, या रोक दी जाती थी। फर्क सिर्फ इतना है कि ट्रंप संस्थागत परंपराओं का सीमित सम्मान करते हैं, जिससे पाकिस्तान की सेना प्रमुख मुनीर की भूमिका और मजबूत हो सकती है। भारत के लिए चुनौती मुनीर का यह बढ़ता प्रभाव पाकिस्तान में सेना की पकड़ को और मजबूत करेगा। ऐसे में भारत को पाकिस्तानी सेना की किसी भी साहसिक कार्रवाई के लिए तैयार रहना होगा।

पाकिस्तान एक न्यूक्लियर पावर है, 25 करोड़ की आबादी वाला देश है और अस्थिर क्षेत्र में स्थित है। इसलिए अमेरिका का उसके साथ जुड़ाव स्वाभाविक है। भारत और पाकिस्तान की वास्तविकता भले ही मुनीर पाकिस्तान को भारत के बराबर दिखाने की कोशिश करें, लेकिन हकीकत अलग है। भारत का जीडीपी पाकिस्तान से करीब 10 गुना बड़ा है। यह अंतर सिर्फ आर्थिक स्तर पर ही नहीं, बल्कि वैश्विक कद के मामले में भी लगातार बढ़ रहा है।

भारत को करना होगी रणनीति स्पष्ट

भारत की प्राथमिकता ट्रंप-शरीफ-मुनीर की बंद कमरे की मुलाकात जैसे घटनाक्रमों के बीच भारत को अपनी रणनीति स्पष्ट करनी होगी। दिल्ली को अपनी बढ़ती ताकत के लिए महत्वपूर्ण देशों के साथ संबंध गहरे करने, घरेलू सुधारों में तेजी लाने और राष्ट्रीय एकता बनाए रखने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। अंततः, भारत को अमेरिका के साथ अपने संबंधों को फिर से मजबूत करने को ही प्राथमिकता देनी चाहिए।

इस एनालिसिस पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

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